Tue. Jul 14th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

अनुच्छेद 370 हटने के बाद ईद शांतिपूर्ण रहा पर स्वतंत्रता दिवस शांतिपूर्वक संपन्न कराना चुनौती

 

भारत सरकार ने जम्मु कश्मीर के सभी पंचायतों में तिरंगा फहराने की सरपंचों को हिदायत दी है। इसके साथ ही भाजपा ने अपने स्तर पर जम्मू के साथ-साथ कश्मीर के 50 हजार स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की तैयारी की है। जम्मू संभाग में पांच अगस्त को लगाई गई पाबंदियां करीब-करीब पूरी तरह हटाए जाने के बाद लोगों में नए किस्म का उत्साह है। यही कारण है कि जम्मू शहर में कई घरों पर बुधवार दोपहर बाद से ही तिरंगा लहराने लगा।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की पहली ईद शांतिपूर्वक मनाई गई है। अब सुरक्षाबलों के लिए स्वतंत्रता दिवस समारोह को शांतिपूर्वक संपन्न कराना चुनौती होगी। तमाम सुरक्षा एजेंसियों को स्वतंत्रता दिवस पर अधिक सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। इसके लिए सभी ने अपने स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर और रियासी जिले को छोड़कर अन्य में अभी धारा 144 लागू है। कश्मीर संभाग में तो इसके तहत सख्त पाबंदियां हैं।

यह भी पढें   सरकार के विरोध में प्रदर्शन

जगह-जगह सुरक्षाबलों का कड़ा पहरा है।खुफिया एजेंसियों के पास लगातार इनपुट आ रहे हैं कि जैश-ए-मोहम्मद सहित कुछ अन्य संगठन मिलकर पर्व पर बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में हैं, खासकर कश्मीर में। इससे निपटना बड़ी चुनौती है। कुछ शरारती तत्व स्वतंत्रता दिवस पर सांप्रदायिक माहौल भी खराब कर सकते हैं। राजोरी, पुंछ, रामबन, किश्तवाड़, उधमपुर और जम्मू में शरारती तत्व माहौल खराब कर सकते हैं। इस पर भी पुलिस एवं प्रशासन की पूरी नजर है।

यह भी पढें   मेची राजमार्ग अंतर्गत इलाम के गोलाखर्क–राजदुवाली सड़क खण्ड अवरुद्ध

किश्तवाड़ और राजोरी जिला संवेदनशील है। यहां जरा सी अफवाह पर माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। इसलिए पुलिस और प्रशासन की इन दोनों जिलों पर विशेष नजर है। सूत्रों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के कुछ जिलों में स्वतंत्रता दिवस के बाद से मोबाइल इंटरनेट सेवा शुरू की जा सकती है। कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर डीजीपी दिलबाग सिंह और जम्मू के डिवकाम संजीव वर्मा से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों ने फोन नहीं उठाया।पांच अगस्त के बाद पांच जिलों को छोड़कर मोबाइल सेवा, लैंडलाइन सेवा पूरी तरह से ठप कर दी गई थी। इसकी वजह से तमाम पुलिस अफसरों के मोबाइल फोन भी बंद कर दिए गए।

यह भी पढें   पूर्व गृहसचिव पदमप्रसाद पोखरेल का निधन

हालांकि पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को आपस में बात करने के लिए सेटेलाइट फोन दिए गए थे। अब काफी जिलों में पुलिस अधिकारियों के मोबाइल नंबर काम करने शुरू हो गए हैं। कुछ जिलों में लैंडलाइन सेवाएं भी शुरू की गई हैं। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी सहित जिला पुलिस अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी काम करने लगे हैं।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *