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आज परिवर्तिनी एकादशी इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा-अर्चना की जाती

 

 

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे पार्श्व एकादशी, वामन एकादशी, जलझूलनी एकादशी, पद्मा एकादशी, डोल ग्यारस और जयंती एकादशी भी कहा जाता है। परिवर्तिनी एकादशी इस वर्ष 09 सितंबर दिन सोमवार को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन स्नान और दान का भी विशेष महत्व होता है।

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा होती है, इससे तीनों ही लोकों की पूजा होती है।

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अपने किए गए पापों के लिए भी परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। जो लोग जीवन मरण के चक्र से मुक्त होना चाहते हैं, मोक्ष को प्राप्त करना चाहते हैं, उनको परिवर्तिनी एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए।

भगवान विष्णु बदलते हैं करवट

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय चौमासा या चतुर्मास चल रहा है। इस दौरान जगत के पालनहार भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं। देवशयनी एकादशी के दिन वह योग निद्रा में चले जाते हैं।

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योग निद्रा के समय भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान हरि करवट बदलते हैं, इसलिए इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। चार माह के पश्चात वे देवउठनी एकादशी पर योग निद्रा से बाहर आते हैं, तब विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि प्रारंभ होते हैं।

व्रत एवं पूजा विधि

परिवर्तिनी एकादशी के दिन दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात पूजा घर में चौकी पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की प्रतिमा या विष्णु भगवान की मूर्ति स्थापित करें।

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फिर हल्दी, तुलसी, चंदन, अक्षत्, धूप, गंध आदि से उनकी पूजा करें। उनको फल और मिष्ठान चढ़ाएं। इसके बाद कपूर या गाय के घी के दीपक से आरती करें। फलाहार करते हुए व्रत रहें। इस दिन वामन अवतार की कथा सुनें।

दान

परिवर्तिनी एकादशी के दिन तांबा, चांदी, चावल और दही का दान करना सर्वथा उचित है। रात्रि को जागरण अवश्य करना चाहिए।

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