यह हर नेपाली की जीत है : पुष्पा बस्नेत सीएनएन हिरो

काठमांडू । कविता कर्ण । जेल में रहनेवाले बच्चों को देखभाल तथा सहारा प्रदान करने के लिये नेपाल के समाजसेविका पुष्पा बस्नेत को सीएनएन हिरो अफ दी इयर २०१२ की विजेता घोषित किया गया है । अमेरिकी टिभी च्यानल सीएनएन ने हरेक वर्ष यह अवार्ड सीएनएन वेभसाइट द्वारा अनलाइन बोटिङ के जरिए प्रदान करते आया है । २८ वर्षीय बस्नेत को उन बच्चों को जो अपने माता पिता के साथ नेपाली जेल के अंदर सड़ रहे थे शरण प्रदान करने के लिए नामित किया गया है ।
सोमबार को सुबह अमेरिका के लस एन्जलस में यह अवार्ड वितरण किया गया है । इस अवार्ड के लिए विश्व भर से दस हजार लोगों ने दावेदारी किया था । पिछली बार जब पुष्पा टॉप टेन में आई, तब नेपाल लगायत विश्व के कइ देशों में रहनेवाले नेपालियों ने उनको बोट दिया था । अन्तिम चरणों में पुष्पा ने अपने नौं प्रतिपस्पर्धी को पिछे छोड़ते हुए उपाधि पर कब्जा जमा लिया। “यह हर नेपाली की जीत है” दर्शकों की एक सभा को वर्ष २०१२ का सीएनएन हीरो नामित किया जाने के बाद बस्नेत कहा । पुष्पा बस्नेत ने एक तितली घर स्थापना की है जो कि आवासीय घर है जहां ज्यादातर पुराने बच्चों की शिक्षा, भोजन, चिकित्सा देखभाल और एक सामान्य जीवन जीने का मौका प्राप्त होता है ।
पुष्पा ने कहा, “इन बच्चों के लिए यह उचित नहीं है कि वे जेल में रहते हैं, क्योंकि वे कुछ भी गलत नहीं किया है,” सीएनएन ने बस्नेत को उद्धृत करते हुये कहा ।
इस अवार्ड के साथ पुष्पा को २ लाख ५० हजार अमेरिकी डॉलर भी प्रदान किया गया है । इसके साथ–साथ पुष्पा को उनके अभियान के लिए ३ लाख डॉलर भी प्रदान किया गया है । अवार्ड वितरण कार्यक्रम में भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि इस अवार्ड को मैं अपने बतन और बच्चों के लिए समर्पित करती हूँ । साथ ही उन्होंने यह भी बताया है– यह सम्पूर्ण पुरस्कार मैं अपने अभियान के लिए ही समर्पित करुगीं।

उन्होंने यह भी बताया और भी बहुत बच्चे जेल के अन्दर अपने माँ बाप के साथ कैद है । और मैं विश्वास दिलाती हूँ कि उन्हें जरुर बाहर निकालुंगी । पुष्पा बस्नेत ने अपना यह अभियान विगत ८ साल से चला रही है । बच्चों के शिक्षा और स्वास्थ्य प्रति समर्पित होने के कारण ही पुष्पाको यह अवार्ड मिला है ।
विश्व भर मे समाजिक अभियान को हौसला बढ़ाते हुए सीएनएन ने ६ सालों से यह अवार्ड वितरण करते आ रहा है । दो साल पहले २०१० मे माइती नेपाल के संस्थापक अनुराधा कोइराला को भी यही उपाधी से नवाजा गया था । जीवन के असली हिरो तो यह लोग है, जो अपने बतन के सेवा में समर्पित रहते है ।

