अयोध्या मामला : सुप्रीम कोर्ट का एतिहासिक फैसला, मंदिर निर्माण का रास्ता साफ
हिमालिनी के लिए मधुरेश प्रियदर्शी की रिपोर्ट, नई दिल्ली :– अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट के पांच सदस्यीय जजों की बेंच ने शनिवार को अहम फैसला सुनाकर रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद का पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट के आदेश के मुताबिक केंद्र सरकार तीन महीने में योजना तैयार करेगी। योजना में मंदिर निर्माण के लिए बोर्ड ऑफ ट्रस्टी का गठन किया जाएगा। फिलहाल अधिग्रहित जगह का कब्जा रिसीवर के पास रहेगा। सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड जमीन मिलेगी।
संविधान नहीं करता भेदभाव……
बेंच ने कहा कि मुस्लिम पक्ष यह सिद्ध नहीं कर पाया कि उनके पास जमीन के मालिकाना हक का एक्सक्लूसिव अधिकार था। हाईकोर्ट ने ज्वांइट पजेशन के आदेश दिए थे। संविधान कभी धर्म में भेदभाव नहीं करता। सीजेआई ने कहा कि मुस्लिमों का बाहरी अहाते पर अधिकार नहीं रहा। सुन्नी वक्फ बोर्ड ये सबूत नहीं दे पाया कि यहां उसका एक्सक्लूसिव अधिकार था।
ढहाया गया ढांचा भगवान राम का जन्मस्थान ….
सीजेआई ने 45 मिनट तक अपना फैसला पढ़ा। कोर्ट ने कहा कि हिंदू मुस्लिम विवादित स्थान को जन्मस्थान मानते हैं लेकिन आस्था से मालिकाना हक तय नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है, हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है।
सर्वसम्मति से सुनाया फैसला…
कोर्ट ने कहा कि हम सर्वसम्मति से फैसला सुना रहे हैं। इस कोर्ट को धर्म और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वीकार करना चाहिए और संतुलन बनाए रखना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई। धर्मशास्त्र में प्रवेश करना कोर्ट के लिए उचित नहीं होगा।
ढांचे के नीचे था मंदिर….
कोर्ट ने कहा कि ढहाए गए ढांचे के नीचे एक मंदिर था, इस तथ्य की पुष्टि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया कर चुका है। पुरातात्विक प्रमाणों को महज एक ओपिनियन करार देना एएसआई का अपमान होगा। कोर्ट ने कहा कि विवादित ढांचा इस्लामिक मूल का ढांचा नहीं था। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। मस्जिद के नीचे जो ढांचा था, वह इस्लामिक ढांचा नहीं था।
हिंदुओं के अधीन था विवादित जमीन का बाहरी हिस्सा…….
कोर्ट ने कहा कि यह सबूत मिले हैं कि राम चबूतरा और सीता रसोई पर हिंदू अंग्रेजों के जमाने से पहले भी पूजा करते थे। रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्य बताते हैं कि विवादित जमीन का बाहरी हिस्सा हिंदुओं के अधीन था।

