आजकल यह मौसम बदलते भी खूब हैं, दिल से दिल लगाने की सजा पाते भी खूब हैं : निक्की शर्मा (रश्मि)
याद
आजकल यह मौसम
बदलते भी खूब हैं
दिल से दिल लगाने की
सजा पाते भी खूब हैं
बदलता नहीं है मौसम
हर शु बहार का
यह तेरा दिया गम
महफिल में सजाते भी खूब हैं
ना पूछो कि हमने ढूंढा कहां
वफाएं मौसम को
पर यह हमसे
छुपते छुपाते भी खूब हैं
दिल की बातें ना पूछो कि
हमने कहा किससे
जो बेवफा हो के वफा को
चाहते भी खूब हैं
आहों की सौगात मिली
जब अपने वफा यार से
उन सौगातो को दिल से
लगाते भी खूब हैं
एक एक दिन बीत रहा भारी सा
फिर भी तेरी याद में
सितारे अब सजाते भी खूब हैं
आजकल यह मौसम बदलते भी खूब हैं
दिल से दिल लगाने की सजा
पाते भी खूब हैं
निक्की शर्मा (रश्मि) मुम्बई

