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तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन सम्पन्न

 

दिनांक 28-30 नवम्बर 2019 के मध्य मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग , श्री भागवत परिवार तथा गोरेगांव स्पोर्ट्स क्लब द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन सम्पन्न हुआ।इसका उद्घाटन महाराष्ट्र के माननीय राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी के हाथों सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर श्री रमेश भाई ओझा, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.सुहास पेडणेकर, प्रति कुलपति डॉ.रवीन्द्र कुलकर्णी, श्री दीपक मुकादम , जापान से पधारीं डॉ तोमोको किकुचि और वीरेन्द्र याग्निक ने रामकथा के वैश्विक परिदृश्य पर अपने विचार रखे।इसके उपरांत राम नाम मनि दीप धर शीर्षक से मंगलाचरण सम्पन्न हुआ जिसकी अध्यक्षता मारीशस से पधारे डॉ राजेन्द्र अरुण ने की ।इस सत्र में प्रमुख अतिथि के रूप में मस्तनाथ विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ.रामसजन पांडेय तथा वक्ता के रूप में डॉ .तोमोको किकुचि ( जापान), डॉ.नादेज्दा(रूस),श्री सुरेश भगेरिया ने रामकथा के लोककल्याणकारी स्वरूप पर प्रकाश डाला।इस सत्र का संचालन डॉ.हनुमंत धायगुडे ने किया।

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इसके उपरांत रामकाव्य के शैक्षणिक और साहित्यिक आयाम विषय पर डॉ.जगमोहन सिंह राजपूत की अध्यक्षता में पहला सत्र  सम्पन्न हुआ जिसमें डॉ.देवसिंह पोखरिया , डॉ.श्री निवास पांडेय, डॉ.करुणाशंकर उपाध्याय, डॉ.विनोद टिबड़ेवाल तथा सुनील केजरीवाल ने रामकाव्य के साहित्यिक महत्त्व का प्रतिपादन किया।इसी क्रम में डॉ.सूर्यप्रसाद दीक्षित की अध्यक्षता में डॉ.जय प्रकाश शर्मा , डॉ.रामेश्वर सिंह( रूस), महावीर नेवेटिया ने रामकाव्य के दार्शनिक आयाम नामक दूसरे सत्र में अपनी बात रखी।

अगले दिन प्रातः10 बजे से जयंत कुमार बांठिया की अध्यक्षता में राम-राज्य में कुशल प्रशासन प्रबंधन की संकल्पना पर तृतीय सत्र सम्पन्न हुआ।इसमें मोतीलाल ओसवाल  ने रामराज्य में प्रबंधन की संकल्पना पर अपने विचार रखे।न्यायमूर्ति श्यामशंकर उपाध्याय ने कहा कि धर्म का प्रयोग भारतीय चिंतन में विधि के शासन के रूप में ही हुआ है।राम लोकतांत्रिक शासक थे।जयंत कुमार बांठिया ने भूटान के शासन को राम-राज्य के निकट बतलायाइस सत्र में सुशील कुमार केडिया और विनोद लाट ने भी अपने विचार रखे।

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इसी क्रम में चतुर्थ सत्र के अंतर्गत डॉ.कैलाश चंद्र पंत की अध्यक्षता में रामकाव्य के सांस्कृतिक आयाम पर चर्चा हुई जिसमें अश्विनी लोहानी, अखिलेंद्र मिश्र, विश्वनाथ सचदेव , रामेश्वर लाल काबरा तथा सत्यनारायण काबरा ने सारगर्भित विचार रखे।पंचम रामायण के नारी पात्र स्त्री विमर्श के संदर्भ त्रेता के महाकवि उद्भ्रांत की अध्यक्षता में डॉ.कुमुद शर्मा , डॉ स्वामी.सूर्य प्रभा (लंदन),डॉ.श्वेता दीप्ति( नेपाल) तथा डाॅ.विनोद बाला  अरुण ( मारीशस) ने गंभीर विमर्श किया।

दूसरे दिन सायं रमाकांत शर्मा उद्भ्रांत की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी सम्पन्न हुई जिसमें सुन्दरचंद ठाकुर, श्रीमती माया गोविंद , दीक्षित दनकौरी, बुद्धिनाथ मिश्र , किरण मिश्र तथा बनमाली चतुर्वेदी ने काव्य पाठ किया।तीस नवंबर को प्रातः दस बजे से स्वामी श्री धर्मेन्द्र जी की अध्यक्षता में सुरेश चतुर्वेदी, डॉ.सत्यकेतु सांकृत , सुरेश खंडेलिया , अजय याज्ञिक तथा घनश्याम पहलाजानी ने राम के वैश्विक स्वरूप को विश्लेषित किया।

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इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन के अंत में डॉ.करुणाशंकर उपाध्याय ने आमंत्रित अतिथियों , प्रतिभागियों  , श्री भागवत परिवार के पदाधिकारियों तथा विश्वविद्यालय के अधिकारियों , सहयोगियों, मीडिया कर्मियों विशेष रूप से प्रवासी संदेश तथा न्यूज नेशन  के प्रति हार्दिक आभार माना।

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