Thu. Oct 24th, 2019

हर रिश्ते की नींव की दरकी आज जमीन । पति पत्नी भी अब लगे, जैसे भारत चीन ।।

आज के रिश्तों पर कुछ दोहे
डॉ.रामविलास मानव
चाहे घर में हो दो जने, चाहे हो दस पाँच ।
रिश्तों में दिखती नहीं पहले जैसी आँच ।।
रिश्ते सब ‘इन लॉ’ हुए, क्या साला क्या सास ।
पडी गांठ पर गांठ है गायब हुई मिठास ।।
हर रिश्ते की नींव की दरकी आज जमीन ।
पति पत्नी भी अब लगे, जैसे भारत चीन ।।
न ही युद्ध की घोषणा और न युद्ध विराम ।
शीत युद्ध के दौर से, रिश्ते हुए तमाम ।।
रिश्तों में है रिक्तता, साँसों में संत्रास ।
घर में भी अब भोगते, लोग यहाँ वनवास ।।
स्वारथ जी जब से हुए, रिश्तों के मध्यस्थ ।
रिश्ते तब से हो गए, घावों के अभ्यस्त ।।
अब ऐसे कुछ हो गए, शहरों में परिवार ।
बाबुजी चाकर हुए अम्मा चौकीदार ।।
माँ मूरत थी नेह की, बापू आशीर्वाद ।
बातें ये इतिहास की, नहीं किसी को याद ।।
समकालिक सन्दर्भ में, मुख्य हुआ बाजार ।
स्वार्थपरता बनी तभी, रिश्तों का आधार ।।
क्यों रिश्ते पत्थर हुए, गया कहाँ सब ताप ।
पूछ रही संवेदना, आज आप से आप ।।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *