Sun. Jul 12th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

कर न जाए कहीं- -कोरोना कुर् र्र् र्र् : लक्ष्मण नेवटिया

Laxman Nevatiya
 

कर न जाए कहीं-
-कोरोना कुर् र्र् र्र्

बनाया घर आलिशान
कर होड़ा-होड़
मेहनत जोड-तोड
पैसे जोड़-जोड़ ।

जिन्दगी सारी खपादी
जिस घर को बनाने सजाने!
आज दौड़ता है क्यों?
वही घर काटने खाने?
बहुत गए थे उलझ
अब तो सुलझो!

मांगते थे मिन्नते जिन
पारिवारिक जनोंको पाने,
आज वे ही तलाश रहे हैं क्यों?
तुमसे दूर रहने के बहाने।
बडी अजब है स्थिति
पहले तुम थे,समय नहीं था
अब समय है तो, तुम नहीं।
हो तो निपट बुद्धू-
समझते थे स्वयं को सयाने।

यह भी पढें   मंत्रिपरिषद् बैठक के ८ निर्णय सार्वजनिक

कुछ दिन चुप रहो
किसी से न उलझो,
डर हर पल सताता है
कब उड़ जाएगी
सांस की चिड़िया फुर् र्र् र्र्

कोरोना कर न दे अचानक कान में कुर् र्र् र्र् !!

समझते थे खुदको क्या
ओर हो क्या तुम ?
एक अदृश्य भाइरस ने दिखादी औकात तुमको
भोले न बनो
सच्चाई जीवन की
अब तो समझो।

Laxman Nevatiya
लक्ष्मण नेवटिया
बिराटनगर

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *