नहीं रहे नेपाल के वरिष्ठ पुरातत्वविद् तारा नन्द मिश्र । नेपाल के लिए एक अपुरणीय क्षति

नेपाल के वरिष्ठ पुरातत्वविद् श्री तारानन्द जी का दिनांक 4 जनवरी 2020 काे देहावसान हाे गया है । पुरातत्वविद् के साथ ही नेपाल की ऐतिहासिक वस्तुस्थिति, राजनीतिक इतिहास और संस्कृति में भी आप का महत्तवपूर्ण दखल रहा है । नेपाल की प्राचीनतम अवशेषों के खोज–अनुसंधान में आपका महत्वपूर्ण योगदान अविस्मरणीय है जिसका नेपाल हमेशा ऋणी रहेगा । विशेषतः कपिलवस्तु, लुम्बिनी, तिलौराकोट में स्थित बुद्धकालीन अवशेषों के खोज–अनुसंधान में आप ने उल्लेखनीय सहयोग किया है, जो पुरातत्व विभाग के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है । वीरगंज के स्थायी निवासी मिश्र जी वर्तमान में काठमांडू (चल्नाखेल) में रहते थे। आपका जन्मः सन् १९३९ जुलाई १५ में हुआ था । आप के पिता जी का नाम जीवनेश्वर मिश्र और माता जी का नाम गोसवन दाई है । इतिहास, संस्कृति, पर्यटन आदि क्षेत्र से जुड़े हुए महत्वपूर्ण चार राष्ट्रीय सम्मानों से आप को सम्मानित किया गया । नेपाल के ऐतिहासिक–स्थल और धर्म–संस्कृति के संबंध में आप के द्वारा लिखित ७ पुस्तकें प्रकाशित हैं । इन्हीं विषयों पर दर्जनों लेख भी विभिन्न पत्र–पत्रिकाओं में प्रकाशित है । संक्षेप में कहें तो नेपाल के पुरातत्व के क्षेत्र में आप का नाम और योगदान अतुलनीय है । आपका याेगदान भुलाया नहीं जा सकता ।


