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नेपाल भारत को चिढाना चाहता है ? : पंकज दास

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नेपाल भारत को चिढाना चाहता है या वाकई भारत से समान और समदूरी वाला संबंध भी नहीं रखना चाहता है?

नेपाल की दो तिहाई बहुमत वाली कम्युनिस्ट सरकार हमेशा ही चीन और भारत के साथ समान और समदूरी वाला संबंध रखने की बात करता है। लेकिन पिछले २० दिनों में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के भ्रमण में नेपाल ने भारत के साथ तो समदूरी संबंध बना लिया है लेकिन चीन के साथ अपने गहरे रिश्ते, बढ़ती नजदीकियां और विशेष महत्व को दिखा दिया है।

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भारतीय विदेश मंत्री के स्वागत करने के लिए एक सचिव को भेजा जाता है जबकि चीन के विदेश मंत्री के भ्रमण को महत्व देते हुए राज्यमंत्री को भेजा जाता है।
भारतीय विदेश मंत्री के साथ शिष्टाचार मुलाकात के समय प्रधानमंत्री तो अपनी जगह पर बैठे हैं पर विदेश मंत्री को अपने से दूर सामान्य लोगों के बैठने की जगह पर रखा है। वहीं चिनियां विदेश मंत्री को बिल्कुल अपने समकक्ष में रख कर उसका झण्डा समेत रख कर बातचीत हुई है।

इतना ही नहीं जहां चिनियां विदेश मंत्री के नेपाल भ्रमण पर यहां के विदेश मंत्री ने ६ ट्वीट किए हैं वहीं भारतीय विदेश मंत्री के भ्रमण पर उन्होंने एक भी ट्वीट खुद लिखने के बजाय बहुत मुश्किल से २ ट्वीट को रिट्वीट किया है। ऐसे ही नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी चीन के विदेश मंत्री को लेकर अब तक ६ ट्वीट किए हैं और भारत के विदेश मंत्री के लिए दो ट्वीट करके एहसान जता दिया है।

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जब नेपाल भारत के साथ दूरी बना कर रखना चाहता है, उसे कोई भी विशेष अहमियत देना जरूरी नहीं समझता है और जानबूझकर नीयतवश चिढ़ाने का काम करता है तो भारत को भी अब ऐतिहासिक, अद्वितीय, विशेष, विशिष्ट, बेटी रोटी वाला पुराना राग अलापना छोड़ देना चाहिए। ( वाल से)

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