Sun. Feb 23rd, 2020

हिमालिनी सम्वाददाता रेयाज को अश्लील गाली, सांसद् सिंहासन कलवार पर अशंका !

काठमांडू, २८ अप्रील । हिमालिनी मासिक तथा हिमालिनी डटकम के लिए वीरगंज सम्वाददाता रेयाज आलम पर गम्भीर आरोप लगाते हुए फेशबुक पर गाली–गलौज दी जा रही है । अरवीन्द यादव के नाम से निर्मित फेक फेशबुक आइडी प्रयोग करते हुए ऐसी घिनौनी हरकत हो रही है । हमारे सम्वाददाता रेयाज का फोटो रखकर शुरु में फेक एकाउन्ट वाले यादव ने लिखा है– ‘यह पत्रकार किसी और से पैसा लेकर खबर ऑनलाइन लिखता है ।’ उक्त पोष्ट रेयाज को भी टैक कर दिया गया है ।
उसके बाद उक्त पोष्ट में एमडी आलम अली और अरवीन्द ने इसतरह घिनौनी अश्लील कमेन्ट की है, जो हिमालिनी यहाँ उल्लेख नहीं कर सकती । इसतरह हिमालिनी के ऊपर आक्रमण करनेवाले कौन है ? इसके बारे में हिमालिनी ने खोजबीन शुरु की है । हमारी प्रारम्भिक अनुसन्धान से पता चला है कि अरवीन्द यादव के नाम से निर्मित उक्त एकाउन्ट ही फेक हैं, जो भारत (चम्पारण) साइट से खोला गया है । पता चला है कि उक्त एकाउन्ट ई–मेल आइडी से नहीं, फोन नम्बर से खोला गया था । उक्त आइडी बनाने के लिए ं+९१७२०४४६८६६२ नम्बर का फोन नं. प्रयोग किया गया है । उल्लेखित नम्बर राजन गुप्ता के नाम में रजिष्ट्रर्ड है, जो भारत (चम्पारण) क्षेत्र में एक्टिभ दिखाई देता है ।
अब हैरानी की बात तो यह है कि उक्त नम्बर से फेंक एकाउन्ट खोलकर हिमालिनी सम्वाददाता के ऊपर क्यो इस तरह का आक्रमण किया जा रहा है ? और इस नम्बर का नेपाल रिलेशन क्या है ? इस प्रश्न को लेकर तलाश करने पर हिमालिनी को सूचना मिली कि इस नम्बर से नेपाल में बार–बार सम्पर्क होता आ रहा है । और यह भी पता चला कि वह व्यक्ति नेपाल के प्रदेश सांसद (प्रदेश नं. २ के) सिंहासन साह कलवार के नजदिकी हैं ।
तब हिमालिनी को पता चला कि हमारे सम्वाददाता रेयाज पर क्यों घिनौनी आरोप लग रहा है ! अरविन्द के नाम से फेक एकाउन्ट बनाकर रेयाज के ऊपर आक्रमण होने से पहले रेयाज ने ही वीरगंज हिमालिनी डटकम में एक समाचार लिखे थे, जहां सिंहासन द्वारा हो रही गैरकानूनी कार्य के बारे में उल्लेख है । उक्त समाचार का लिंक निचे दी गई है ।
यह सब पता चलने के बाद हिमालिनी ने उल्लेखित नम्बर पर बारबार फोन सम्पर्क भी किया, फोन तो उठाया जाता, लेकिन कोई भी जवाफ नहीं मिलता था । उसके बाद अरविन्द यादव के नाम से निर्मित उक्त फेक फेशबुक एकाउन्ट भी डी–एक्टिभ हो गया है । अभी उक्त एकाउन्ट तलाश करने पर भी नहीं मिलता । हिमालिनी इस विषय को गम्भीरता से ले रही है और इस विषय पर कानूनी प्रक्रिया साइबर क्राइम के तहत आगे बढ़ रही है ।

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