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मिथिलांचल में १३ दिवसीय मधुश्रावणी व्रत रमणीय ढंग से मनाया जा रहा है

अंशु झा, २३ जुलाई, काठमांडू । मिथिलांचल अपने संस्कृतियों से परिपूर्ण है, यहां मानये जाने वाले पर्वों की कमी नहीं है, जिसमें से एक पर्व है मधुश्रावणी । यह पर्व नवविवाहिता स्त्री श्रावण महीना के कृष्ण पक्ष के पंचमी तिथि से प्रारम्भ करती है और शुक्ल पक्ष के तृतिया तिथि को विविध विधि विधान अनुसार समाप्त करती है ।
इस वर्ष का मधुश्रावणी पर्व २१ जुलाई से प्रारम्भ हुआ है अर्थात आज तीन दिन हो चुका है और अब दस दिन बांकी है । इस पर्व में नवविवाहिता पवित्र होकर नया वस्त्र धारण कर शाम को फूल एकत्रित करती हैं और उसी फूलों से सुबह पार्वती, शिव व विषहारा अर्थात सर्प का पूजा करती हैं । पूजा उपरांत शिवपुराण तथा अन्य धार्मिक कथाएं श्रवण करती हैं । तत्पश्चात सायंकाल में नमकरहित भोजन करती है ।
व्रत के अंतिम दिन अर्थात तेरहवां दिन व्रतालु को वाती में आग जलाकर दागने का कार्य भी होता है और उस पर चन्दन का लेप लगाया जाता है । इतना कठिन व्रत होने के बाबजुद भी यह व्रत मिथिलांचल में जीवित है ।

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