लाल आयाेग का प्रतिवेदन आखिर सरकार सार्वजनिक क्याें नहीं कर रही ?

राष्ट्रीय जनता पार्टी द्वारा संघीय संसद् में ६ महिना से तराई–मधेस और थारुहट आन्दोलन का छानबिन प्रतिवेदन सार्वजनिक करने की माँग कई बार की गई है ।इसी विषय काे लेकर पिछले महीने प्रतिनिधि सभा की बैठक अवरुद्ध की गई थी । परन्तु सरकार अभी भी इस विषाय में गम्भीर नही है और न ही प्रतवेदन सार्वजनिक करने के लिए तैयार है । प्रतिवेदन में सरकार पर गम्भीर आराेप लगाया जाना इसे सार्वजनिक नहीं किए जाने का कारण माना जा रहा है ।
गिरीशचन्द्र लाल की अध्यक्षता में जाँचबुझ आयोग ने २०७२ सावन से करीब ६ महिना चले तराई–मधेस और थाहरुहट आन्दोलन में सत्तापक्ष द्वारा गैरन्यायिक हत्या हाेने की निष्कर्षसहित प्रतिवेदन तैयार किया गया है । आन्दोलन के समय सुशील कोइराला और केपी शर्मा ओली प्रधानमन्त्री थे । यह समाचार कान्तिपुर दैनिक में मातृका दाहाल ने लिखा है ।

