पुलिस की अवैध असूली, और कमिशन पर स्वास्थ्य सेवा
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार ने ग्रामीण जनता के स्वास्थ्य स्थिति को ठीक रखने के प्रयास स्वरुप स्वास्थ्य चौकी और उपस्वास्थ्य चौकी तो मुहैया की है, लेकिन उन स्वास्थ्य चौकियों में कभी कभार ही चिकित्सक दिखाई देने के कारण स्थिति इस कदर बिगड गई है कि गैर कानूनी क्लिनिक धडल्ले से फलफूल रहे हैं।
हिमालिनी से बातचीत में मटेहिया गा.बि.स.कार्यालय के कार्यालय सहायक जगराम यादव ने एक सनसनीखेज बयान दिया जिससे समूचे स्वास्थ्य क्षेत्रपर प्रश्न उठ गया। यादव ने बताया कि “भारत श्रावस्ती जिला बैरियर चौराहा के बंगाली नाम से मसहूर एक झोलाछाप चिकित्सक से दवा खरीद करने पर उसने नेपाल के स्वास्थ्य चौकियों द्वारा वितरित की जानेवाली दवाइयां उन्हे दी।”![]()
जिले में आम तौर पर भारतीय क्षेत्र से नेपाल में दवाओं की तस्करी होता है। लेकिन यह पहला मामला है कि नेपाली दवा भारतीय क्षेत्र में देखनेको मिली है, तस्करी के नाम पर प्रतिबन्धित दवाएँ जैसे ग्लाईकोडिन, कोरेक्स, आदि दवाएँ नेपालगंज में चोरीछुपे बिकती हैं।
लेकिन यादव के खुलासे ने स्थानीय स्तर पर खलबली मचाकर रख दिया और जानकारी लेनेपर यह बात सामने आई कि जिले के ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य चौकियों से दवा की भारी मात्रा में भारतीय क्षेत्र में बिक्री होता है।
भारत का श्रावस्ती और बहराच जिला नेपालगंज, बेतहनी, होलिया, फत्तेपुर, गंगापुर, मटेहिया, नरैनापुर, कालाफाँटा, लक्ष्मणपुर और कटकर्ुइंया गा.बि.स. की सीमा से सटा हुवा है, जहाँ से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए आधा घण्टा से भी कम समय लगता है। और सभी गा.बि.स.में स्वास्थ्य चौकी भी है।
सरकार ने सुरक्षा ब्यवस्था तथा अपराध को निरुत्साहित करने के लिए इलाका पुलिस कार्यालय तथा पुलिस चौकियाँ भी स्थापना कर रखी हैं। लेकिन पुख्ता बन्दोबस्त के अभाव में और कमिशन की होडÞबाजी में पुलिसिया कारवाही भी तस्करों की जेब में रहती है।
नाम प्रकाशन न करने के शर्तपर लम्बे अर्सर्ेेे काम कर रहे भारतीय झोलाछाप चिकित्सक ने बताया कि प्रत्येक महिना पुलिस को १० हजार रुपए देना पडÞता है न देनेपर दूधवाले की तरह घरमें वसूल करने पहुँच जाते हैं, इसलिए कारोबार से पहले पुलिसका हक उन्हे मिलजाना ही दोनों के लिए हितकर होता है।
चिकित्सक ने खुलासा किया कि “हिरासत मे डालने की धम्की देकर पुलिस हमसे पैसे ऐंठती है और दवाओं मे हेराफेरी कर हम जनता से असूल करते हैं, आखिर पैसा तो जनता का ही होता है”।
चिकित्सक ने खुलासा किया कि ब्रान्डेड दवाएँ बेचकर वे खुद को भी नही पाल सकते, पुलिस को कमिशन देना तो दूरकी बात है। इसलिए ऐसे चिकित्सक दवाओं पर या तो नकली एम.आर.पी.डलवाते है या हरिद्वारकी कई ऐसी कम्पनियाँ भी है जो सिर्फऐसे कारोबारियों के लिए दवा बनाती हैं।
