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चीन द्वारा फिर से एवरेस्ट की उँचाई मापन का कार्य

 

पेइचिंग


दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्‍ट की ऊंचाई को लेकर अभी विवाद बना हुआ है। इस विवाद के खात्‍मे के लिए चीन ने 30 सदस्‍यीय सर्वेक्षण दल को रवाना किया है। यह चीनी दल माउंट चोमोलुंगमा बेस कैंप से एवरेस्‍ट पर चढ़ाई के लिए रवाना हो गया है। एवरेस्‍ट के शिखर पर पहुंचकर यह दल ग्‍लोबल सैटलाइट सिस्‍टम की मदद से विश्‍व की इस सबसे ऊंची चोटी की माप करेगा।

एवरेस्‍ट पर चढ़ाई कर रहे इस दल में पेशेवर पर्वतारोही और चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय सर्वेक्षक शामिल हैं। यह दल मौसम के ठीक रहने तक सही समय पर चोटी पर पहुंचने की कोशिश करेगा। यह सर्वे दल ग्‍लोबल नैव‍िगेशन सैटलाइट और ग्रैवीमीटर की मदद से एवरेस्‍ट की ऊंचाई मापेगा। यह सर्वे दल अप्रैल महीने की शुरुआत में चोमोलुंगमा बेस कैंप पहुंच गया था।

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इस दल को पहाड़ पर चढ़ने और ऊंचाई वाले इलाके में सर्वेक्षण करने की ट्रेनिंग दी गई है। वर्ष 1949 में अपनी स्‍थापना के बाद चीन के सर्वेक्षण दल ने अब तक 6 बार एवरेस्‍ट पर चढ़ाई की है और ऊंचाई नापी है। चीन ने वर्ष 1975 और 2005 में एवरेस्‍ट की ऊंचाई जारी की थी। वर्ष 1975 में एवरेस्‍ट की ऊंचाई 8,848.13 मीटर और वर्ष 2005 में 8,844.43 मीटर थी।

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माउंट एवरेस्ट के शिखर पर ‘पहुंचा’ 5जी सिग्नल
चीन की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पर्वतारोही अब इसके शिखर पर पहुंचकर भी तेज गति वाली 5जी दूरसंचार सेवा का इस्तेमाल कर सकेंगे। चीन के सरकारी मीडिया ने पिछले दिनों खबर दी थी कि दूरवर्ती हिमालयी क्षेत्र में दुनिया के सबसे अधिक ऊंचाई वाले बेस स्टेशन ने परिचालन शुरू कर दिया है। चीन की दिग्गज सरकारी दूरसंचार कंपनी चाइना मोबाइल के अनुसार यह बेस स्टेशन 6,500 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है। यह दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के आधुनिक आधार शिविर (बेस कैंप) में स्थित है।

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