Sat. May 30th, 2020

धन तेरस एवं दिवाली में खरीदारी एवं लक्ष्‍मी पूजन का शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि

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लक्ष्‍मी पूजर्त्राधाकान्त शास्त्री , धन की देवी माता महालक्ष्मी की पूजा गणेश इंद्र और कुबेर के साथ धन तेरस से आरंभ कर भैया दूज तक 5 दिनों तक की जाती है ।
इस वर्ष धनतेरस 25 अक्टूबर शुक्रवार को एवं दीपों का पर्व दीपावली दिनांक 27 अक्टूबर रविवार को मनाया जाएगा । धनतेरस एवं दीपावली का विशेष पूजन स्थिर एवं द्विस्वभाव लग्नों में करना श्रेष्ठ होता है जो क्रमश निम्न प्रकार है ,
प्रातः के वृश्चिक एवं धनु लग्न –
8:15 से 10:25 बजे तक
एवं
10:25 से 12:30 तक ।

कुम्भ एवं मीन लग्न :-
अपराह्न 2:18 से 3:50बजे तक
एवं
3:50 बजे से 4₹5:20 बजे तक

वृष एवं मिथुन लग्न :-
रात्रि 6:50 बजे से 8:50 बजे तक
एवं
रात्रि 8:50 बजे से 11:15 तक ।

सिंह लग्न :-
रात्रि 1:30 से 3:36 तक ।

इस दिन क्रमशः उत्तराफाल्गुनी एवं चित्रा नछत्र सम्पूर्ण दिवस एवं रात्रि पर्यंत रहेगा । अतः इस वर्ष दिन के पूजन विशेष होगा ।
प्रदोष काल का समय गृहस्थ के लिए अपने घर की पूजा के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। प्रदोष काल का मतलब होता है दिन और रात्रि का संयोग काल, इस समय घर के कुल देवता देवी एवं दरवाजे पर दीप जला कर माता लक्ष्मी का स्वागत करना प्रसंशनीय होता है इसमें दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का प्रतीक है और रात्रि माता लक्ष्मी का , धर्म सिंधु के अनुसार अपराह्न, प्रदोष काल और मध्यरात्रि धनतेरस और दीपावली पूजन को सबसे शुभ मुहूर्त है।

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1. गृहस्थ अपने घरों में प्रदोष काल में पूजन करें।
2. व्यापारी स्थिर एवं द्विस्वभाव लग्नों में धनतेरस एवं दीपावली पूजन करें तो बेहतर है।
3. छात्र प्रदोष काल में पूजन करें।
4. आई टी, मीडिया, फ़िल्म, टी वी इंडस्ट्री, मैनेजमेंट और जॉब करने वाले शुक्र प्रधान लग्न वृष में पूजन करें।
5. सरकारी सेवा के लोग अधिकारी और न्यायिक सेवा के लोग भी वृष लग्न में ही पूजन करें।
6. तांत्रिक एवं पैतृक स्थिर व्यपारी सिंह लग्न महानिशीथ काल में पूजन करें।

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7. चौघड़िया मुहूर्त में भी विशेष लाभ हेतु पूजा कर सकते हैं। जो प्रातः 9:15 बजे से से 1:30 तक चर, लाभ, अमृत की चौघड़िया तथा 3:00 से 4:20 तक शुभ की चौघड़िया, रात्रि 7:20 से 8:55 तक लाभ, फिर 12 बजे से 3:41 तक अमृत,एवं चर चौघड़िया रहेगी।
9. राजनीतिज्ञ अमावस्या की रात्रि के महानिशीथ काल में तांत्रिक एवं पारम्परिक पूजन कर सकते हैं।

विशेषकर  धनतेरस से दीपावली तक का महालक्षमी का विशेष पर्व समान फलदायी होता है। इस दिन धन के देवता कुबेर और देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि महाराज की भी पूजा होती है। धनतेरस पर दीप जलाना क्यों जरूरी होता है और इसे कैसे जलाया जाता है ये जानना जरूरी है।
धनतेरस से दीपावली पूजन का क्रम शुरू हो जाता है। इस क्रम में अगर कुछ उपाय के साथ मां लक्ष्मी और धनवंतरी भगवान की पूजा की जाए तो धन की कमी कभी नहीं होने पाएगी । धनतेरस पर हर कोई चाहता है कि उसके घर धन की वर्षा हो लेकिन कई बार धन आपके थैली में आते-आते कहीं और ही चला जाता है। लेकिन अगर आप इस धनतेरस को कुछ विशेष पूजन उपाय करें तो आपकी थैली जरूर भरेगी। धनतेरस से दीपावली पूजन का क्रम शुरू हो जाता है। इस क्रम में अगर कुछ उपाय के साथ मां लक्ष्मी और धनवंतरी भगवान की पूजा की जाए तो धन की कमी कभी नहीं होने पाएगी।
धनतेरस एवं दीपावली की हार्दिक शुभकामना ,
माता लक्ष्मी , श्री गणेश , धन्वंतरि , इंद्र एवं कुबेर के साथ अपनी कृपा दृष्टि सबके ऊपर बनाते हुवे सुख शान्ति समृद्धि सम्पूर्ण प्रसन्नता एवं अपार धन की वर्षा करें ,
सबका जीवन आनंददायक एवं मंगलमय हो, आचार्य राधाकान्त शास्त्री ,

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