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क्यों आवश्यक था ३७० का हटना ? : मुरलीमनोहर तिवारी

मुरलीमनोहर तिवारी “सिपु”, हिमालिनी  अंक अगस्त , अगस्त 2019 |‘१९४७ में पाकिस्तान के पख्तून कबायलियों ने जम्मू–कश्मीर पर हमला बोल दिया, जिससे निपटने के लिए, उस समय जम्मू–कश्मीर के महाराजा हरिसिंह ने भारतीय सरकार से सैन्य सहायता मांगी और भारत सरकार की ओर से तत्कालीन गवर्नर जनरल माउंटबैटन ने २६ अक्टूबर १९४७ को एक समझौते पर हस्ताक्षर करके, कश्मीर को भारत में मिला दिया । इस संधि के आधार पर भारत का दावा है कि महाराजा हरि सिंह से हुई संधि के परिणामस्वरूप पूरे कश्मीर राज्य पर भारत का अधिकार बनता है ।

इस आधार पर भारत का दावा पूरे कश्मीर (पाक अधिकृत कश्मीर एवं आजÞाद कश्मीर सहित) पर सही है, किंतु पाकिस्तान भारत के इस दावे को नही मानता । पाकिस्तान के दावे का आधार १९४३ की पाकिस्तान की घोषणा है । इसके अनुसार तत्कालीन जम्मू एवं कश्मीर राज्य भारत के उन पांच उत्तरी राज्यों में से एक था, जिनमें से मुस्लिम बहुमत के आधार पर पाकिस्तान की स्थापना होनी थी, किंतु भारत, पाकिस्तान के इस दावे को नही मानता है । सन १९४७ में पाकिस्तान से हुई लड़ाई के बाद कश्मीर दो हिस्सों में बँट गया था । कश्मीर का जो हिस्सा भारत में था, वह जम्मू–कश्मीर नाम से भारत का एक सुबा हो गया, वहीं कश्मीर का जो हिस्सा पाकिस्तान और अफगÞानिस्तान से सटा हुआ था, वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहलाया ।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, भारतीय कश्मीर के पश्चिमी हिस्से से लगा है । उत्तरी क्षेत्र, गिलगित क्षेत्र महाराजा द्वारा ब्रिटिश सरकार को पट्टे पर दिया गया था । बाल्टिस्तान लद्दाख प्रांत के पश्चिम का क्षेत्र था, जिस पर पाकिस्तान ने १९४७ में अधिकार कर लिया था । यह विवादित क्षेत्र जम्मू एवं कश्मीर क्षेत्र का भाग है । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (एइप्) का विषय १९४७ के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का एक विषय रहा है । कश्‍मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्‍तान के बीच हमेशा से ही बहुत चर्चित रहा है पाक अधिकृत कश्मीर का मुद्दा, अक्साई चीन और भारतीय कश्मीर का मुद्दा भारत पाकिस्तान और चीन के बीच हमेशा ही चर्चा में रहा है, पाक अधिकृत कश्मीर, मूल कश्मीर का वह भाग है, जिस पर पाकिस्तान ने १९४७ में हमला कर अधिकार कर लिया था । तब से अब तक इसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (एइप्) के नाम से जाना जाता है । कुल २.२२ लाख वर्ग किमी में फैले कश्मीर के ३० प्रतिशत हिस्से पर पाकिस्तान और १० ५ हिस्से पर चीन का अवैध कब्जÞा है । वहीं ६० प्रतिशत हिस्सा भारत के पास है । अक्साई चिन नामक क्षेत्र जो पूर्व जम्मू एवं कश्मीर राज्य का भाग था, पाक अधिकृत कश्मीर में नहीं आता है । ये १९६२ से चीनी नियंत्रण में है । जम्मू एवं कश्मीर को अक्साई चिन क्षेत्र से अलग करने वाली रेखा वास्तविक नियंत्रण रेखा loc) कहलाती है ।

