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आस्था का केन्द्र अयोध्या : मुरली मनोहर तिवारी ‘सीपू’

हिमालिनी  अंक  नवंबर  2019 | अयोध्या हिन्दुओं के प्राचीन और ठ पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है । यह प्राचीन नगर रामायण काल से भी पुराना है । अयोध्या ने बहुत कुछ देखा और भोगा है । अयोध्या के बारे में कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारी आपके समक्ष है ।
किसने स्थापित की थी अयोध्या ?

सरयू नदी के तट पर बसे इस नगर की रामायण अनुसार विवस्वान (सूर्य) के पुत्र वैवस्वत मनु महाराज द्वारा स्थापना की गई थी । माथुरों के इतिहास के अनुसार वैवस्वत मनु लगभग टटठघ ईसा पूर्व हुए थे । ब्रह्माजी के पुत्र मरीचि से कश्यप का जन्म हुआ । कश्यप से विवस्वान और विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु थे । स्‍कंदपुराण के अनुसार अयोध्‍या भगवान विष्‍णु के चक्र पर विराजमान है ।
अयोध्या पर किसने किया शास न
अयोध्या रघुवंशी राजाओं की कौशल जनपद की बहुत पुरानी राजधानी थी । वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु के वंशजों ने इस नगर पर राज किया था । इस वंश में राजा दशरथ टघवें शासक थे । इसी वंश के राजा भारत के बाद श्रीराम ने शासन किया था । उनके बाद कुश ने एक इस नगर का पुनर्निर्माण कराया था । कुश के बाद बाद सूर्यवंश की अगली द्धद्ध पीढियों तक इस पर रघुवंश का ही शासन रहा । फिर महाभारत काल में इसी वंश का बृहद्रथ, अभिमन्यु के हाथों महाभारत के युद्ध में मारा गया था । बृहद्रथ के कई काल बाद तक यह नगर मगध के मौर्यों से लेकर गुप्तों और कन्नौज के शासकों के अधीन रहा । अंत में यहां महमूद गजनी के भांजे सैयद सालार ने तुर्क शासन की स्थापना की और उसके बाद से ही अयोध्या के लिए लड़ाइयां शुरु हो गई । उसके बाद तैमूर, तैमूर के महमूद शाह और फिर बाबर ने इस नगर को लूटकर इसे ध्वास्त कर दिया था ।

अयोध्‍या का क्षेत्रफल कितना है ?
वाल्मीकि कृत रामायण के बालका०८ में उल्लेख मिलता है कि अयोध्या ज्ञद्द योजन(लम्बी और घ योजन चौड़ी थी । सातवीं सदी के चीनी यात्री ह्वेन सांग ने इसे ‘पिकोसिया’ संबोधित किया है । उसके अनुसार इसकी परिधि ज्ञटली (एक चीनी ‘ली’ बराबर है ज्ञरट मील के) थी । संभवतः उसने बौद्ध अनुयायियों के हिस्से को ही इस आयाम में सम्मिलित किया हो । आईन–ए–अकबरी के अनुसार इस नगर की लंबाई १४ड कोस तथा चौड़ाई घद्द कोस मानी गई है । नगर की लंबाई, चौड़ाई और सड़कों के बारे में महर्षि वाल्मीकि लिखते हैं– ‘यह महापुरी बारह योजन (ढट मील) चौड़ी थी । इस नगरी में सुंदर, लंबी और चौड़ी सड़कें थीं ।’ (ज्ञरछरठ)
अयोध्या के दर्शनीय स्थल कौन–कौन से हैं ?
अयोध्या घाटों और मंदिरों की प्रसिद्ध नगरी है । सरयू नदी यहां से होकर बहती है । सरयू नदी के किनारे १४ प्रमुख घाट हैं । इनमें गुप्त द्वार घाट, कैकेयी घाट, कौशल्या घाट, पापमोचन घाट, लक्ष्मण घाट आदि विशेष उल्लेखनीय हैं । अयोध्या में मुख्‍य रूप से राम जन्मभूमि के दर्शन किए जाते हैं, जहां रामलला विराजमान हैं । अयोध्या के बीचोंबीच हनुमान गढ़ी में रामभक्त हनुमानजी का विशाल मंदिर है । इसी क्षेत्र में दन्तधावन कुंड है जहां श्रीराम अपने दांतों की सफाई करते थे ।
अयोध्या का कनक भवन मंदिर भी देखने लायक है जहां राम और जानकी की सुंदर मुर्तियां रखी हैं । यहां राजा दशरथ का महल भी बहुत ही प्राचीन और विशाल है । अयोध्या में एक दिगंबर जैन मंदिर है जहां ऋषभदेवजी का जन्म हुआ था । इसके अलावा अयोध्या के मणि पर्वत पर बौद्ध स्तूपों के अवशेष हैं । अयोध्या से ज्ञट मील दूर नंदिग्राम हैं जहां रहकर भरत ने राज किया था । यहां पर भरतकुंड सरोवर और भरतजी का मंदिर है ।

