Fri. Oct 9th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

भारत और जापान के बीच हुए रक्षा समझौते का असर चीन पर

 

 

इसे क्लिक करें

सीमा विवाद को लेकर एलएसी पर चल रहे टकराव के बीच भारत ने हिंद महासागर में भी चीन की घेराबंदी तेज कर दी है। इस सिलसिले में भारत और जापान के बीच बुधवार को हुए ऐतिहासिक रक्षा समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है। इसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के सशस्त्र बलों को आपूर्ति एवं सेवाओं का आदान-प्रदान करेंगे। समझौते के बाद  भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जापानी समकक्षी से फोन पर बातचीत भी की। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार जापान के साथ सशस्त्र बलों को परस्पर सेवाएं मुहैया कराने को लेकर इस प्रकार का समझौता पहली बार हुआ है। हालांकि, दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध पहले से हैं, लेकिन चीन से मौजूदा टकराव के बीच हुए इस समझौते को हिंद महासागर में चीन की घेराबंदी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस समझौते से हिंद महासागर में भारत को रणनीतिक बढ़त मिलने की संभावना व्यक्त की गई है।

यह भी पढें   विश्वप्रकाश शर्मा का संकल्प : चुनाव जीतने से पहले नागरिकों का विश्वास जीतने की राजनीति

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने हालांकि समझौते के बिंदुओं का ज्यादा ब्यौरा नहीं दिया, लेकिन इस समझौते के बाद भारतीय सेनाओं को जापानी सेनाएं अपने अड्डों पर जरूरी सामग्री की आपूर्ति कर सकेंगी। साथ ही भारतीय सेनाओं के रक्षा साजो सामान की सर्विसिंग भी देंगी। यह सुविधा भारतीय सैन्य अड्डों पर जापानी सेनाओं को भी मिलेंगी। युद्ध की स्थिति में ये सेवाएं बेहद अहम मानी जाती हैं। इस प्रकार के समझौते भारत ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ओमान एवं सिंगापुर से भी कर रखे हैं।
गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच बीते चार महीने से पूर्वी लद्दाख में सीम विवाद को लेकर टकराव जारी है। सीमा पर तनाव कम करने और शांति बहाल करने के लिए कई स्तर की वार्ता हो चुकी है, मगर ड्रैगन की सेना अब भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com