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नेपाली राजनीति में चीन प्रवेश कर चुका है, जो चिन्ता का विषय हैः पूर्व राजदूत राय

 

काठमांडू, २५ नवम्बर । नेपाल के लिए भारतीय पूर्व राजदूत रंजीत रॉय ने कहा है कि नेपाली राजनीति में चीन का प्रवेश हो चुका है, जो चिन्ता का विषय है । नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) और चिनियां कम्युनिष्ट पार्टी की निकटता संबंध में चर्चा करते हुए उन्होंने ऐसा कहा है । ‘द यावर’ को एक भीडियो अन्तवार्ता देते हुए उन्होंने इस तरह का दावा किया है ।

उन्होंने अपनी अन्तवार्ता में कहा है– ‘नेपाल और चीन के कम्युनिष्ट पार्टियों के बीच जो निकटता बढ़ रही है, वह चिन्ता का विषय है । चिनियां कम्युनिष्ट पार्टी के लोग ने नेपाल में ही आकर सी जिनपिङ विचारधारा की प्रशिक्षण दिया है । इसतरह चीन नेपाल की आन्तरिक राजनीतिम में प्रवेश कर चुका है, नेपाल के सभी वामपन्थी पार्टियों को एक बनाने की चाहत उसका है ।’

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पूर्व राजदूत रॉय का मानना है कि नेपाल के लिए भारत की विकल्प चीन कभी भी नहीं हो सकता, यह बात समझ में आना चाहिए । उन्होंने आगे कहा है– ‘भौगोलिक बस्तुस्थिति ही ऐसी है, नेपाल और चीन के बीच सामानों की आदन–प्रदान भी सम्भव नहीं है ।

चीन की सबसे नजदीक का बन्दरगाह ३५ सौ किलोमिटर की दूरी पर है । इसीलिए नेपाल और चीन के बीच सम्पन्न पारवाहन सम्झौता कार्यान्वयन की सम्भावना भी नहीं है ।’ उन्होंने दावा किया है कि तिब्बत के कारण चीन की प्राथमिकता में नेपाल पड़ रहा है ।

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उन्होंने यह भी कहा है कि नेपाल में कम्युनिष्ट सरकार होने के कारण भी नेपाल–चीन आपस में करीब हो रहे हैं । रॉय जी ने आगे कहा है– ‘अगर कांग्रेस सरकार रहती तो ऐसी नौबत ना आती ।’

पूर्व राजदूत रॉय का यह भी मानना है कि राजा महेन्द्र की समय से ही नेपाल और भारत के बीच संबंध में उत्तार–चढ़ाव आ रही है, जिसके चलते कभी–कभार नेपाल चीन की ओर नजदीक होने की प्रयास करता है, लेकिन प्रयास हरदम असम्भव रहा है । वि.सं. २०७२ साल की सीमा अवरुद्ध संबंधी प्रसंग में उन्होंने कहा है कि उस समय नेपाल के ही कुछ राजनीतिक पार्टियों ने नेपाल–भारत सीमा अवरुद्ध किया था, उसमें भारत का कोई भी हाथ नहीं है । स्मरणीय है, उस समय नेपाल के लिए भारतीय राजूत रॉय जी ही रहे थे ।
उन्होंने स्वीकार किया है कि नेपाल में राजतन्त्र समाप्ति के लिए भारत ने नेपाली जनता को साथ दिया है । उन्होंने आगे प्रश्न किया– ‘उस समय भारतीय हस्तक्षेप का महसूस नहीं हो गया, लेकिन आज कैसे भारतीय हस्तक्षेप हो रहा है ?’

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