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पत्रकारों को प्रशासन का दलाल बनने से बचना चाहिए: मनोज बनैता

सिरहा, २८ मई ।

पत्रकारका आर्थिक मोह समाज को अन्धेरे की तरफ धकेलता है । सिरहा की जो बात करें तो यहाँ लोगों तक सही सूचनाएं नहीं पहुंच रही हैं। पत्रकार पुलिस और प्रशासन के स्टेनो बन गये हैं। जैसी सूचनाएं वह देते हैं, पत्रकार उसी को अपने अखबार/चैनल को भेज देते हैं। अपने स्तर पर सूचनाओं की पुष्टि करने तथा उससे अलग तथ्य खोजने की मेहनत से बचते हैं। सिरहा कभी राजनीति का विश्वविद्यालय हुवा करता था पर अभी के दौर मे यह जिला ड्रग्स का ‘ड्राई पोर्ट’बनता जा रहा है । आए दिन यहाँ ड्रग्स के साथ तस्कर पकडे जाते है । पिछ्ले वर्ष लाहान के एरिया से सैकडो ड्रग्स तस्करों को  डिएसपी गणेश चन्द ने हवालात मे ठुंसा था । डिएसपी चन्द के कडे रुख के कारण स्मग्लिङ्ग के आकाओ ने अपने रुट परिवर्तन किए । उनके तबाद्ले के बाद फिर से लाहान लगायत सिरहा ड्रग्स के दलदल मे फसगया । जिला की कमान सम्भाल्ने आए एसपी जीवन श्रेष्ठ जिस तरह से अपने आपको परिचित करवाया दरअसल ब्यवहार मे वो वैसे दिखे नही । उनके कार्यकाल मे हत्या, हिंसा, लुटपाट, अपहरण , महिला हिंसा, बलात्कार, तस्करी लगायतके घट्ना ने सिरहा को अति सबेदनशील जगह के रुप मे तब्दिल किया । लोगों में जागरूकता लाने में मीडिया की अहम भूमिका है ईसिलिए पत्रकारों को प्रशासन, नेताओं और धन्नासेठों का दलाल बनने से बचना चाहिए। सरकार, प्रशासन और पूंजीपति जनता को कभी कभी भ्रमित कर रहे होते है । उस समय पत्रकारोंको चाहिए कि वह जनता तक सही सूचनाएं पहुंचाएं और उसे जागरूक करें। मुख्यधारा का मीडिया बड़ी पूंजी से संचालित है, और पूंजीपति घरानों के सुरक्षा कवच का काम करता है। पूंजीवादी व्यवस्था के पक्ष में जनमत का निर्माण करता है। इसके उपभोक्ता और इसमें काम करने वाले प्रयास करें तो इसका इस्तेमाल एक हद तक आम जन के लिए भी हो सकता है लेकिन एसा होता नही है यहाँ ।

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