Mon. Sep 16th, 2019

नेपाल भारत मैत्री समाज द्वारा काठमाडूं में भारतीय स्वतन्त्रता दिवस पर शुभकामना आदान–प्रदान

काठमांडू,१६ अगस्त | आज राजधानी में भारत के ७३वें स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर नेपाल–भारत मैत्री समाज ने काठमाडूं में शुभकामना आदान–प्रदान कार्यक्रम का आयोजन किया । विभिन्न राजनीतिक पार्टी के नेता गण, पूर्व मन्त्री, कूटनीतिज्ञ, नागरिक समाज के अगुवा कार्यक्रम में वक्ता के रुप में मौजूद थे । समाज के अध्यक्ष प्रेम लश्करी कि अध्यक्षता में सम्पन्न कार्यक्रम में लोगों ने नेपाल–भारत संबंध और भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के बारे में चर्चा किए ।


नेपाल के लिए भारतीय राजदूत मंजीव सिंह पुरी, राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (संयुक्त) के अध्यक्ष पशुपति शमशेर राणा, नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के नेता गणेश साह, नेपाली कांग्रेस के नेता नवीन्द्रराज जोशी, राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) नेपाल के संयोजक राजकिशोर यादव, समाजवादी पार्टी के उपाध्यक्ष राजेन्द्र श्रेष्ठ, नागरिक समाज के अगुवा डा. सुन्दरमणि दीक्षित, भारत के लिए पूर्व नेपाली राजदूत प्रो. लोकराज बराल आदि कार्यक्रम में वक्ता के रुप में थे । उन लोगों ने भारतीय स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर नेपाल–भारत संबंध पर चर्चा करते हुए सम्पूर्ण भारतीय जनता को शुभकामना भी दिया ।

कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए नेपाल के लिए भारतीय राजदूत मंजीव सिंह पुरी ने कहा कि भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में नेपाल का भी बहुत बड़ा योगदान है । महात्मा गान्धी और नेपाली कांग्रेस के नेता एवं पूर्व प्रधानमन्त्री वीपी कोइराला से लेकर जयप्रकाश नारायण तक की चर्चा करते हुए राजदूत पूरी जी ने कहा कि नेपाल–भारत बीच पौराणिक एवं सामाजिक–सांस्कृतिक संबंध तो पहले से ही है, अब आर्थिक अन्तरनिर्भर का संबंध भी होना चाहिए, जो वीन–वीन सिच्युएसन में हो सके । कार्यक्रम के दौरान राजदूत महोदय ने नेपाल–भारत संबंध पर आधारित कुछ फोटोग्रापी भी प्रस्तुत किया ।

इसीतरह राप्रपा संयुक्त के अध्यक्ष पशुपति शमशेर को मानना है कि नेपाल–भारत संबंध इतनी गहरी और व्यापक है कि जिसको शब्दों में व्याख्या नहीं की जाती । उन्होंने आगे कहा– ‘यही संबंध के कारण कभी–कभार आपसी टकराव भी हो जाता है ।’ उनका सुझाव है कि संबंध को थप व्यापक और सुमधुर रखने के लिए दोनों पक्ष को सचेत और सजग रहने की जरुरत है । कार्यक्रम में उन्होंने ने यह भी कहा कि आज भारत विश्व में शक्तिशाली अर्थतन्त्र के रुप में उभर रहा है, जिससे नेपाल को सिखना चाहिए ।

नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के नेता गणेश साह ने कहा कि आज की युग २१वीं शदी का है । इसीलिए पिता और दादा जी के समय जो संबंध था, अब उतना ही काफी नहीं है । उनका मानना है कि आपसी संबंध को २१वीं शदी के अनुसार पुनर्परिभाषित करना चाहिए । उन्होंने आगे कहा– ‘बेटा और पोता की भावी संबंध कैसा हो, उसके लिए आज हम लोगों को काम करना चाहिए ।’ उनका कहना है कि अब नेपाल–भारत संबंध परम्परागत सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध से ही अब चलनेवाला नहीं है, आर्थिक अन्तरनिर्भरता की संबंध भी होना चाहिए ।

नेपाली कांग्रेस नेता नवीन्द्रराज जोशी ने भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में तत्कालीन कांग्रेस नेताओं की योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय नेताओं से नेपाली नेता को भी बहुत कुछ सिखने को मिलता है । उन्होंने आगे कहा– ‘महात्मा गान्धी ने प्रमाणित किया है कि सत्ता प्राप्त करना ही राजनीति नहीं है, उसका प्रभाव हमारे नेता एवं पूर्व प्रधानमन्त्री कृष्णप्रसाद भट्टराई के ऊपर भी पड़ा है ।’

इसीतरह राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) नेपाल के संयोजक राजशिकोर यादव ने नेपाल–भारत बीच रहे पौराणिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंध पर चर्चा करते हुए कहा कि नेपाल–भारत के बीच जो खुली सीमा हैं, उससे भी नेपाल को बहुत लाभ मिल सकता है । उनका मानना है कि खुली सीमा के कारण ही भारतीय बाजार में नेपाल की सहज पहुँच हो सकती है, जो आर्थिक दृष्टिकोण से फायदाजनक है ।

समाजवादी पार्टी के उपाध्यक्ष राजेन्द्र श्रेष्ठ ने कहा कि नेपाल की भू–भाग किसी भी बाह्य शक्ति से प्रयोग ना हो, इसके लिए दोनों राष्ट्र को सचेत रहना चाहिए । उनका मानना है कि नेपाल–भारत संबंध सिर्फ खुशी और सुख बाटने के लिए ही नहीं, दुख बाटने के लिए भी है । नागरिक समाज के अगुवा डा. सुन्दरमणि दीक्षित ने भी कहा कि नेपाल–भारत बीच ऐसा संबंध होना चाहिए, जो हरवक्त एक–दूसरे को काम आ सके । पिछली बार सुर्खियों में रहे कास्मिर मुद्दा पर चर्चा करते हुए डा. दीक्षित ने आगे कहा– ‘आज कई लोग भारत को हिटलर के साथ तुलना करते हुए आलोचना कर रहे हैं । एक पड़ोसी होने के नाते इसमें सच क्या है, नेपालको बोलना चाहिए । लेकिन हमारी सरकार चुप है, मुझे आश्चर्य लग रहा है ।’ उनका कहना था कि किसी भी देश की आन्तरिक मामिला में हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है, लेकिन सच बोलने की अधिकार सब को है, इसीलिए कास्मिर मुद्दा में भारत को साथ देना चाहिए ।

भारत के लिए पूर्व राजदूत प्रो. लोकराज बराल ने कहा कि स्वतन्त्रता संग्राम के साथ–साथ भारत में लोकतन्त्र का भी जग निर्माण हो गया, जिसके चलते आज भारत राजनीतिक रुप में ही नहीं, हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है । प्रो. बराल को मानना है कि उससे नेपाल को भी सिखना चाहिए । कार्यक्रम में नेपाल भारत मैत्री मसाज के अध्यक्ष प्रेम लस्करी ने स्वागत मन्तव्य व्यक्त करते हुए समाज की ओर से नेपाल में की गई सामाजिक कार्य के बारे में चर्चा की ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *