Fri. Feb 28th, 2020

नेपाल भारत मैत्री समाज जलेश्वर द्वारा भारतका ७१ वाँ गणतंत्र दिवस समारोह

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आज मिति 2076 माघ 12 गत्ते (2020-1-26) को जलेश्वर में भारत के ७१वाँ गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में ‘नेपाल भारत मैत्री समाज’, जलेश्वर शाखा द्वारा बड़ी हार्दिकता और भव्यता के साथ कार्यक्रम किया गया। इस विशेष प्रवचन कार्यक्रम की अध्यक्षता नेपाल भारत मैत्री समाज जलेश्वर शाखा के अध्यक्ष श्री गोपाल प्रसाद शाह जी के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व डीन श्री नरेन्द्र चौधरी जी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण और युवाओं में उपलब्धि मूलक शिक्षा तथा संस्कार जागृत कराने का प्रयास किया जाने पर जोर दिया। इसी प्रकार वरिष्ठ अधिवक्ता गुनबहादुर राउत जी ने नेपाल भारत का सम्बन्ध जनस्तर में सुमधुर था है और रहेगा तथा सरकारी तौर पर भी इसकी प्रगाढ़ता के लिए प्रयास किया जाने पर जोर दिया। वक्ता के रुपमे मैं अजय कुमार झा ने सन 2002 में काठमांडू स्थित भारतीय राजदुतावास के द्वारा गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य पर जैन भवन में हुए कार्यक्रम में जो हम अखंड नामक कविता वाचन किया था, वही कविता को आज फिर यहाँ वाचन किया। साथहि भिथामोड़ के भारतीय अधिकारी तथा मित्रों को भी बधाई देने की बात चालाया। एसे ही अधिवक्ता ज्ञानेंद्र लाल कर्ण जी ने सम+बिधान = संविधान अर्थात समता मूलक कानून का निर्माण और व्यवस्थापन में ही सविधान की गरिमा अक्षुन्न रह सकती है। नेपाल में दो दो बार संविधान सभा का चुनाव किया गया परन्तु समस्या और षडयंत्र जहाँ का तही रहा। मधेसी आज भी अधिकार बिहीन अवस्था में दलित होकर जीने को बाध्य है। अतः नेपाल का संवैधानिक अवस्था आज भी दयनीय है, सोचनीय है। इसी प्रकार समाज सेवी प्रिय मित्र श्री श्याम साह जी ने हम नेपाली और भारतीयों के बीच का सम्बन्ध न कभी कमजोर हुआ है न अभी कमजोर होगा। हम दिल से ही जुड़े हुए हैं। अपनी मंतव्य के क्रममे वरिष्ठ नागरिक महोत्तरी के अध्यक्ष,पूर्व प्रशासक तथा साहित्यकार श्री महेश्वर राय जी ने भारत की विशालता और नेपाल के क्षुद्रता के बीच तुलना नहीं किया जा सकता, परन्तु दोनों राष्ट्रों के बीच की पौराणिक, धार्मिक और सांस्कृतिक एकता, समन्वय तथा सामंजस्य संसार के लिए प्रेरणा का आधार है। इश्लामिक कट्टरता और सामाजिक अराजकता विश्वके मानवता के लिए खतरा का घंटी होने के कारण इसकी संज्ञान भारत को गंभीरता पूर्वक लेना चाहिए। खासकर इश्लामिक कट्टरता से आतंकित विश्व समुदाय से सिख लेने की बात अधिकाँश वक्ताओं के द्वारा किया गया। भारत को खासकर हम सबके प्रति विशेष ध्यानाकर्षण बना रहे यही हम विशाल भारत से अपेक्षा रखते हैं। अपनी मंतव्य के क्रममे पूर्व शिक्षक श्री राज किशोर झा जी ने भारत वाशियों को विशेष हार्दिक शुभकामना अर्पण करते हुए अनादि काल से चला आ रहा नेपाल भारत के राजनीतिक, भैगोलिक, और सांस्कृतिक सुमधुर सम्बन्ध के सदैव बना रहे, साथहि (जम्बू द्वीपे भारत खंडे……) के दिव्य उदघोष के साथ विश्व में हमारा सम्बन्ध अदभुत और दिव्य है, हमने कभी एक दुसरे पर आक्रमण नहीं किया, सदा भारत में हमें भरपूर सहयोग किया, नेपाल के राज को भारत ने ही राणाओं से अभय दान देने के साथ निष्कंटक राज्य करने का आशीष दिया था। हम नेपाली खाते है नेपाल में और हाथ सुखाते है भारत में, भारत में जहाँ जाएँ वहाँ के लोग हमें हार्दिक स्वागत में कभी पीछे नहीं पड़ते इसप्रकार का हमारा सम्बन्ध एक गौरब का सम्बन्ध है। धर्मनिरपेक्षता हम नेपालियों ने नहीं चाहा था, लेकिन विदेशी षडयंत्र के कारण हम हिन्दुओं पर धर्मनिरपेक्षता जबरदस्ती लादा गया, जिसका हम घोर विरोध करते हैं। अति सर्वत्र वर्जयते! इस महावाक्य के साथ वर्तमान भारत का ज्वलंत अफवाह युक्त  नागरिकता कानून का बिरोध करने बालों को साबधान भी कराया गया। स्वतंत्रता का सम्मान करना हम सबका परम कर्तव्य है। गीता के (कर्मन्यवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन! कर्मयोग और गोश्वामी जी के कर्म प्रधान विश्व करी राखा) श्लोक को स्मरण करते हुए वाणी को विश्राम दिए। उपाध्क्षीय भाषण के क्रममे श्री राजेश्वर ठाकुर जी ने गणतांत्रिक नेपाली संविधान में समावेशी और सम्मानित स्थान हमारा भी हो, देस एक समानित राह पे चले, एक राजा के बदले सैकड़ो राजा आज देखने को मिल रहा है, जो दुखद अवस्था है। अंत में अध्यक्षीय मंतव्य के क्रममे श्री गोपाल प्रसाद साह जी ने इस नेपाल भारत मैत्री समाज के द्वारा आजतक किए गए कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए बताए कि 2075 साल के एस इ इ परीक्षा में महोत्तरी जिला के सर्वोत्कृष्ट एक लड़का और एक लड़की को रु 31000 एकतीस हजार के दर से सन्मान पत्र के साथ प्रदान किया गया। आगे अनेक इस प्रकार के अनेको सृजनात्मक कार्य करने की योजना के बारेमे उन्होंने बताया। इस संस्था को नेपाल और भारत के बीच एक मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने हेतु मैत्रीपुल के रुपमे सक्रीय रखने का वादा किया। इस प्रकार इतनी ठंढ के वावजूद भी करिव साम को छ बजे कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।

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