इसके अलावा सीता की रसोई, चक्र हरजी विष्‍णु मंदिर, त्रेता के ठाकुर, राम की पौढ़ी, जनौरा, गुप्तारघाट, सूर्यकुंड, सोनखर, सरयू पार छपैया गांव, सरयू तट पर दशरथ तीर्थ, नागेश्वर मंदिर, दर्शनेश्वर मंदिर, मोती महल–फैजाबाद, गुलाब बाड़ी–फैजाबाद और तुलसी चौरा आदि स्थान भी देखने लायक हैं ।

कितने धर्मों का तीर्थ स्थल है अयोध्या ?
अयोध्या हिन्दू, जैन और बौद्ध धर्म का संयुक्त तीर्थ स्थल है । अयोध्या जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभनाथ की जन्मभूमि भी है । अयोध्या में आदिनाथ के अलावा अजितनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ और अनंतनाथ का भी जन्म हुआ था । ऐसा कहते हैं कि भगवान बुद्ध की प्रमुख उपासिका विशाखा ने बुद्ध के सानिध्य में अयोध्या में धम्म की दीक्षा ली थी । इसी के स्मृतिस्वरूप में विशाखा ने अयोध्या में मणि पर्वत के समीप बौद्ध विहार की स्थापना करवाई थी । यह भी कहते हैं कि बुद्ध के माहापरिनिर्वाण के बाद इसी विहार में बुद्ध के दांत रखे गए थे । दरअसल, यहां पर सातवीं शाताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था । उसके अनुसार यहां २० बौद्ध मंदिर थे तथा घ००ण् भिक्षु रहते थे और यहां हिंदुओं का एक प्रमुख और भव्य मंदिर था ।

राम के समय यह नगर अवध नाम की राजधानी से जाना जाता था । बौद्ध ग्रन्थों में इन नगरों के पहले अयोध्या और बाद में साकेत कहा जाने लगा । कालिदास ने उत्तरकोसल की राजधानी साकेत और अयोध्या दोनों ही का नामोल्लेख किया है ।

अयोध्या में राम मंदिर किसने बनाया था ?
महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या उजड़ सी हो गई, मगर श्रीराम जन्मभूमि का अस्तित्व फिर भी बना रहा । ऐसा कहा जाता है कि यहां जन्मभूम पर कुश ने एक मंदिर बनवाया था । इसके बाद यह उल्लेख मिलता है कि ईसा के लगभग १०ण् वर्ष पूर्व उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने यहां एक भव्य मंदिर के साथ ही कूप, सरोवर, महल आदि बनवाए । कहते हैं कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि पर काले रंग के कसौटी पत्थर वाले ८४ स्तंभों पर विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था । इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती थी । विक्रमादित्य के बाद के राजाओं ने समय–समय पर इस मंदिर की देख–रेख की । उन्हीं में से एक शुंग वंश के प्रथम शासक पुष्यमित्र शुंग ने भी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था । अनेक अभिलेखों से ज्ञात होता है कि गुप्तवंशीय चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय और तत्पश्चात काफी समय तक अयोध्या गुप्त साम्राज्य की राजधानी थी । गुप्तकालीन महाकवि कालिदास ने अयोध्या का रघुवंश में कई बार उल्लेख किया है । यहां पर ठवीं शताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था । उसके अनुसार यहां २० बौद्ध मंदिर थे तथा घ,००ण् भिक्षु रहते थे और यहां हिन्दुओं का एक प्रमुख और भव्य मंदिर भी था, जहां रोज हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते थे ।

