अयाेध्या भूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला राम मंदिर बनाने का आदेश, मस्जिद निर्माण के लिए मिलेगी पाँच एकड जमीन
राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को कई साल से कानूनी लड़ाई में उलझे देश में सबसे चर्चित अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसला सुनाया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ ने 40 दिन तक मैराथन सुनवाई करने के बाद गत 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अदालत के निर्णय से हल हुआ बहुत बड़ा मसला
दावा खारिज होने का अफसोस नहीं: निर्मोही अखाड़ा
हिंदू महासभा ने फैसले को बताया ऐतिहासिक
फैसले से सहमत नहीं
पीएम मोदी ने शांति बनाए रखने की अपील की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने एक के बाद एक अपने कई ट्वीट्स में कहा कि अयोध्या पर फैसले को किसी समुदाय की हार या जीत के तौर पर नहीं देखना चाहिए। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वो किसी की हार-जीत नहीं होगा। देशवासियों से मेरी अपील है कि हम सब की यह प्राथमिकता रहे कि ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल दे।
हाईकोर्ट ने दिया था यह आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को दिए फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इसमें एक हिस्सा रामलला विराजमान को, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा हिस्सा मुसलमानों को देने का आदेश था। हाईकोर्ट ने रामलला विराजमान को वही हिस्सा देने का आदेश दिया था जहां वे अभी विराजमान हैं। इसके खिलाफ सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में 14 अपीलें दाखिल की थी।
शिया वक्फ बोर्ड ने किया था यह एलान
शिया वक्फ बोर्ड ने हिंदुओं के मुकदमें का समर्थन किया था। बोर्ड ने विवादित भूमि को शिया वक्फ बताते हुए कहा था कि 1528 में बाबर के आदेश पर उसके कमांडर मीर बाकी ने उक्त ढांचे का निर्माण कराया था। हाईकोर्ट ने भूमि एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों को दिया है न कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को। सुन्नी वक्फ बोर्ड का कोई हक नहीं बनता और चूंकि यह शिया वक्फ था इसलिए वह हाईकोर्ट से मिला अपना एक तिहाई हिस्सा हिंदुओं को देता है।

