Mon. Jul 6th, 2020

कलयुग के दानवीर दयाराम 

५ अप्रिल ,काठमान्डू
आर एन यादव
सभी को मन होता है कि  मै समाज सेवा करू , मन में बहुत बडी महत्वकान्छा रहती है । इसलिए सब कोई समाज सेवा नही कर पाते है । समाज सेवा करने के लिए पवित्र मन होना आवश्यक होता है । हृदय और स्वच्छ विचार से समाज सेवा करने वाले व्यक्ति समाज मे बहुत ही कम होते है । समाज सेवा करने वाले बहुत  व्यक्ति मे से एक व्यक्ति का नाम है दयाराम अग्रवाल ।
    वि सं २०२२ साल मे दयाराम जी का जन्म काठमाण्डू में हुआ  । वाल्यकाल से ही समाज सेवा की  भावना थी  बचपन से ही  समाज सेवा करने की भावना थी  । स्कूल मे भी गरीव बच्चो काे कापी ,पेन्सिल और पैसे देकर सहयोग करते हैं ।  निःस्वार्थ भावना से सामाजिक कार्य मे लगे अग्रवाल अभी आर्थिक रुप मे विपन्न दीन दुःखी को सहारा बने हुए हैं । दो वर्ष से पशुपति मे प्रति दिन २०० लोगों को निःशुल्क भोजन कराते आ रहे हैं ।
वे कहते है – भोजन के लिए पशुपति मे सभी व्यक्ति को खुला है और भोजन मे सभी दिन चावल और दाल ही खिलाते आ रहा  हूँ ।  मै जिस वक्त छोटा था उसी समय से अपने पिताजी का सहयोग करने की भावनाओ को देख कर समाजसेवी बनने मे मुझे प्रेरित किया है । अभी मेरे पिताजी ८५ वर्ष के है । वे अभी भी पशुपतिनाथ दर्शन करना  नही छोडे है । अग्रवाल बताते है -किसी भी जीवित प्राणी को भूखे काे खाना खिलाना सबसे बडा धर्म  है । खाना मे प्रति दिन दाल, भात, अचार और  तरकारी की व्यवस्था रहती है फिर भी  दिन के अनुसार तरकारी में बदलाव रहता है ।  वे आगे कहते है-  यदि खाना खत्म हो जाता है तो  चुडा से  भी  पेट भरने  का काम हो जाता है । पशुपति में  खाना खाने का समय  सुवह ९ बजे से  शुरु हो जाता है । पशुपति मे अनाथ से लेकर  विद्यार्थी , कर्म और  भाग्य साथ ना देनेवाले का  तथा  राजनीति मे  लगकर असफल होने वाले विभिन्न व्यक्ति भी  भोजन करने के लिए आते है ।  मै , उन सभी के साथ समान व्यवहार करता आया हूँ और करुँगा भी ।

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