अमेरिका बहुत चालाक दोस्त और बहुत शातिर व्यापारी है ! : योगेश मोहनजी गुप्ता
अबकी बार ट्रम्प सरकार
योगेश मोहनजी गुप्ता, मेरठ, भारत | भारत के प्रधानमंत्री के रूप में मोदी जी जैसे व्यक्तित्व का होना, सम्पूर्ण भारत की जनता के लिए गर्व की अनुभूति है। भारत के इतिहास में सरदार पटेल के पश्चात मोदी जी ही एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनमें दूरदर्शिता, कार्यकुशलता, देशभक्ति तीनों की भावना एक साथ देखने को मिली। उनमें महाराणा प्रताप जैसी देशभक्ति, चाणक्य जैसी कूटनीति और अर्जुन जैसी एकाग्रता, इन तीनों गुणों का समावेश कूट-कूट कर भरा है। मोदी जी की कूटनीति का अनुमान इस तथ्य से लगा सकते हैं कि वे स्वयं को दक्षिण दिशा में कार्यशील दिखाते हुए, पूर्व दिशा में अपने कार्यों की परिणिति करते हैं और कभी-कभी वे एक तीर से 3-4 निशाने भी लगा लेतेे हैं। हाउड्री मोदी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि वे अमेरिका गए और वहाँ की मीडिया के साथ-साथ, अफसरों तथा सम्पूर्ण विश्व के राजनेताओं से प्रशंसा प्राप्त की, यह अचरज का विषय है क्योंकि अपने देश में तो कोई भी नेता जनता को एकत्र कर लेता है परन्तु दूसरे देश में टिकट बेचकर जनता को एकत्र करने का कार्य तो केवल मोदी जी ही कर सकते हैं। ऐसा कभी नहीं सुना गया कि दूसरे देश का प्रधानमंत्री जनता को सम्बोधित कर रहा हो और वहाँ का राष्ट्रपति एक सामान्य नागरिक की भांति बैठकर उसके भाषण का आनन्द ले रहा हो। ऐसा मोदी जी के भाषण के दौरान हुआ, राष्ट्रपति ट्रम्प ने श्रोताओं के मध्य बैठकर सम्पूर्ण विश्व को स्तब्ध कर दिया। आज सम्पूर्ण विश्व का प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रोनिक मीडिया मोदी जी के गुणगानों से भरा पड़ा है। मोदी जी के अमेरिका पहुँचने पर सबको अचम्भित करने वाला दृश्य घटित हुआ। जैसे ही वो विमान से उतरे तो उनके स्वागत में 30 फुट लम्बा रेड कारपेट बिछाया गया और अमेरिका के समस्त मंत्री व अधिकारीगण पंक्तिबद्ध खड़े थे इसके विपरीत जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अमेरिका पहुँचे तो उनके लिए केवल 3 फुट का रेड कारपेट बिछाया गया और अमेरिका को कोई भी बड़ा अधिकारी उनके स्वागत में नहीं आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान को अपनी जनता को प्रसन्न करने के लिए स्पष्टीकरण देना पड़ा कि अमेरिका ने उनको धोखा दिया तथा पाकिस्तान की दोस्ती को पूरी तरह से नकार दिया। अतः पाकिस्तान ने अमेरिका से दोस्ती करके बहुत बड़ी गलती कर ली है।
