Tue. Jan 21st, 2020

काठमांडू में त्रि–दिवसीय अन्तर्राष्ट्रिय हिन्दी सम्मेलन

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हिन्दी भाषा की जननी भारत है, विश्व रंगमंच पर हिन्दी को स्थापित करने के लिए भारत को ही कुछ करना चाहिएः अध्यक्ष गुप्ता

लिलानाथ गौतम/काठमांडू, ११ जनवरी । काठमांडू में त्रि–दिवसीय विश्व हिन्दी सम्मेलन शुरु हुआ है । विश्व हिन्दी दिवस और हिन्दी मंच नेपाल की स्थापना दिवस के अवसर पर हिन्दी मंच नेपाल की अग्रसरता में यह सम्मेलन आयोजित है । काठमांडू नयां बानेश्वर स्थित होटल एभरेष्ट में १० से १२ जनवरी के लिए तय विश्व हिन्दी सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए हिन्दी भाषा–साहित्य प्रेमी अपना–अपना कार्यपत्र तथा रचना वाचन कर रहे हैं ।


कार्यक्रम के प्रथम दिन शुक्रबार हिन्दी–प्रेमी ८ साहित्यकार तथा लेखकों ने हिन्दी भाषा–साहित्य और इसकी विकाशक्रम और आवश्यक भावी रणनीति के बारे में अपना–अपना कार्यपत्र प्रस्तुत किया । नेपाल स्थिति भारतीय राजदूतावास के अतासे एवम् लेखक रघुवीर शर्मा की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल विश्व हिन्दी सम्मेलन के अध्यक्ष डा. दाउजी गुप्ता ने किया । कार्यक्रम में प्रथम कार्यपत्र प्रस्तुत करते हुए भारतीय दूतावास के अतासे रघुवीर शर्मा ने गत साल मौरिसस में सम्पन्न विश्व हिन्दी सम्मेलन संंबंधी बिस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत किया, जहां हिन्दी भाषा–साहित्य की विकास के लिए आवश्यक सुझाव भी समेटा गया था ।


इसीतरह हिन्दी मंच नेपाल के अध्यक्ष मंगल प्रसाद गुप्ता ने अपना कार्यपत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि नेपाल में कूल १२९ भाषाएं बोली जाती है, उसमें नेपाली मातृभाषा बोलनेवालों की संख्या ४४.५ प्रतिशत है, लेकिन ९५ प्रतिशत जनता हिन्दी भाषा समझते हैं । गुप्ता जी ने कहा कि नेपाल के कूल ७ प्रदेशों में प्रदेश नं. २ ही ऐसा प्रदेश है, जहां हिन्दी में बोलनेवाले जनता ही नहीं, जनप्रतिनिधि भी अधिक है । उन्होंने कहा– ‘प्रदेश नं. २ में नेपाली, मैथिली, भोजपुरी, अवधि जैसी भाषाएं बोली जाती है, लेकिन यहां के लिए हिन्दी ही संपर्क भाषा है । उनके अनुसार जारी विश्व हिन्दी सम्मेलन के लिए प्रदेश नं. २ से आर्थिक सहयोग भी प्राप्त हुआ है ।
गुप्ता जी ने दावा किया है कि ३०–४० साल से पहले काठमांडू उपत्यका के बाहर रहनेवाले लोग नेपाली भाषा भी नहीं समझते थे, उन लोगों के साथ इसारा में बात करना पड़ता था । उनका मानना है कि सरकारी नीति के कारण आज अधिकांश लोग नेपाली भाषा बोलते हैं । उन्होंने कहा है कि हिन्दी भाषा को विश्वव्यापी बनाने के लिए भी हिन्दी–प्रेमियों को नीतिगत रुप में काम करना होगा ।