किसने तोड़ा था अयोध्या में राम मंदिर ?
विभिन्न आक्रमणों के बाद भी सभी झंझावातों को झेलते हुए श्रीराम की जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर १४वीं शताब्दी तक बचा रहा । कहते हैं कि सिकंदर लोदी के शासनकाल के दौरान यहां भव्य मंदिर मौजूद था । १४वीं शताब्दी में हिन्दुस्तान पर मुगलों का अधिकार हो गया और उसके बाद ही राम जन्मभूमि एवं अयोध्या को नष्ट करने के लिए कई अभियान चलाए गए । अंततः १५द्दठ(द्दड में इस भव्य मंदिर को तोड़ दिया गया और उसकी जगह बाबरी ढांचा खड़ा किया गया । कहते हैं कि मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के सेनापति मीर बकी ने बिहार अभियान के समय अयोध्या में श्रीराम के जन्मस्थान पर स्थित प्राचीन और भव्य मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद बनवाई थी, जो १९९२ तक विद्यमान रही ।
राम जन्मभूमि विवाद कब से हैं ?
कुछ लोग मानते हैं कि यह विवाद १८१३ का नहीं है जब पहली बार हिन्दू संगठनों ने दावा किया कि यह भूमि हमारी है । यह विवाद तब का भी नहीं है जब १८५३ में इस स्थान के आसपास पहली बार सांप्रदायिक दंगे हुए । यह विवाद तब का भी नहीं है जब १८५९ में अंग्रेजी प्रशासन ने विवादित जगह के आसपास बाड़ लगा दी और मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की अनुमति दी गई थी । यह विवाद तब का भी नहीं है जब फरवरी ज्ञ८८छ में महंत रघुबर दास ने फैजाबाद के उप(जज के सामने याचिका दायर कर मंदिर बनाने की इजाजत मांगी, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली ।
कुछ लोग मानते हैं कि यह विवाद १९४९ का भी नहीं है जबकि बाबरी ढांचे के गुम्बद तले कुछ लोगों ने मूर्ति स्थापित कर दी थी । यह विवाद तब का (१९९२) का भी नहीं है जबकि भारी भीड़ ने विवादित ढांचा ध्वस्त कर दिया था । वस्तुतः यह विवाद १५द्दड ईस्वी का है, जब एक मंदिर को तोड़कर बाबरी ढांचे का निर्माण कराया गया था ।
स्रोतः विभिन्न पत्रपत्रिकाएं

अयोध्या विवाद पर एक नजर
– १८१३ः पहली बार हिन्दू संगठनों ने दावा किया कि १५द्दड में बाबर के सेनापति मीर बांकी ने मंदिर तोड़कर अयोध्या में मस्जिद बनाई ।
– १८५३ः विवाद की शुरुआत १८५३ में हुई जब इस स्थान के आसपास पहली बार सांप्रदायिक दंगे हुए ।
– १८५९ः अंग्रेजी प्रशासन ने विवादित जगह के आसपास बाड़ लगा दी और मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की अनुमति दी गई ।
– १८८५ः फरवरी १८८५ में महंत रघुबर दास ने फैजाबाद के उपजज के सामने याचिका दायर कर मंदिर बनाने की इजाजत मांगी, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली ।
– १९४९ः असली विवाद तब शुरू हुआ जब २३ दिसंबर १९४९ को भगवान राम और लक्ष्मण की मूर्तियां विवादित स्थल पर पाई गईं । उस समय हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों का आरोप था कि रात में चुपचाप किसी ने मूर्तियां रख दीं । उस समय सरकार ने इसे विवादित ढांचा मानकर ताला लगवा दिया ।
– १९५०ः ज्ञट जनवरी १९५० को गोपालसिंह विशारद नामक व्यक्ति ने फैजाबाद के सिविल जज के सामने याचिका दाखिल कर पूजा की इजाजत मांगी, जो कि उन्हें मिल गई, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल की ।
– १९८४ः मंदिर बनाने के लिए विश्व हिंदू परिषद ने एक कमेटी का गठन किया ।
– १९८६ः फैजाबाद के जज ने १ फरवरी १९८६ को जन्मस्थान का ताला खुलवाने और हिन्दुओं को पूजा करने का अधिकार देने का आदेश दिया । इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया गया । उस समय केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी और राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे ।
– १९९०ः भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या के लिए एक रथयात्रा शुरू की, लेकिन उन्हें बिहार में ही गिरफ्तार कर लिया गया ।
– १९९२ः यूपी के तत्कालीन मुख्‍यमंत्री कल्याण सिंह ने विवादित स्थान की सुरक्षा का हलफनामा दिया, लेकिन ट दिसंबर १९९२ को कथित रूप से भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने ढांचे को गिरा दिया । देशभर में हिंदू मुसलमानों के बीच दंगे भड़क गए, जिनमें करीब २००० लोग मारे गए ।
– २००३ः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने २००३ में झगड़े वाली जगह पर खुदाई करवाने के निर्देश दिए ताकि पता चल सके कि क्या वहां पर कोई राम मंदिर था ।
– २०१०ः घण् सितंबर २०१० को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर अयोध्या की २.७७ एकड़ विवादित भूमि को घ हिस्सों में बांट दिया । एक हिस्सा रामलला के पक्षकारों को मिला । दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को, जबकि तीसरा हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मिला ।
– २०११ः उच्चतम न्यायालय ने २०११ में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी ।
– २०१९ः इस बहुचर्चित मामले की सुप्रीम कोर्ट में ६ अगस्त से ज्ञट अक्टूबर २०१९ तक लगातार सुनवाई ।
– ९ नवम्बर २०१९ः सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला दिया । मंदिर निर्माण के लिए घ माह के भीतर केन्द्र सरकार से ट्रस्ट बनाने की बात कही । मुस्लिम पक्ष को छ एकड़ भूमि अलग स्थान पर देने के निर्देश दिए । यह ऐतिहासिक फैसला छ जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से किया ।

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