Tue. Nov 5th, 2019

मलिबारा में महाकाली पूजनोत्सव का भव्य आयोजन : अजय कुमार झा

(युवाओं में बढ़ते धार्मिक प्रेम)
आज कार्तिक 18 गत्ते सोमबार के दिन नेपाल के प्रदेस नंबर 2 के राजधानी जनकपुर से 18 किलोमीटर दक्षिण भारत के सीतामढ़ी (भिठामोड़) बोर्डर से सटे जलेश्वर नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 के मलिबारा में महाकाली पूजनोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस क्रम में आज कलश यात्रा के तहत हजारो की संख्या में वालावालिकाएं सजधज के सर पे गगरी लिए शुवह से ही निराहार रहकर सहर्ष- उमंग के साथ सहभागिता दिखाए।नगर प्रमुख श्री रामशंकर मिश्रा के अध्यक्षता में
संपन्न इस कलश यात्रा तथा महाकाली पूजनोत्सव समारोह में श्री अभिराम शर्मा जी, श्री सुरेस पांडे जी, श्रीमती रानी शर्मा लगायत वार्ड अध्यक्ष श्री संजय पण्डे के साथ महाकाली पूजनोत्सव के अध्यक्ष दिवाकर पांडे, सुजल पांडे,सुशिल राय,रंजय मंडल,सुमन पांडे,शुभम पांडे,पंकज पांडे, चिंटू मंडल,लगायत के युवाओं के ऊर्जा और उत्साह का परिणाम है की पिछले 25 वर्षों से यह धार्मिक अनुष्ठान होता आ रहा है। नेपाल भारत के हजारों काली भक्तो का संगम इस उत्सव में देखा जा सकता है। भारत के मशहूर कलाकारों के द्वारा जागरण तथा पाठ का कार्यक्रम के बारेमे दिवाकर मिश्रा के बताया गया। मैं खुद पिछले दस वर्षों से यह कार्यक्रम देखते आ रहा हूँ। सबसे विशेष बात है कि लाखों में खर्चा का जिम्मा यहाँ के युवाओं के कन्धा पर ही रहता है। आजके युग में युवाओं में धर्म के प्रति दिखता यह भाव वास्तव में अनुकरणीय है।
काली पूजन के सम्बन्ध में एक घटना का बिबरण आता है,
एक बार दारुक नाम के असुर ने ब्रह्मा को प्रसन्न किया। उनके द्वारा दिए गए वरदान से वह देवों और ब्राह्मणों को प्रलय की अग्नि के समान दुःख देने लगा। उसने सभी धर्मिक अनुष्ठान बंद करा दिए और स्वर्गलोक में अपना राज्य स्थापित कर लिया। सभी देवता, ब्रह्मा और विष्णु के धाम पहुंचे। ब्रह्मा जी ने बताया की यह दुष्ट केवल स्त्री दवारा मारा जायेगा। तब ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देव स्त्री रूप धर दुष्ट दारुक से लड़ने गए. परतु वह दैत्य अत्यंत बलशाली था, उसने उन सभी को परास्त कर भगा दिया।
ब्रह्मा, विष्णु समेत सभी देव भगवान शिव के धाम कैलाश पर्वत पहुंचे तथा उन्हें दैत्य दारुक के विषय में बताया। भगवान शिव ने उनकी बात सुन मां पार्वती की ओर देखा और कहा हे कल्याणी जगत के हित के लिए और दुष्ट दारुक के वध के लिए में तुमसे प्रार्थना करता हुं। यह सुन मां पार्वती मुस्कराई और अपने एक अंश को भगवान शिव में प्रवेश कराया। जिसे मां भगवती के माया से इन्द्र आदि देवता और ब्रह्मा नहीं देख पाए उन्होंने देवी को शिव के पास बैठे देखा।
मां भगवती का वह अंश भगवान शिव के शरीर में प्रवेश कर उनके कंठ में स्थित विष से अपना आकार धारण करने लगा। विष के प्रभाव से वह काले वर्ण में परिवर्तित हुआ। भगवान शिव ने उस अंश को अपने भीतर महसूस कर अपना तीसरा नेत्र खोला। उनके नेत्र द्वारा भयंकर-विकराल रूपी काले वर्ण वाली मां काली उत्तपन हुई। मां काली के लालट में तीसरा नेत्र और चन्द्र रेखा थी। कंठ में कराल विष का चिन्ह था और हाथ में त्रिशूल व नाना प्रकार के आभूषण व वस्त्रों से वह सुशोभित थी। मां काली के भयंकर व विशाल रूप को देख देवता व सिद्ध लोग भागने लगे।
मां काली के केवल हुंकार मात्र से दारुक समेत, सभी असुर सेना जल कर भस्म हो गई। मां के क्रोध की ज्वाला से सम्पूर्ण लोक जलने लगा। उनके क्रोध से संसार को जलते देख भगवान शिव ने एक बालक का रूप धारण किया। शिव श्मशान में पहुंचे और वहां लेट कर रोने लगे। जब मां काली ने शिवरूपी उस बालक को देखा तो वह उनके उस रूप से मोहित हो गई। वातसल्य भाव से उन्होंने शिव को अपने हृदय से लगा लिया तथा अपने स्तनों से उन्हें दूध पिलाने लगी। भगवान शिव ने दूध के साथ ही उनके क्रोध का भी पान कर लिया। उनके उस क्रोध से आठ मूर्ति हुई जो क्षेत्रपाल कहलाई।
10 महाविद्याओं में से एक मां काली के 4 रूप हैं:- दक्षिणा काली, शमशान काली, मातृ काली और महाकाली। हालांकि मां कालिका की साधना के कई रूप हैं लेकिन भक्तों को केवल सात्विक भक्ति ही करना चाहिए। शमशान काली, काम कला काली, गुह्य काली, अष्ट काली, दक्षिण काली, सिद्ध काली, भद्र काली आदि कई मान से मां की साधना होती है।
महाकाली को खुश करने के लिए उनकी फोटो या प्रतिमा के साथ महाकाली के मंत्रों का जाप भी किया जाता है। इस पूजा में महाकाली यंत्र का प्रयोग भी किया जाता है। इसी के साथ चढ़ावे आदि की मदद से भी मां को खुश करने की कोशिश की जाती है। अगर पूरी श्रद्धा से मां की उपासना की जाए तो आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। अगर मां प्रसन्न हो जाती हैं तो मां के आशीर्वाद से आपका जीवन पलट सकता है, भाग्य खुल सकता है और आप फर्श से अर्श पर पहुंच सकते हो।
* ऐसी बीमारियां जिनका इलाज संभव नहीं है, वह भी काली की पूजा से समाप्त हो जाती हैं।
* काली के पूजक पर काले जादू, टोने-टोटकों का प्रभाव नहीं पड़ता।
* हर तरह की बुरी आत्माओं से माता काली रक्षा करती हैं।
* कर्ज से छुटकारा दिलाती हैं।
* बिजनेस आदि में आ रही परेशानियों को दूर करती हैं।
* जीवनसाथी या किसी खास मित्र से संबंधों में आ रहे तनाव को दूर करती हैं।
* बेरोजगारी, करियर या शिक्षा में असफलता को दूर करती हैं।
* कारोबार में लाभ और नौकरी में प्रमोशन दिलाती हैं।
* हर रोज कोई न कोई नई मुसीबत खड़ी होती हो तो काली इस तरह की घटनाएं भी रोक देती हैं।
* शनि-राहु की महादशा या अंतरदशा, शनि की साढ़े साती, शनि का ढइया आदि सभी से काली रक्षा करती हैं।
*पितृदोष और कालसर्प दोष जैसे दोषों को दूर करती हैं।
महाकाली शाबर मन्त्र : माता कालिका का यह साबर मंत्र है इसे साधना करना हो तभी पढ़े अन्यथा न पढ़े। इसे शुद्ध और पवित्र होकर ही पढ़ें अन्यथा आपके साथ बुरा घटित हो सकता है। अच्छा होगा की किसी जानकार से पूछकर ही पढ़ें।
ॐ निरंजन निराकार अवगत पुरुष तत सार, तत सार मध्ये ज्योत, ज्योत मध्ये परम ज्योत, परम ज्योत मध्ये उत्पन्न भई माता शम्भु शिवानी काली ओ काली काली महाकाली, कृष्ण वर्णी, शव वहानी, रुद्र की पोषणी, हाथ खप्पर खडग धारी, गले मुण्डमाला हंस मुखी। जिह्वा ज्वाला दन्त काली। मद्यमांस कारी श्मशान की राणी। मांस खाये रक्त-पी-पीवे। भस्मन्ति माई जहां पर पाई तहां लगाई। सत की नाती धर्म की बेटी इन्द्र की साली काल की काली जोग की जोगीन, नागों की नागीन मन माने तो संग रमाई नहीं तो श्मशान फिरे अकेली चार वीर अष्ट भैरों, घोर काली अघोर काली अजर बजर अमर काली भख जून निर्भय काली बला भख, दुष्ट को भख, काल भख पापी पाखण्डी को भख जती सती को रख, ॐ काली तुम बाला ना वृद्धा, देव ना दानव, नर ना नारी देवीजी तुम तो हो परब्रह्मा काली।

(ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा)।
*एकाक्षर मंत्र : क्रीं – इसे चिंतामणि काली का विशेष मंत्र भी कहा जाता है।
*द्विअक्षर मंत्र : क्रीं क्रीं – तांत्रिक साधनाएं और मंत्र सिद्धि हेतु।
*त्रिअक्षरी मंत्र : क्रीं क्रीं क्रीं – तांत्रिक साधना के पहले और बाद में जपा जाता है।
*ज्ञान प्रदाता मन्त्र : ह्रीं – दक्षिण काली का मंत्र ज्ञान हेतु।
*चेटक मन्त्र : क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा –  दुखों का निवारण करके घन-धान्य की वृद्धि एवं पारिवारिक शांति हेतु।
*छह अक्षरों का मंत्र : क्रीं क्रीं फट स्वाहा – सम्मोहन आदि तांत्रिक सिद्धियों के लिए।
*आठ अक्षरों का मंत्र : क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा – पासना के अंत में जप करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
*नवार्ण मंत्र : ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै:’ – इसका प्रत्येक अक्षर एक ग्रह को नियंत्रित करता है। इस मंत्र का जप नवरात्रों में विशेष फलदायी होता है।
*ग्यारह अक्षरों का यह मन्त्र : ऐं नमः क्रीं क्रीं कालिकायै स्वाहा- ह मन्त्र अत्यंत दुर्लभ और सर्वसिंद्धियों को प्रदान करने वाला है।
आवश्यकता है कि इस पूजन को सृजनात्मक और उपलब्धिमूलक बनाने का प्रयास किया जाय। युवाओं में साधना तथा मन्त्र शक्ति का प्रादुर्भाव हो। यह क्षेत्र शारीरिक बौद्धिक तथा वैभवीय दृष्टि से सबल बने। युवाओं में जीवन के प्रति प्रेम और विश्व समाज के प्रति उत्तरदायित्व का वोध बढे। सामाजिक मेलमिलाप के साथसाथ सम्मान और सहयोग के भाव में बृद्धि हो। जय माँ काली! जय माँ जगदम्बा!! जय माँ सरश्वती!!!

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