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जब पूरा मुल्क एक “कातिल” को बचाना चाहता था, उसे सजा दिलाई थी जेठमलानी ने

अजय श्रीवास्तव

आजाद भारत में वकालत के पेशे को एक अलग ही मुकाम पर पहुंचाने वाले वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का  95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वकालत में ही नहीं जेठमलानी राजनीति में भी एक जाना-पहचाना नाम थे। जेठमलानी भारत के सबसे महंगे वकीलों में से थे। वह केस लड़ने के लिए लाखों रूपये की फीस लेते थे। उन्होंने कई हाई प्रोफाइल और विवादित केस लड़ें है जिनकी वजह से उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।
मैं जिस घटना का जिक्र कर रहा हूँ वो साल 1959 में घटी थी।17 साल की उम्र में जब उन्होंने वकालत की डिग्री हासिल करने के बाद अपना पहला केस लड़ा उसी के साथ वह सुर्खियों में छा गए। वर्ष 1959 में केएम नानावती  बनाम महाराष्ट्र सरकार का केस जेठमलानी ने यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ के साथ लड़ा था।

क्या थी कहानी

नेवी कमांडर कवस मानेकशॉ नानावटी छुट्टी में अपने घर बांबे आता है तो उसे महसूस होता है कि उसकी प्यारी पत्नी “सेल्विया” जो उसके तीन बच्चों की माँ है उससे कटी कटी सी है।वह उसे अपनी बांहों में भर लेना चाहता था मगर वह बेरूखी से उसके हाथों को झटक देती है।
वह सेल्विया से इसकी वजह पूछता है तो कुछ संकोच के बाद उसकी पत्नी उसे बता देती है कि उसे बिजनेसमैन प्रेम आहूजा से इश्क हो गया है और दोनों रिलेशनशिप में हैं।दरअसल नेवी कमांडर नानावटी को जहाज के साथ महीनों बाहर रहना पड़ता था,इसी दर्मियान सेल्विया और प्रेम आहूजा की दोस्ती कब हवस में परिवर्तित हो गया इन्हें पता भी नहीं लगा।रईस बिजनेसमैन प्रेम आहूजा सेल्विया पर खूब पैसे खर्च करता और प्यार का नाटक करता।सिल्विया उसके झूठे प्यार में पूरी तरह डूब गई थी और दिनरात उसी के सपने देखने लगी थी।सिल्विया ने ये भी कहा कि जब प्रेम आहूजा ने उनसे शादी का वायदा किया तब मैंने समर्पण किया था।
अपनी प्यारी पत्नी के मुंह से ये बात सुनने के बाद नानावटी कुछ पल के लिए जडवत सा हो गया था मगर तत्काल उन्होंने अपने आप को संभाल।पहले से तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक दोनों अपने तीनों बच्चों के साथ कुत्ते के डाक्टर के पास गए।उन दिनों उनका प्यारा कुत्ता भी बीमार चल रहा था।डाक्टर से मिलने के बाद वे फिल्म देखने पिक्चर हाँल गए।अपनी पत्नी और बच्चों को वहाँ बैठाकर वह पिक्चर हाँल से बाहर आ गया और
सीधे वह अपने पोत पर गए और वहाँ से उन्होंने .38 स्मिथ एंड बेसन रिवाल्वर निकाली।रिवाल्वर पतलून में रखकर वह सीधा प्रेम आहूजा के घर पहुंचा,उस समय प्रेम आहूजा नहाने की तैयारी कर रहा था उसके कमर में तोलिया बंधा हुआ था।
नानावटी सीधे प्रेम आहूजा से पूछते हैं कि तुम मेरी पत्नी से शादी कर लो मगर वह बेरूखी से इंकार कर देता है।प्रेम आहूजा गुस्से में नानावटी से कहता है कि मैं बहुत सी औरत के साथ हमबिस्तर होता हूँ इसका मतलब ये नहीं है कि मैं सभी से शादी कर लूँ।उसकी बात से बौखलाए नानावटी ने उसके ऊपर तीन फायर करता है और वहां से निकलकर खुद को पुलिस के हवाले कर देता है।
आपको बता दें केएम नानावटी की मुलाकात सेल्विया से 1949 मे इंग्लैंड में हुई थी।पहली मुलाकात में हीं दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठे थे।नानावटी पारसी थे और बहुत पढे लिखे परिवार से थे।पारसी रीतिरिवाज से उनकी शादी हुई और दोनों से तीन प्यारे बच्चे हुऐ।नानावटी सिल्विया से बहुत प्यार करते थे, उसके मुँह से प्रेम आहूजा से रिलेशनशिप की बात सुनकर भी उन्होंने पत्नी को कुछ नहीं कहा,बल्कि उसकी खुशी के लिए वह दोनों की शादी करवाना चाहते थे।
23 सितंबर 1959,खचाखच भरे डिस्ट्रिक्ट और सेशन कोर्ट में केस की सुनवाई शुरू हुई।ये केस सबसे ज्यूरी में चला।सरकार की तरफ से चीफ पब्लिक प्रोसिक्यूटर सी.एम.त्रिवेदी ने नानावटी पर प्रेम आहूजा की इरादतन हत्या का आरोप लगाया।डिफेंस की तरफ से फेमस क्रिमिनल लाँयर कार्ल जे खंडालावाला केस लड रहे थे।
ज्यूरी यानी कोर्ट की ओर से किसी केस की सुनवाई के लिए चुने गए लोग।ये सोसायटी के मानिंद लोग होते थे जिनके सामने कोर्ट की सारी दलीलें रखीं जाती थी,उसी के आधार पर ज्यूरी अपना फैसला सुनाती थी।नानावटी केस में ज्यूरी ने एकतरफा फैसला नानावटी के पक्ष में दिया क्योंकि समाज के सभी लोगों को नानावटी से सहानभूति थी और ज्यूरी लोगों की भावनाओं में बह गया था।तभी से ज्यूरी सिस्टम को खत्म कर दिया गया।
पब्लिक प्रोसिक्यूटर त्रिवेदी इस केस को बेमन से लड रहे थे मगर उनके जुनियर रामजेठमलानी इस केस को लेकर बहुत सीरियस थे।उन्होंने दलील दी कि अगर गोलियां हाथापाई के बाद चलीं थीं तो प्रेम भाटिया का तौलिया गोलियां लगने के बाद भी कमर से बंधा हुआ क्यों था?उनकी दलील की वजह से डिफेंस धराशायी हो गई।हाईकोर्ट ने नानावटी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।11 दिसंबर 1961 को सुप्रीमकोर्ट ने भी इस सजा पर मुहर लगा दी।
नानावटी ने तीन साल जेल में रहने के बाद माफी की अपील महाराष्ट्र के राज्यपाल से की।उस समय महाराष्ट्र की राज्यपाल विजय लक्ष्मी पंडित थीं और उन्होंने तत्काल नानावटी को माफी दे दी।
जेल से छूटने के बाद कुछ हीं दिन नानावटी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ भारत में रहे।यहाँ बदनामी बहुत हो चुकी थी इस वजह से नानावटी और उसकी पत्नी सेल्विया ने कनाडा में बसने का निर्णय लिया और वे कनाडा चले गए।2003 में नानावटी की वहीं मृत्यु हो गई, उनकी पत्नी अभी भी जिंदा है।
इस केस ने कानून को भी एक बार भावना में बहने को मजबूर कर दिया था मगर रामजेठमलानी के अथक प्रयास से नानावटी को सजा मिल पाई थी।सारा देश यहाँ तक कि प्रेम आहूजा की बहन ने भी नानावटी क़ो माफ करने की अपील की थी।इस महत्वपूर्ण केस को कानून की पढाई में पढाया जाता है।