गिलगित जो अभी पाक अधिकृत एइप् में है, विश्व में एकमात्र ऐसा स्थान है जो कि ५ देशों से जुड़ा हुआ है, अफगÞानिस्तान, तजाकिस्तान (जो कभी रूस का हिस्सा था), पाकिस्तान, भारत और तिब्बत –चाइना) जम्मू कश्मीर, जम्मू, कश्मीर या लद्दाख के कारण महत्वपूर्ण नहीं है, वास्तव में ये महत्वपूर्ण है, गिलगित–बाल्टिस्तान के कारण । भारत के इतिहास में भारत पर जितने भी आक्रमण हुए यूनानियों से लेकर आज तक (शक, हूण, कुषाण, मुगÞल ) वह सारे गिलगित से हुए । पूर्वज जम्मू–कश्मीर के महत्व को समझते थे उनको पता था, कि अगर भारत को सुरक्षित रखना है तो दुश्मन को हिंदूकुश अर्थात गिलगित–बाल्टिस्तान के उस पार ही रखना होगा । किसी समय इस गिलगित में अमेरिका बैठना चाहता था, ब्रिटेन अपना बेस गिलगित में बनाना चाहता था, रूस भी गिलगित में बैठना चाहता था, यहां तक कि पाकिस्तान ने १९६५ में गिलगित को रूस को देने का वादा तक कर लिया था । आज चाइना गिलगित में बैठना चाहता है वह अपने पैर पसार भी चुका है और पाकिस्तान तो बैठना चाहता ही था । भारत को अगर सुरक्षित रहना है तो गिलगित–बाल्टिस्तान पर नियंत्रण चाहिए । गिलगित से सड़क मार्ग से विश्व के अधिकांश कोनों में जा सकते हैं । गिलगित से सड़क मार्ग से १४०० किमी । पर दिल्ली है, २८०० किमी । पर मुंबई है, ३८०० किमी । पर चेन्नई है, ५०० किमी ।पर दुबई है, ३५०० किमी । पर रूस है, ८००० किमी । पर लंदन है । जब भारत को सोने की चिडि़या कहा जाता था, तब सारे देशों से व्यापार चलता था, जिसमे ८५५ जनसंख्या इन मार्गों से जुड़ी हुई थी । सेंट्रल एशिया, यूरेशिया, यूरोप, अफ्रीका सब जगह सड़क मार्ग से जाया जा सकता है । पाकिस्तान, (ईरान–पाकिस्तान–इंडिया क्ष्एक्ष्) गैस पाइप लाइन बिछाने में रोड़े अटकाता है, अगर भारत के पास गिलगित होता तो, गिलगित के आगे तजÞाकिस्तान था, वहां से गैस पाइप लाइन ला सकता था । हिमालय की १० बड़ी चोटिया है जो कि विश्व की १० बड़ी चोटियों में से है । इनमें १० में से ८ गिलगित–बाल्टिस्तान में है । तिब्बत पर चीन का कब्जÞा होने के बाद जितने भी पानी के वैकल्पिक स्रोत (-Alternate Water Resources) हैं वह सारे गिलगित–बाल्टिस्तान में है । गिलगित–बाल्टिस्तान में बड़ी –बड़ी ५०–१०० यूरेनियम और सोने की खदाने हैं ।

पाक अधिकृत कश्मीर को प्रशासनिक रूप से दो हिस्सों में बाँटा गया है, जिन्हें कश्मीर और गिलगित–बल्तिस्तान कहते हैं । पाक अधिकृत कश्मीर का प्रमुख यहीं का राष्ट्रपति होता है जबकि प्रधानमंत्री मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता हैं, जो कि मंत्रियों की एक परिषद द्वारा समर्थित होता हैं । पाक अधिकृत कश्मीर (एइप्) अपने स्वशासन संबंधी विधानसभा का दावा करता है लेकिन यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण में काम करता है । पाक अधिकृत कश्मीर (एइप्) मूल कश्मीर का वह भाग है, जिसकी सीमाएं पाकिस्तानी पंजाब, उत्तर पश्चिम में अफÞगानिस्तान के वाखान गलियारे से, चीन के जीन्जियांग क्षेत्र से और भारतीय कश्मीर से पूर्व में लगती हैं । यदि गिलगित–बल्तिस्तान को हटा दिया जाए तो पाक अधिकृत कश्मीर का क्षेत्रफल १३, ३०० वर्ग किलोमीटर है और इसकी आबादी लगभग ४६ लाख है । पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजÞफÞ्फÞराबाद है और इसमें ८ जिले, १९ तहसीलीं और १८२ संघीय काउन्सिलें हैं ।