हरिद्वार से दवा ५ चरण में तस्करी होकर नेपाल की सीमा के पास रहे जमुनहा बजार, ककरदरी, लक्ष्मणपुर, गुलरिया, परसा र्रुपईडिहा जैसे क्षेत्रों के स्थानीय तस्कर के यहाँ महफूज कर दिया जाता है और बाद में समय सुविधा अनुसार वह नेपाली जनता पर प्रयोग करने के लिए चिकित्सकों के पास पहुँच जाती है।
भारतीय क्षेत्र के निजी डाक्टरों के यहाँ कुछ समय हात आजमाने के बाद इस तरह के सैकडÞों भारतीय बेरोजगार युवा नेपाल के गाँवों मंे स्वास्थ्य सेवा देते हैं, जिन का गाँव में होना जनता के लिए हितकर हो न हो पहुँच में तो होता ही है। ऐसे लोग २४ घण्टे सेवा के लिए आतुर रहते हैं सिर्फकोई इन्हे फोन मात्र कर दे।
सामान्य स्वास्थ्य समस्या तो ऐसे चिकित्सक स्थानीय स्तर पर ही समाधान करने की काबलियत रखते हैं, लेकिन जटिल समस्याओं में ये लोग लखनउ तक भी मरीज का साथ देते हैं और वहाँ से भी इन्हे अच्छाखासा कमिशन मिल जाता है। नेपागंज के निजी और सरकारी अस्पतालों के पास ऐसे लोगों की तादाद बहुत जादा होती है।
नये युवकों को अपना पेशा जमाना होता है तो वह किसी पुलिस और पुराने प्रधानों से मिलता है, लम्बे समय से स्थानीय निर्वाचन नहोने के कारण प्रधान भी उन युवकों का पूरा सहयोग करते है। इस एवज में प्रधान को एकबार मात्र मंुह मीठा करने का अवसर प्राप्त होता है। बाँकी समय वह पुलिस की रखरखाव में रहता है।
इस तरह जनता के स्वास्थ्य पर २४ घण्टे चक्र चलता है और जिला का स्वास्थ्य ब्यवस्था विभाग कान में तेल डालकर सोता रहता है। अनुगमन के नाम पर नगरक्षेत्र और उस के आसपास के ही गा.बि.स.में उस का प्रतिवेदन तयार हो जाता है। जनता की फिक्र आखिर किसको है –
स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य चौकियों मे चिकित्सक मुहैया के लिए लोगों ने कई बार जिला जनस्वाथ्य कार्यालय बाँके तथा जिला प्रशासन कार्यालय बाँके में ज्ञापन पत्र तथा आवेदन भी दिया लेकिन उसका कोई खास प्रभाव न दिखने के कारण लोगों ने अब आवेदन देना भी छोडÞ दिया।
स्वास्थ्य चौकी मटेहिया के चिकित्सक प्रेम बूढÞा ने बताया कि लोग नकली तथा भारतीय दवाओं के प्रयोग से इतना ग्रसित हो चुके हैं कि उनपर नेपाल सरकार की दवा का कोई असर नहीं होता, जिस के कारण लोग ऐसे झोलाछाप चिकित्सकों से उपचार कराना उचित समझते हैं।
जिले की स्वास्थ्य स्थितिपर उठे इस सवाल पर जिला जनस्वाथ्य प्रमुख जीवन मल्ल का गैर जिम्मेवार जवाब यह था कि हम नियमित अनुगमन करते है, लेकिन इस तरह की क्लिनिक दिखाई न देने के कारण किसी किसिम की कारवाही नहीं की गई है, और कारवाही करने का काम जिला प्रशासन का है, हम सिर्फसिफारिस कर सकते हैं। मल्ल ने बताया कि कोई सबूत प्रमाण मिले तो हम कारवाही के लिए सिफारिस जरूर करेंगे।
जनस्वास्थ्य प्रमुख जीवन मल्लका यह कोई नया आश्वासन नहीं है, जब भी कोई ऐसे अपराध के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे आश्वासन, अपमान, आदिका सामना करना पडÞता है लेकिन सवाल सह है कि कबतक चलेका यह जर्ुम और कौन रोकेगा इस गोरख धन्धे को –