काेई यूँ ही नहीं बन जाता राम जेठमलानी

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का निधन हुआ तब पूरे देश में शोक की लहर थी। देश का कोई भी वकील इंदिरा  के हत्यारों का केस लड़ने के लिए तैयार नहीं था। तब रामजेठमलानी ने ही आरोपी सतवंत सिंह और केहर सिंह का केस लड़ा था।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे वी श्रीहरन उर्फ मुरुगन की तरफ से भी जेठमलानी ने केस लड़ा था। आरोपियों की तरफ से पैरवी करते हुए जेठमलानी ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलवा दिया था।

जेठमलानी ने अपनी दलीलों के दम पर अधिकतर स्मगलरों के केस जीते थे। 70 और 80 के दशक में उन्हें इसी वजह से स्मगलरों का वकील भी कहा जाने लगा था।

कुछ चर्चित केस 

उपहार सिनेमा अग्निकांड में जेठमलानी ने आरोपी मालिकों अंसल बंधुओं की तरफ से पैरवी की थी।
देश के चर्चित घोटालों में से एक 2G  घोटाले में वह  डीएमके नेता कणिमोझी की तरफ से वकालत की थी। इसी घोटाले में उन्होंने यूनीटेक लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय चंद्रा की सुप्रीम कोर्ट से जमानत कराई थी।
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में जेठमलानी अमित शाह की तरफ से पेश हुए थे। इनके अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा के लिए अवैध खनन मामले में भी उन्होंने पैरवी की थी।
जेसिका लाल मर्डर केस तो याद ही होगा आपको जिसके ऊपर फिल्म भी बनी थी। इस केस में उन्होंने मनु शर्मा की तरफ से पेशी की थी।
वर्ष 2013 में नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण के आरोप में जेठमलानी ने आसाराम बापू की तरफ से पैरवी की।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की तरफ से चारा घोटाले में भी उन्होंने पैरवी की थी। देश के बड़ें कारोबारियों में से एक सुब्रतो रॉय सहारा की तरफ से भी उन्होंने केस लड़ा है।
देश की संसद पर हमला करने वाले आरोपी अफजल गुरु के लिए भी जेठमलानी ने पैरवी की थी। अफजल को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ जेठमलानी ने केस लड़ा था। हालांकि, वह इसमें कामयाब नहीं हो पाए थे।
2017 में सन्यांस लेने से पहले उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तत्कालीन वित्त मंत्री रहे स्वर्गीय अरुण जेटली के खिलाफ मानहानि का केस लड़ा था।

लेखक परिधि समाचार दैनिक के संपादक हैं

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