कलयुग के दानवीर दयाराम
सभी को मन होता है कि मै समाज सेवा करू , मन में बहुत बडी महत्वकान्छा रहती है । इसलिए सब कोई समाज सेवा नही कर पाते है । समाज सेवा करने के लिए पवित्र मन होना आवश्यक होता है । हृदय और स्वच्छ विचार से समाज सेवा करने वाले व्यक्ति समाज मे बहुत ही कम होते है । समाज सेवा करने वाले बहुत व्यक्ति मे से एक व्यक्ति का नाम है दयाराम अग्रवाल ।
वि सं २०२२ साल मे दयाराम जी का जन्म काठमाण्डू में हुआ । वाल्यकाल से ही समाज सेवा की भावना थी बचपन से ही समाज सेवा करने की भावना थी । स्कूल मे भी गरीव बच्चो काे कापी ,पेन्सिल और पैसे देकर सहयोग करते हैं । निःस्वार्थ भावना से सामाजिक कार्य मे लगे अग्रवाल अभी आर्थिक रुप मे विपन्न दीन दुःखी को सहारा बने हुए हैं । दो वर्ष से पशुपति मे प्रति दिन २०० लोगों को निःशुल्क भोजन कराते आ रहे हैं ।

वे कहते है – भोजन के लिए पशुपति मे सभी व्यक्ति को खुला है और भोजन मे सभी दिन चावल और दाल ही खिलाते आ रहा हूँ । मै जिस वक्त छोटा था उसी समय से अपने पिताजी का सहयोग करने की भावनाओ को देख कर समाजसेवी बनने मे मुझे प्रेरित किया है । अभी मेरे पिताजी ८५ वर्ष के है । वे अभी भी पशुपतिनाथ दर्शन करना नही छोडे है । अग्रवाल बताते है -किसी भी जीवित प्राणी को भूखे काे खाना खिलाना सबसे बडा धर्म है । खाना मे प्रति दिन दाल, भात, अचार और तरकारी की व्यवस्था रहती है फिर भी दिन के अनुसार तरकारी में बदलाव रहता है । वे आगे कहते है- यदि खाना खत्म हो जाता है तो चुडा से भी पेट भरने का काम हो जाता है । पशुपति में खाना खाने का समय सुवह ९ बजे से शुरु हो जाता है । पशुपति मे अनाथ से लेकर विद्यार्थी , कर्म और भाग्य साथ ना देनेवाले का तथा राजनीति मे लगकर असफल होने वाले विभिन्न व्यक्ति भी भोजन करने के लिए आते है । मै , उन सभी के साथ समान व्यवहार करता आया हूँ और करुँगा भी ।


