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दीपप्रज्ज्वलन पर जानिए क्या कहता है विज्ञान ?

 

 

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी ने ‘पांच अप्रैल को रात्रि नौ बजे नौ मिनट के लिए’ घरों के बाहर दीयों का प्रकाश फैलाने का आह्वान किया है।इससे पहले प्रधानमंत्री माेदी के एक आह्वान पर भारत की 130 करोड़ जनता ने,  घंटी-घंटा-थाली-ताली-शंख  बजा कर  अजेय इच्छाशक्ति का वह महानाद विश्वभर में गुंजायमान हुआ। इसी तरह अब भारतीय जनता दीप जलाने वाली है । क्या सचमुच दीप जलाने से किटाणु मरते हैं ? शास्त्राें में कहा गया है कि

दीपं ज्योति परम् ज्योति, दीप ज्योतिर्जनार्दन:। दीपो हरतु मे पापम् , दीपज्योतिर्नमोस्तुते।।

शुभम् करोति कल्याणम् आरोग्यम् धन सम्पदा शत्रुबुद्धि विनाशाय दीपज्योति नमोस्तुते।।

अर्थात् दीप शुभ और मंगल का कारक है। कल्याण का कारक है। दीपक जलाने से रोग मुक्त होते हैं, वातावरण स्वच्छ होता है, हवा हल्की होती है। इस तथ्य काे भारत के श्रेष्ठ विज्ञान संस्थानों के केमिकल इंजीनियर भी मान रहे हैं। इनका कहना है कि सरसों के तेल में मैग्नीशियम, ट्राइग्लिसराइड और एलाइल आइसो थायोसाइनेट होता है।

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एलाइल जलने पर कीट-पतंगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। वे लौ की चपेट में आकर जल जाते हैं। तेल में मौजूद मैग्नीशियम हवा में मौजूद सल्फर और कार्बन के आक्साइड के साथ क्रिया कर सल्फेट और कार्बोनेट बना लेता है। यह विषैले भारी तत्व इस तरह जमीन पर आ गिरते हैं। इसीलिए जले दीपक के आसपास हल्की सफेद राख सी दिखती है। भारी तत्व जमीन पर आने से हवा हल्की हो जाती है और सांस लेना आसान हो जाता है।

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यही घी का दीपक जलाने पर होता है। देसी गाय के दूध से निर्मित घी का दीपक रोगाणुओं को मारता है। डॉक्टरों का मानना है कि वातावरण साफ और खुशनुमा रहने से इम्यून सिस्टम बेहतर रहता है और व्यक्ति निरोगी रहता है। अगर दिवाली की बात करें तो नरक चतुर्दशी के दिन कूड़े के ढेर और नाली के मुहाने पर और दिवाली पर घर-बाहर हर जगह दीपक रखा जाता है।

रसायनविज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता

यह तो नहीं कहूंगा कि दीये जलाने से कोरोना वायरस नष्ट होंगे, लेकिन यह जरूर है कि सरसों के तेल में ऐसे तत्व होते हैं, जिनके ज्वलन और वातावरण में मौजूद रसायनों से प्रतिक्रिया स्वरूप विषैले तत्वों, कीट-पतंगे, रोगाणु आदि की मारने की शक्ति होती है। यह दिवाली के पीछे का वैज्ञानिक कारण भी हो सकता है। रसायनविज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है।

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-प्रो. अनिमांगशू घटक, विभागाध्यक्ष केमिकल इंजीनियरिंग विभाग, आइआइटी कानपुर

दीपक जलाने से हवा हल्की और साफ होगी

दीपक जलाने से नमी भी बढ़ती है। अधिक संख्या में जलाने पर वातावरण का तापमान बढ़ता है। दोनों स्थितियां कोरोना से लड़ने के लिए मुफीद हैं। चूंकि इस बार मार्च-अप्रैल का औसत तापमान कमोबेश अक्टूबर जैसा ही है, जैसा कि दिवाली के समय रहता है, इसलिए हवा भारी है। दीपक जलाने से वह हल्की और साफ होगी।

-प्रो. आरके त्रिवेदी, सेनि विभागाध्यक्ष, ऑयल एंड पेंट टेक्नालॉजी, एचबीटीयू कानपुर

स्राेत :  दैनिक जागरण

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