जनकवि दुर्गालाल श्रेष्ठ का निधन
काठमांडू, भाद्र १ – नेपाल भाषा के जनकवि दुर्गालाल श्रेष्ठ का ९३ वर्ष की उम्र में निधन हो गया है । विभिन्न रोगों से पीडि़त कवि श्रेष्ठ का रविवार की रात बूढानीलकण्ठ स्थित निवास में निधन होने की जानकारी पत्रकार तथा नेपाल भाषा अकादमी के चांसलर मल्ल के. सुन्दर ने दी । नेपाल भाषा साहित्य, नेपाली काव्य और गीति क्षेत्र के एक शीर्षस्थ स्रष्टा श्रेष्ठ की नेपाल भाषा, नेपाली और अंग्रेजी सहित ८० से ज्यादा कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं
मल्ल के सुन्दर के अनुसार, साहित्यकार श्रेष्ठ नेपाल भाषा, जातीय पहिचान और समान अधिकार के लिए सदैव संघर्षरत रहे । उन्होंने बताया कि वे, पद्मरत्न तुलाधर, और दुर्गालाल श्रेष्ठ सामूहिक रूप में उक्त संघर्ष में सक्रिय रहे थे । कवि श्रेष्ठ नेपाल भाषा मंका खल, नेपाल भाषा अकादमी के संस्थापक भी रहे । शिक्षण पेशा में रहे दुर्गालाल श्रेष्ठ कवि और गीतकार मात्र ही नहीं, एक कुशल नाट्य लेखक भी थे । उन्होंने बताया कि “वे स्वयं नाटक निर्देशन करते थे तथा अभिनय भी करते थे ।”
श्रेष्ठ द्वारा लिखे गए सभी गीत बेहद चर्चित रही । लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मिली ‘सय थरी बाजा एउटै ताल, सय थरी गोडा एउटै चाल’, ‘फूलको आँखामा फूलै संसार, काँढाको आँखामा काँढै संसार’ गीत को ।


