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चिनियाँ कम्पनी द्वारा काठमांडू की प्यास पर कुठाराघाट, रातो-रात भागने का प्रयाश ।

 

काठमांडू की जनता वर्षों से मेलम्ची के पानी से प्यास मिटने की आस कर रही थी, पर बीच में चिनियाँ कम्पनी द्वारा काठमांडू की प्यास पर कुठाराघाट कर दिया गया है ।
मेलम्ची खानेपानी विकास समिति और चिनियाँ कम्पनी चाइना रेल्वे कम्पनी फिफटन व्युरो ग्रुप कर्पोरेशन तथा चाइना सीएमआईआईसी इन्जीनियरिंग कर्पोरेशन संयुक्त उपक्रम बीच सन् २०१३ को सितम्बर २ में सुरंग निर्माण और पानी के स्रोत स्थान पर ही इन्टेक निर्माण कार्य सम्पन्न करने के शर्त पर सन् २००९ के फरवरी में ठेक्का सम्झौता किया गया था । ५ अरब का ठेका ४ अरब मे लिया गया था । ठेका लेने के तुरन्त बाद ही चिनिया कम्पनी ने बिभिन्न कारन देखाते हुये ४ अरब का ठेका ९ अरब करने का माँग करने लगा । इसके लिये ठेकेदार ने सरकार पर दवाब देने लगा ।
चिनिया कमपनी द्वारा सुरंग निर्माण कार्य ढिलाएई होने पर मेलम्ची खानेपानी विकास समिति द्वारा सुरंगकार्य जल्दी करने के लिए समय समय पर चेतावनी दिए जाने पर भी अपनी मनमानी करने पर सरकार ने चिनियाँ ठकेदार के साथ किया गया सम्झौता डेढ़ महीना पहले रद्द कर दिया था । आयोजना प्रमुख कृष्ण आचार्य ने बताया कि ठक्के का दूसरा अन्तिम निर्णय नही होने तक काई भी समान नहीं लेने दिया जाएगा । इन्जीनियर द्वारा काम और समान का मूल्यांकन करने के बाद ही कोई अन्तिम निर्णय होगा ।
परस्थिति के प्रतिकूल चिनिया केम्पनी ने मेलम्ची खानेपानी आयोजा वाले स्थान से निर्माण सामग्री ले जाने के उद्यत दिखाई दी । चिनिया कम्पनी नर रातोरात किसी को जानकारी नही देते हये सामान लेजाने का प्रयाश किया । इसके विरुद्ध मेलम्ची खाने पानी विकास समिति के निर्देशन में महानगरी प्रहरी वृत्त बौद्ध के प्रहरी निरीक्षक प्रदीप खड्का के नेतृत्व में गई प्रहरी टोली ने चिनिया कम्पनी द्वारा भंग सम्झौता के बाद कम्पनी द्वारा दिए जाने वाले हरजाने एवं जुर्माने की रकम जब तक नहीं दिया जाएगा, तब तक निर्माण सामग्री कम्पनी को नहीं लेने दिया जाएगा । कइ चिनिया ने प्रहरी के साथ हाथा पाइ भि की ।
चिनिया कम्पनी ने डोजर, एक्जाभेटर, प्राथमिक उपचार सामग्री, ५४४ बोरा सिमेन्ट तथा ढलान की सारी समाग्रियाँ गाडियो पर लोड की जा रही अवस्था में सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोक दिया गया ।
चिनियाँ कम्पनी द्वारा सुरंग निर्माण कार्य का कुल २२ प्रतिशत काम किया गया है । जबकि ठेके का कुल लागत का ३३ प्रतिशत रकम प्राप्त कर चुका है । पर काम करने में ढिलाई करते हुए सम्झौता भंग करने के कारण कम्पनी ने सरकार को हर्जाने एवं जुर्माने के बापत रकम लौटाना बाँकि है ।
सम्झौता भंग होने पर सरकार ने चिनियाँ ठकेदार द्वारा डिपोजिट बै.क ग्यारेन्टी बापत डेढ अरब रुपैया सरकार द्वारा जब्त कर लिया गया है । सम्झौता भंग के बाद आयोजना द्वारा हिमालय बैंक और बैंक ऑफ काठमांडू में चिनियाँ ठकेदार द्वारा डिपोजिट ग्यारेन्टेट रकम ठेका सम्झौता अनुसार अपने खाते में रखने का निर्देश दिया, इसके अतिरिक्त कम्पनी से जुर्माना लेने की भी जानकारी आयोजना के अधिकारी ने दिया ।

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