पाक अधिकृत कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में ८ जिले हैं, मीरपुर, भिम्बर, कोटली, मुजÞफÞ्फÞरआबाद, बागÞ, नीलम, रावला कोट और सुधनती हैं । पाक अधिकृत कश्मीर के हुन्जÞा–गिलगित के एक भाग, रक्सम एवं बाल्टिस्तान की शक्स्गम घाटी क्षेत्र को, पाकिस्तान द्वारा १९६३ में चीन को सौंप दिया गया था । इस क्षेत्र को सीडेड एरिया या ट्रांस कारा–कोरम ट्रैक्ट कहते हैं । पाक अधिकृत कश्मीर के लोग मुख्य रूप से खेती करते हैं तथा मक्का, गेहूं, वानिकी और पशुधन आय का मुख्य स्रोत हैं । यहाँ पर निम्न श्रेणी के कोयला भंडार, चाक, बाक्साइट के भंडार भी हैं, स्थानीय घरेलू उद्योगों में उत्कीर्ण लकड़ी की वस्तुओं को बनाना, वस्त्र और कÞालीन का उत्पादन किया जाता हैं । इस क्षेत्र में उत्पादित कृषि उत्पाद में मशरूम, शहद, अखरोट, सेब, चेरी, औषधीय जड़ी बूटियों और पौधों, राल, देवदार, कैल, चीर, प्राथमिकी, मेपल और जलाने वाली लकड़ी शामिल हैं । यहाँ पर स्कूलों और कॉलेजों की कमी हैं । यहाँ पख्तूनी, उर्दू, कश्मीरी और पंजाबी जैसी भाषाएँ यहाँ पर प्रमुखता से बोली जातीं हैं । पाक अधिकृत कश्मीर ९एइप्० के पास अपना सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट तो है लेकिन ये सब पाकिस्तान से नियंत्रित है ।

भारतीय कश्मीर का क्षेत्रफल १, ०१, ३८७ वर्ग किमी है और पाक अधिकृत कश्मीर का क्षेत्रफल का १३, २९७ वर्ग किमी है । जम्मू और कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला था, जो धारा ३७० के हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश होगा और लद्दाखÞ अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा । भारतीय कश्मीर की जनसंख्या १ करोड़ २५ लाख है, जबकि पाक अधिकृत कश्मीर की जनसंख्या ४६ लाख है । भारतीय कश्मीर में २२ जिले है और पाक अधिकृत कश्मीर में १० जिले हैं । भारतीय कश्मीर की राजधानी जम्मू (अक्टूबर से मार्च तक), श्रीनगर (मार्च से अक्टूबर तक) होती है, पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद है । भारतीय कश्मीर विधान सभा में ८७ सीटें होती थी और पाक अधिकृत कश्मीर के विधान सभा में ४९ सीटें है।

