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कोरोना वायरस के चपेट में अगर बच्चे आते हैं, तो जानिए क्या करें क्या ना करें

 

आशंका जताई जा रही है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भारतीय  स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में संक्रमण के दौरान होम आइसोलेशन में बच्चों की देखभाल को लेकर गाइडलाइन जारी की है। जानिए, कोरोना के हल्के, मध्यम और गंभीर लक्षण वाले मरीजों की देखभाल कैसे करें…

हल्के लक्षण वाले बच्चों के लिए

बुखार के लिए: पैरासिटामॉल 10-15 एमजी/किलो/डोज, हर 4-6 घंटे में दे सकते हैं।
कफ के लिए: बड़े व किशोर बच्चों को गले में आराम के लिए गर्म पानी से गरारे की सलाह दी गई है।
खानपान: शरीर में पानी कमी पूरी करने और पोषण के लिए तरल पदार्थों को पर्याप्त मात्रा में दें।
एंटीबायोटिक: कोई नहीं

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ये दवाएं न दें:

टोसिलिजुमैब, इंटरफेरोन बी1ए, प्लाज्मा या डेक्सामेथासोन समेत हाइड्रॉक्साक्लोरोक्विन, फेविपिरविर, आइवरमेक्टिन, लोपिनविर/रिटोनविर, रेमडेसिविर, यूमिफेनोविर, इम्यूनोमॉड्यूलेटर्स की कोई जरूरत नहीं।
ये ध्यान रखें: दिन में 2-3 बार पल्स चेक करें, सीने में समस्या, शरीर में नीलापन, ऑक्सीजन सेचुरेशन घटे, ठंड लगे तो डॉक्टर को बताएं।

मध्यम लक्षण वाले बच्चों के लिए

पहले से किसी रोग से ग्रस्त न होने पर किसी भी लैब टेस्ट की आवश्यकता नहीं। कोविड हेल्थ सेंटर या स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में भर्ती होना पड़ सकता है। शरीर में लिक्विड और इलेक्ट्रोलाइट का कमी न होने दें।
बुखार के लिए पैरासिटामॉल 10-15 एमजी/किलो/डोज। हर 4-6 घंटे में दे सकते हैं। अगर बैक्टीरियल इंफेक्शन हो या इसका संदेह तो एमोक्सिलिन दे सकते है।
94 प्रतिशत से कम ऑक्सीजन सेचुरेशन होने पर ऑक्सीजन की आवश्यकता हो सकती है।

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गंभीर लक्षण वाले बच्चों के लिए

90 प्रतिशत से कम ऑक्सीजन लेवल होने वाले बच्चों को गंभीर कोविड 19 मरीज के रूप में चिह्नित किया जाएगा।
इनमें गंभीर निमोनिया हो सकता है। एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सेप्टिक शॉक, मल्टी ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम या साइनोसिस के साथ निमोनिया।
इन बच्चों को सीने में तकलीफ, सुस्ती, अधिक नींद की दिक्कत हो सकती है।
ऐसे बच्चों को कोविड अस्पताल, या स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में भर्ती किया जाना चाहिए।
थ्रांबोसिस, हीमोफैगोसाइटिस, हिम्फोहिस्टियोसाइटिस और अंगों के विफल होने पर एचडीयू/आईसीयू की आवश्यकता पड़ सकती है।

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जांच: कम्पलीट ब्लड काउंट, किडनी व लीवर फंक्शन की जांच, छाती का एक्सरे।
इलाज: इंट्रावेनस फ्लूइड थैरेपी
कॉर्टिकोस्टेराइडस: डेक्सामेथासोन 0.15 एमजी डोज दिन में दो बार।
एंटी वायरल एजेंट्स: लक्षण के तीन दिन के भीतर रेमडेसिविर दिया जाना चाहिए।
किस उम्र में कितना होना चाहिए पल्स रेट

2 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए पल्स रेट : 60/मिनट
2-12 महीने के बच्चों के लिए पल्स रेट : 50/मिनट
1-5 साल के बच्चों के लिए पल्स रेट: 40/मिनट
5 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए पल्स रेट: 30/मिनट
इन सभी आयु समूहों में ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल 90 से अधिक होना चाहिए।

डाक्टर से सलाह अवश्य लें ।

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