ह्यूस्टन में 50 हजार हिन्दुस्तानियों को एकत्रित करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और मोदी जी ने यह कार्य करके ट्रम्प के साथ अपनी घनिष्ठ मित्रता को प्रदर्शित किया और पिछले चुनावों में जहाँ 14.5 प्रतिशत भारतीय मूल के लोगों का समर्थन राष्ट्रपति ट्रम्प को मिला था, वहीं मोदी जी ने अमेरिका के प्रवासी भारतीय लोगों से भावुकतापूर्ण अपील की, कि आने वाले चुनावों मे राष्ट्रपति ट्रम्प को विजयी बनाये। भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति डाॅनाल्ड ट्रम्प और भारतीय प्रधानमेंत्री नरेन्द्र मोदी की दोस्ती इस कार्य को सहज करके दिखाएगी। ट्रम्प ने भी भारत में अमेरिका द्वारा निवेश के दरवाजे पूर्ण रूप से खोलने का आश्वासन दिया है। घनिष्ठ मित्रता ‘एक हाथ देना, दूसरे हाथ लेना’ के सिद्धान्त अर्थात परस्पर व्यवहार पर चलती है। मोदी जी ने राष्ट्रपति डाॅनाल्ड ट्रम्प को यह व्यक्त कर दिया कि वह भारत में ही नहीं, अमेरिका में भी कितने शक्तिशाली व्यक्तित्व हैं।
राष्ट्रपति डाॅनाल्ड ट्रम्प एक दोस्त के साथ-साथ शातिर व्यापारी भी हैं इसीलिए वे हर बात में अपना लाभ देखते हैं। मोदी जी के अमेरिका पहुँचने से पूर्व उनके समस्त कार्यक्रम निश्चित थे और यह भी पूर्व निश्चित था कि मोदी जी ट्रम्प को क्या-क्या सौगात देगंे, परन्तु मोदी जी को यह आशा थी कि ट्रम्प धारा 370 के विषय में पाकिस्तान का साथ नहीं देगें। परन्तु मोदी व ट्रम्प की वार्ता से यह स्पष्ट हो गया कि एक दिन पूर्व जो घटित हुआ था वह मात्र दिखावा था। दोनों देश विगत 34 वर्षो से सुरक्षा एवं सामरिक हितों के मुद्दों पर एक दूरी बनाए हुए हैं और मोदी जी अथक प्रयास कर रहें हैं कि ये जो परस्पर रिश्तों की बर्फ है वो शीघ्र ही पिघल जाए। इस वार्ता से भारत को बहुत आशाएं थी। विशेषतया अमेरिका ने जो भारतीय कम्पनियों का जीएसपी दर्जा जून माह में समाप्त कर दिया था, उसे वे पुनः बहाल कर देगें। भारत भी अमेरिका के लिए हाइड्रोकार्बन के उत्पादन में वृद्धि की घोषणा करेगा। इसी प्रकार और अन्य विषय थे जिसपर कोई सकारात्मक समझौता नहीं हुआ। भारत को आशा थी कि पाकिस्तान के विषय में ट्रम्प उसको आतंकवादी देश घोषित कर देगें परन्तु ट्रम्प ने एक शातिर दोस्त की भांति इस प्रश्न को भी टालते हुए अपना सकेंत ईरान की ओर व्यक्त किया। इस दोस्ती का निष्कर्ष यह निकला कि ट्रम्प ने अपने हित के लिए मोदी जी की दोस्ती का अमेरिका में लाभ लिया। उनका लक्ष्य था कि जितने भी प्रवासी भारतीय हैं, उनको मोदी जी के द्वारा ट्रम्प के हित में साध दिया जाए, जिसमे वह सफल भी हुए, परन्तु जो भारत की अपेक्षा थीं, उसको उन्होंने ठण्डे बस्ते में डाल दिया अर्थात् उसकी अवहेलना की।
भारत, अमेरिका से दोस्ती के हर समय यह याद रखना चाहिए कि अमेरिका बहुत चालाक दोस्त और बहुत शातिर व्यापारी रहा है, जो सदैव अपना हित सर्वोपरी रखता है।