भारतीय कश्मीर का बजट २०१८–१९ में ९५, ६६७ करोड़ भारतीय रुपए में है जो की पिछले वर्ष की तुलना में २० प्रतिशत ज्यादा है और पाक अधिकृत कश्मीर का बजट १०, ८२० करोड़ पाकिस्तानी रूपये है जो की पिछले बजट से २५ ज्यादा है । भारतीय कश्मीर में स्वास्थ्य खर्च में ३, ०३७ करोड़ है, जबकि पाक अधिकृत कश्मीर में स्वास्थ्य खर्च में २९ करोड़ खर्च करता है । शिक्षा में जम्मू कश्मीर में कुल बजट का १२ प्रतिशत खर्च किया जाता है जो की पूरे पाकिस्तान के शिक्षा बजट प्रतिशत से ज्यादा है । २०१७ में जम्मू और कश्मीर में ११०० करोड़ खर्च किए थे, जबकि पाकिस्तान, कश्मीर में शिक्षा के लिए केवल १३५ करोड़ दिए है । पूरे पाकिस्तान में शिक्षा के लिए ५.२५ ट्रिलियन के बजट में से शिक्षा के लिए ३, ५७० करोड़ मात्र दिए गए, इससे सापÞm पता चलता है की पाकिस्तान में शिक्षा को कम महत्वपूर्ण माना जाता है । भारतीय जम्मू कश्मीर में कुल ३५ मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी है और ल्क्ष्त् श्रीनगर भी है जिसकी वलर््ड रैंकिंग ६७ है । इसमें प्लेसमेंट के लिए गूगल और फेसबुक जैसी कम्पनियाँ आती है । अगर पाक अधिकृत कश्मीर की बात करे तो पूरे कश्मीर में ८ से १० यूनिवर्सिटी है और इनमें से कोई भी विश्व रैंकिंग में टॉप १०० तो दूर टॉप १००० में भी नहीं आती । दुनिया छोडिए इनकी साउथ एशिया में भी कोई रैंकिंग नहीं है ।

आधारभूत संरचना के लिए भारत में जम्मू कश्मीर में २०१७–१८ में ६, ७२४ करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च हुए, २०१८–१९ में ९, ८०० करोड़ से ज्यादा की राशि निर्गत की गई है, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में २०१८–१९ में १, ०२८ करोड़ पाकिस्तानी रूपये दिए है, जिसमे कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (संचार आधारभूत संरचना) भी जुड़ा है । जम्मू और कश्मीर में ४ एयरपोर्ट है, जिसमे १ डिफेंस एयरपोर्ट, २ डोमेस्टिक और १ इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जिसमे श्रीनगर एयरपोर्ट, स्टेट आपÞm आर्ट इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जिसमे वल्र्ड क्लास सुबिधाए हंै । अकेले श्रीनगर एयरपोर्ट से रोजÞाना सौ फ्लाइट आती और जाती है जबकि श्रीनगर एयरपोर्ट आतंकी हमलों के लिए ज्यादा हाई अलर्ट पर रहता है । पाक अधिकृत कश्मीर में २ एयरपोर्ट है और दोनों में से कोई भी संचालित नहीं है, इनमें से एक है मुजफराबाद एयरपोर्ट दूसरा है रावलकोट एयरपोर्ट । मुजफराबाद एयरपोर्ट जो २००५ के भूकंप के बाद से बंद पड़ा है । रावलाकोट एयरपोर्ट २०१६ के बाद से ये भी बंद है ।

रेलवे के क्षेत्र की बात करें तो जम्मू और कश्मीर में २८ रेलवे स्टेशन है जिसमे १२ स्टेशन जम्मू में और १६ स्टेशन कश्मीर में है । २००१ में कश्मीर रेलवे को नेशनल प्रोजेक्ट स्टेटस का दर्जा मिल गया था, जिसके बाद कश्मीर रेलवे को विकास के लिए असीमित धन राशि उपलब्ध है, १८४ बिलयन राशि के बजट से बनने वाला चिनाब ब्रिज प्रोजेक्ट है, जो दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पुल होगा । जिसकी ऊँचाई होगी ३६० मि. और चौड़ाई होगी ४५० मि. से ज्यादा । भारत के तरफ से कुल नौ प्रोजेक्ट ऐसे है जिसे वैंटलेज इंपÞm्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट २०१८ में जगह मिली है, जिसमे चिनाभ ब्रिज प्रोजेक्ट भी है । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में ऐसी कोई भी प्रोजेक्ट नहीं चल रही है ।

