“”सब हा- बो कोनीं हो !”” लक्ष्मण नेवटिया
“”सब हा- बो कोनीं हो !””( व्यंग्य ) : लक्ष्मण नेवटिया,बिराटनगर
भोग में बो हो,
योग में बो कोनीं हो।
रात्री रमण में बो हो,
प्रात:भ्रमण में बो कोनीं हो।
आराम में बो हो,
व्यायाम में बो कोनीं हो ।
गरिष्ठ खानै में बो हो,
पौष्टिक खानै में बो कोनीं हो।
शराब पिणै में बो हो
दूध पिणै में बो कोनीं हो।
होतां होतां आखर बो ई होग्यो,
जिण को डर हो,
एक भोर में उणकै घर्यां
गाँव सगलो हो,
बो कोनीं हो!!


