Sun. Dec 8th, 2019

बेटों सी है बेटी मेरी ये मत कहना, मैं बेटी हूँ बेटी ही रहने देना : सुरभि मिश्रा

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सुरभि मिश्रा

हाँ सीधी साधी लडकी वो,
है भोली भाली लडकी वो,
हाँ खिली खिली सी लडकी वो,
कभी शीत कभी शहद सी,
कभी चंचल झरने सी लडकी वो,
कभी ओज सूर्य सा,
कभी तारों सी चमकती लडकी वो,
बदल गया अब पासा सब,
कभी गर्जन था मेघ सा,
अब डरती है लडकी वो,
पंख फैलाकर उडती थी,
अब नजरे छिपाती लडकी वो,
हाँ सीधी साधी लडकी वो,
है भोली भाली लडकी वो,

सपने देख लडके की,
बरबस कोख में पलती लडकी वो,
क्या हो रहा है ये अब,
माँ की कराह सुन रही लडकी वो,
डरी सहमी लडकी वो,
दर्द कोख से ही सहती,
सपने गोद की देखती लडकी वो,
हाँ सीधी साधी लडकी वो,
है भोली भाली लडकी वो,

कभी जान के लिए,
हक के लिए लडती लडकी वो,
आँगन की किलकारी,
कभी गृह शोभा बनती लडकी वो,
पर फैलती नभ को,
दहलीज पर लगते पहरों से,
अब घबराती लडकी वो,
सहमी सहमी रहती लडकी वो,
हाँ सीधी साधी लडकी वो,
है भोली भाली लडकी वो,

कि रात गये अब,
अब हर पहर सहमी लडकी वो,
अनजान डगर पर चलती क्या,
अब घर में छिपती लडकी वो,
अब लाज को डरती लडकी वो,
कभी सीता कभी लछमी,
कभी शक्ति रूप थी लडकी वो,
अब लाज को डरती लडकी वो,
कभी दोर्पदी सी लाज बचाती,
किसे कृष्ण कहती लडकी को,
अब हवस के मुँह लग लडकी वो,
सहमी सहमी रहती लडकी वो,
हाँ सीधी साधी लडकी वो,
है भोली भाली लडकी वो,

पली बडी वो माँ बापू संग,
अब बहु बन गयी लडकी वो,
ना जाने किस्मत क्या चाहे,
किस लालच की भूख बनती लडकी वो,
कभी दहेज कभी ताने,
ना जाने कब और किस,
हिंसा से जलती लडकी वो,
सहमी सहमी रहती लडकी वो,
हाँ सीधी साधी लडकी वो,
है

अब दरकार सुनो बेटियों की,
बेटों सी है बेटी मेरी ये मत कहना,
मैं बेटी हूँ बेटी ही रहने देना,
जब गर्भ में बेटी को,
कूडे के डेर में नहीं,
अपने गोद में जगह देना,
चलें जब राहों में,
नजरें मिलाकर चल पाये,
बस ऐसा सूकुँ देना,
बेटों सी है बेटी मेरी ये मत कहना,
मैं बेटी हूँ बेटी ही रहने देना।

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