राजमार्ग संरचना में भारत में प्रधानमंत्री विकास योजना के तहत कश्मीर के अंदर राजमार्ग बनाने के लिए ४२, ००० करोड़ की राशि दी है, कश्मीर की प्रतिष्ठित चेनानी–नाशरी टनल बनकर तैयार है जिसकी लम्बाई ९.२ किमी है । जम्मू के बफ्लिया से कश्मीर के सोफियान को जोड़ने वाली ८४ किमी लंबी मुगल रोड कार्यान्वित हो चुकी है । जम्मू–कश्मीर में दो रिंग रोड बनाने के लिए ४००० करोड़ के राशि की मंजूरी मिल चुकी है । जम्मू और कश्मीर में ५११ पुलों का निर्माण कार्य चल रहा है जिसमे १८ पुल बन चुके है और २६ पुल साल के अंत के बन जाएंगे । पाक अधिकृत कश्मीर में राजमार्ग संरचना की कोई योजना पाकिस्तान की तरफ से नहीं चल रही है ।

कश्मीर पर पाकिस्तान ने कब्जÞा किया है, यूनाइटेड नेशन्स रेजाल्युशन के अनुसार पाकिस्तान कश्मीर पर आक्रमणकारी था, पाकिस्तान की फौजो ने सीमा पार करके भारत में घुसी थी, पाकिस्तान ने कश्मीर पर गैर कानूनी तरीके से कब्जÞा कर रखा है । आकड़ों से पता चलता है कि पाकिस्तान को कश्मीर या कश्मीर के लोगो की कोई चिंता नहीं है, उनके बेहतरी के लिए पिछले ७० सालो में कुछ नहीं किया, पाकिस्तान भारत को परेशान करने, उसके तरक्की को रोकने के लिए कश्मीर के लोगो को गुमराह करता है, आतंकवादी भेजता है । आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (एइप्) क्षेत्र बहुत ही गरीबी की हालत में है, यदि हम आंकड़ों पर नजर दालें तो स्पष्ट दिखता है कि भारत का कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से बहुत अधिक समृद्ध हालत में है । पाकिस्तान इस क्षेत्र के लोगों को भारत के खिलाफ जंग लड़ने के लिए उकसाकर यह आश्वासन देता है कि जिस दिन एइप् क्षेत्र पाकिस्तान का अधिकृत अंग बन जाएगा उस दिन से इस क्षेत्र का विकास पाकिस्तान की आर्थिक सहायता से शुरू हो जाएगा, जबकि सच्चाई यह है कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में आतंकवादियों को ट्रेनिंग देता है । यहाँ पर यह बात बताना भी जरूरी हैं कि आतंकी कसाब को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजÞफÞ्फÞराबाद में ही ट्रेनिंग दी गयी थी ।

इन्ही कारणों के मद्देनजÞर जम्मू–कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले धारा ३७० को हटाना जÞरुरी था क्योंकि धारा ३७० के कारण, जम्मू–कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती थी । जम्मू–कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता था । जम्मू–कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल ६ वर्षों का होता था जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधान सभाओं का कार्यकाल ५ वर्ष का होता है । जम्मू कश्मीर के अंदर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता था । भारत के उच्चतम न्यायलय के आदेश जम्मू कश्मीर के अंदर मान्य नहीं होते थे । भारत की संसद को जम्मू ( कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यंत सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती थी । जम्मू कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाती थी । इसके विपरीत यदि वह पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू कश्मीर की नागरिकता मिल जाती थी । धारा ३७० की वजह से कश्मीर में आर.टी ।आई । (च्त्क्ष्) लागू नहीं था, आर.टी ।इ.(च्त्भ्) लागू नहीं था, सी ।ए.जी ।( ऋब्न् )लागू नहीं होता था । भारत का कोई भी कानून लागू नहीं होता था। कश्मीर में महिलाओ पर शरीयत कानून लागू था। कश्मीर में पंचायत के पास अधिकार नहीं था। कश्मीर में अल्पसंख्यको हिन्दू( सिख को १६५ आरक्षण नहीं मिलता था । धारा ३७० की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जÞमीन नहीं खरीद सकते थे। धारा ३७० की वजह से ही पाकिस्तानियो को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती थी, इसके लिए पाकिस्तानियो को केवल किसी कश्मीरी लड़की से शादी करनी होती थी । इन हालातों में कोई भी देश अपने देश हित के लिए स्व निर्णय ले सकता है । ३७० का हटना भारत की ओर से एक संवैधानिक कदम है जिसकी सराहना की जानी चाहिए ।

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