गुप्ता जी ने यह भी कहा है कि अगर कोई अंग्रेजी नहीं जानते हैं, तो उसके लिए हिन्दी भाषा ही उसको को अन्तर्राष्ट्रीयकरण कर सकती हैं । उन्होंने कहा है कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्रसंघ में मान्यता दिलाने के लिए अब सभी हिन्दी प्रेमियों को प्रयास करना होगा । गुप्ता जी ने कहा है कि हिन्दी सिर्फ एसिया के लिए ही नहीं, युरोप के कई देशों के लिए भी संपर्क भाषा बन सकती है । उन्होंने अंत में कहा– ‘हिन्दी भाषा की जननी भारत है, इसीलिए विश्व रंगमंच पर हिन्दी को स्थापित करने के लिए भारत को ही नीतिगत रुप में कुछ करना होगा और नेतृत्वदायी भूमिका निर्वाह करनी होगी ।’
इसीतरह पत्रकार तथा लेखक एवं हिन्दी अभियान्ता प्रविण गुप्ता ने अपना कार्यपत्र प्रस्तुत करते हुए कहा है कि जब तक हिन्दी भाषा को रोजिरोटी के साथ नहीं जोड़ी जाती, तब तक हिन्दी की गुणात्मक विकास सम्भव नहीं है । उनका यह भी मानना है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ में भी हिन्दी को सम्पर्क भाषा के रुप में विकसित करने की जरुरत है । समाचारपत्र, किताव, ऑनलाइन तथा यूट्युव चैनल आदि माध्यमों से हिन्दी की ती प्रचार–प्रसार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा है कि ऐसा कुछ करें, जिससे हिन्दी भाषियों के अलवा अन्य भाषा–भाषियों के लिए हिन्दी सम्पर्क भाषा बन सके ।


कार्यक्रम में पत्रकार तथा लेखक प्रकाश प्रसाद उपाध्याय ने हिन्दी की विकासक्रम और नेपाल में हिन्दी की स्थिति संबंध में अपना कार्यपत्र प्रस्तुत किया । कार्यपत्र प्रस्तुतकर्ता निलम गुप्ता को मानना है कि हिन्दी सरल और सहज भाषा है, चीनी भाषा के तरह जटिल नहीं है, इसीलिए अंग्रेजी के बाद हिन्दी ही विश्व में संपर्क भाषा बन सकती है । इसके साथ–साथ निलम जी ने हिन्दी में अन्य भाषाओं की मिश्रण पर चिन्ता व्यक्त की । उनका मानना है कि हिन्दी में अन्य भाषाओं की मिश्रण यहां भाषागत प्रदूषण बढ़ती जा रही है, जिससे हिन्दी की मौलिकता नष्ट होती जा रही है, जो चिन्ता का विषय है ।


इसीतरह सरोज गुप्ता, सुदेशराम प्रभु जैसे वक्ताओं ने भी अपना–अपना कार्यपत्र एंव प्रस्तुति प्रस्तुत करते हुए हिन्दी भाषा–साहित्य के बारे में चर्चा किए । उन लोगों को मानना है कि हिन्दी भाषा को टेक्नोलॉजी में जोड़कर विकसित करने की जरुरत है । सरोज गुप्ता जी ने कहा कि हिन्दी भाषा को संरक्षण करना ही हमारा धर्म और कर्म है । उनका मानना है कि इसकी दीर्घायू के लिए नयी पिढ़ी को भी इससे जोड़कर रखना आवश्यक है, ताकि आज नयी पीढ़ी हिन्दी भाषा–साहित्य से बाहर होते जा रहे हैं । अध्यक्षीय प्रस्तुति देते हुए डा. दाउजी गुप्ता जी ने दावा किया है कि प्राविधिक रुप से अब हिन्दी ही अन्तरीक्ष एवं कम्प्युटर का भाषा बनने जा रहा है, जो हिन्दी प्रेमियों के लिए खुशी की खबर भी है ।
नेपाल हिन्दी मंच के उपाध्यक्ष दिग्विजयनाथ मिश्र के अनुसार कार्यक्रम की औपचारिक उद्घाटन आज (११ जनवरी) के दिन होने जा रहा है । मिश्र जी ने कहा है कि आज भी हिन्दी भाषा–साहित्य के संबंध में विभिन्न प्रस्तुति एवं विचार–विमर्श जारी रहेगी । कार्यक्रम के अंतिम दिन विदेश से आए अतिथियों को काठमांडू दर्शन कराने की कार्यसूची है ।

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