ह्यूस्टन में 50 हजार हिन्दुस्तानियों को एकत्रित करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और मोदी जी ने यह कार्य करके ट्रम्प के साथ अपनी घनिष्ठ मित्रता को प्रदर्शित किया और पिछले चुनावों में जहाँ 14.5 प्रतिशत भारतीय मूल के लोगों का समर्थन राष्ट्रपति ट्रम्प को मिला था, वहीं मोदी जी ने अमेरिका के प्रवासी भारतीय लोगों से भावुकतापूर्ण अपील की, कि आने वाले चुनावों मे राष्ट्रपति ट्रम्प को विजयी बनाये। भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति डाॅनाल्ड ट्रम्प और भारतीय प्रधानमेंत्री नरेन्द्र मोदी की दोस्ती इस कार्य को सहज करके दिखाएगी। ट्रम्प ने भी भारत में अमेरिका द्वारा निवेश के दरवाजे पूर्ण रूप से खोलने का आश्वासन दिया है। घनिष्ठ मित्रता ‘एक हाथ देना, दूसरे हाथ लेना’ के सिद्धान्त अर्थात परस्पर व्यवहार पर चलती है। मोदी जी ने राष्ट्रपति डाॅनाल्ड ट्रम्प को यह व्यक्त कर दिया कि वह भारत में ही नहीं, अमेरिका में भी कितने शक्तिशाली व्यक्तित्व हैं।
राष्ट्रपति डाॅनाल्ड ट्रम्प एक दोस्त के साथ-साथ शातिर व्यापारी भी हैं इसीलिए वे हर बात में अपना लाभ देखते हैं। मोदी जी के अमेरिका पहुँचने से पूर्व उनके समस्त कार्यक्रम निश्चित थे और यह भी पूर्व निश्चित था कि मोदी जी ट्रम्प को क्या-क्या सौगात देगंे, परन्तु मोदी जी को यह आशा थी कि ट्रम्प धारा 370 के विषय में पाकिस्तान का साथ नहीं देगें। परन्तु मोदी व ट्रम्प की वार्ता से यह स्पष्ट हो गया कि एक दिन पूर्व जो घटित हुआ था वह मात्र दिखावा था। दोनों देश विगत 34 वर्षो से सुरक्षा एवं सामरिक हितों के मुद्दों पर एक दूरी बनाए हुए हैं और मोदी जी अथक प्रयास कर रहें हैं कि ये जो परस्पर रिश्तों की बर्फ है वो शीघ्र ही पिघल जाए। इस वार्ता से भारत को बहुत आशाएं थी। विशेषतया अमेरिका ने जो भारतीय कम्पनियों का जीएसपी दर्जा जून माह में समाप्त कर दिया था, उसे वे पुनः बहाल कर देगें। भारत भी अमेरिका के लिए हाइड्रोकार्बन के उत्पादन में वृद्धि की घोषणा करेगा। इसी प्रकार और अन्य विषय थे जिसपर कोई सकारात्मक समझौता नहीं हुआ। भारत को आशा थी कि पाकिस्तान के विषय में ट्रम्प उसको आतंकवादी देश घोषित कर देगें परन्तु ट्रम्प ने एक शातिर दोस्त की भांति इस प्रश्न को भी टालते हुए अपना सकेंत ईरान की ओर व्यक्त किया। इस दोस्ती का निष्कर्ष यह निकला कि ट्रम्प ने अपने हित के लिए मोदी जी की दोस्ती का अमेरिका में लाभ लिया। उनका लक्ष्य था कि जितने भी प्रवासी भारतीय हैं, उनको मोदी जी के द्वारा ट्रम्प के हित में साध दिया जाए, जिसमे वह सफल भी हुए, परन्तु जो भारत की अपेक्षा थीं, उसको उन्होंने ठण्डे बस्ते में डाल दिया अर्थात् उसकी अवहेलना की।
भारत, अमेरिका से दोस्ती के हर समय यह याद रखना चाहिए कि अमेरिका बहुत चालाक दोस्त और बहुत शातिर व्यापारी रहा है, जो सदैव अपना हित सर्वोपरी रखता है।
योगेश मोहनजी गुप्ता
चेयरमैन
आई आई एम टी यूनिवर्सिटी
मेरठ, भारत
चेयरमैन
आई आई एम टी यूनिवर्सिटी
मेरठ, भारत


