Mon. Jun 1st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

इरादा हो अटल तो आसमाँ है मुट्ठी में, कहानी सारिका जैन की : मुरलीमनोहर तिवारी

सारिका जैन
 

कोई भी सफलता आसान नहीं होती लेकिन मन में विश्वास और लक्ष्य के प्रति सर्मपण हो तो हर परीक्षा आसान बन जाती है । भारत के उड़ीसा राज्य के कांताबाजी शहर की रहने वाली आईआरएस (इंडियन रेवेन्यू सर्विसेस) सारिका जैन की कहानी प्रेरणादायक है । आज वो मुंबई में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं ।

सारिका ५० प्रतिशत निःशक्त हैं । १९८५ में सारिका जब वे दो साल की थीं तब दाहिने पैर में पोलियो हो गया, माता पिता कम जागरूक थे । वे भी नहीं समझ पाए, ऐसे में गलत इलाज ने कौमा की स्थिति पैदा कर दी । डेढ़ साल तक कौमा में रहने के बाद चार साल की उम्र में सारिका ने चलना शुरू किया । इस बीमारी के कारण परिवार पर भी संकट आ गया लेकिन माता पिता ने हिम्मत नहीं हारी । सारिका बचपन में डाक्टर बनना चाहती थी लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी ।
विकलांगता की वजह से स्कूल में एडमिशन नहीं मिला । मगर वे पढ़ना चाहती थी । जिद के कारण पांच साल की उम्र में सरस्वती शिशु मंदिर में एडमिशन हुआ । एडमिशन मिला भी तो स्कूल के बच्चों ने चिढ़ाना शुरू कर दिया । यहां तक की पत्थर भी मारे लेकिन सारिका ने हौंसला नहीं खोया । वहां १०वीं तक पढ़ाई की ।

यह भी पढें   लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती पर भारत विकास परिषद ने किया नमन


घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद भी सारिका पढ़ाई में जुटी रही, सारिका को मालूम था कि उसके दुखों को दूर करने की एक मात्र चाबी शिक्षा ही है । बी.का‘म करने के बाद आईएएस बनने का सपना देखा । ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी होने के बाद घरवालों को शादी की चिंता सताने लगी । इसके बाद चार साल तक घर पर ही रही । सारिका को कोई रास्ता नहीं दिख रहा था क्योंकि पोलियो ग्रस्त लड़की से शादी कौन करेगा यह सवाल परिवार और खुद के लिए बहुत बड़ा था ।

यह भी पढें   सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ब्रिटेन (इंग्लैंड) से भी बातचीत कर रही है : प्रधानमंत्री बालेन्द्र

विकलांगता की वजह से मोहल्ले वाले कहते थे आईएएस बनना इतना आसान नहीं है और तुम तो बन ही नहीं पाओगी । इस सब की परवाह किए बगैर सारिका ने सीए की पढ़ाई शुरू की । सारिका ने इच्छा शक्ति मजबूत रखकर माता(पिता से कहा “मैं इस माहौल में तैयारी नहीं कर पाऊंगी, दिल्ली में तैयारी करनी होगी” । पिता (साधुराम जैन) और मां (संतोष देवी) ने साथ दिया ।
२०१२ में दिल्ली में तैयारी शुरू की । जिसमें सारिका ने सीए में टॉप किया । सीए बनने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू किया । वर्ष २०१३ में एक साल की कड़ी मेहनत से ५२७ वीं रैंक हासिल किया । इसके बाद लोगों का नजरिया ही बदल गया । सारिका का कहना है कि लड़कियों को कभी अपने आप को कमजोर नहीं समझना चाहिए अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहते हुए आगे बढ़ने से सफलता जरूर मिलती है । २०१३ में पहले प्रयास में आईआरएस में चुनी गईं ।

यह भी पढें   पुराने राजनीतिक दलों को समाप्त करने की साजिश जारी : ओली

आईआरएस बनने के बाद अब वे लड़कियों के लिए गाइडेंस प्रोग्राम चलाती हैं । इसमें आईएएस को लेकर लड़कियों का डर दूर कर रही हैं । सारिका ने बताया की “आईएएस बनना हर किसी का सपना रहता है लेकिन रिजल्ट के डर से निगेटिविटी रहती है । मुझे भी पहले यही डर था लेकिन पॉजिटिव नहीं सोचती तो अभी भी कस्बे में ही रहती” । सारिका की मानें तो हर लड़की को अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है लेकिन इरादें बड़े और उन्हें पूरा करने का जब जुनून हो तो अग्निपरीक्षा भी छोटी लगने लगती है ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *