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राष्ट्र-निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण : पारिशा शर्मा

 

*मनुमुक्त ‘मानव’ ट्रस्ट द्वारा डेढ़ दर्जन शिक्षक सम्मानित*

नारनौल। राष्ट्र-निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होती है और इसीलिए उन्हें राष्ट्र-निर्माता कहा जाता है। यह कहना है हरियाणा बाल-विकास परिषद्, चंडीगढ़ की उपाध्यक्ष पारिशा शर्मा का। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा सैक्टर-1, पार्ट-2 स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में गत सायं आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक-सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि बाल-निर्माण का दायित्व शिक्षकों का होता है और बालक ही बड़े होकर राष्ट्र-निर्माण करते हैं। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी के कुलसचिव डॉ जितेंद्र भारद्वाज ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में शिक्षक के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पद के साथ जुड़ा सम्मान पद से हटते ही समाप्त हो जाता है, लेकिन शिक्षक का पद ही एकमात्र ऐसा पद है, जिसका सम्मान कभी कम नहीं होता। भारत विकास परिषद् के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्रकुमार शर्मा ने शिक्षको से आह्वान किया कि वे अपने शिक्षण-कर्म और आचरण से बच्चों के सम्मुख आदर्श प्रस्तुत करें, तभी वे गुरु कहलाने के अधिकारी हो सकते हैं।‌ पूर्व जिला बाल-कल्याण अधिकारी विपिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिक्षक में नैतिक बल, रचनात्मक दृष्टि और निर्माण-क्षमता का होना आवश्यक है। चीफट्रस्टी डॉ रामनिवास ‘मानव’ ने कहा कि सरकारी पुरस्कारों का अपना महत्त्व होता है, लेकिन असली सम्मान वही होता है, जो शिक्षक को अपने शिष्यों और समाज से मिलता है।

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अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अध्यक्ष डॉ जितेंद्र भारद्वाज के कुशल संचालन में लगभग डेढ़ घंटे चले इस सम्मान-समारोह में भिवानी के डॉ रमकान्त शर्मा और डॉ ममता पालीवाल, हिसार के डॉ राजेश शर्मा, अशोक वशिष्ठ और डॉ यशवीर दहिया, आदमपुर के डॉ राजेंद्र कुमार और पवन कुमार, फतेहाबाद के राजकुमार सलेमगढ़, सेवासिंह निमवाल और सत्यवान सिंह, कुरुक्षेत्र के डॉ रणजीत फुलिया, रोहतक के राजेश कटेसरा, राजेश फरमाना और गायत्री देवी, गुरुग्राम की कमलेश शर्मा और मनोज लाकड़ा, नारनौल के डॉ जितेंद्र भारद्वाज और डॉ कृष्णा आर्या सहित प्रदेश भर के डेढ़ दर्जन शिक्षकों को, शिक्षा-क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के दृष्टिगत, अंगवस्त्र और प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय शिक्षक-पुरस्कार विजेता डॉ ममता पालीवाल और मनोज लाकड़ा तथा विख्यात कवि डॉ रमाकांत शर्मा समारोह का विशेष आकर्षण रहे। डॉ रमाकांत शर्मा के ‘मेरे घर आना नदी’ गीत को भरपूर सराहना मिली।

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इस अवसर पर नारनौल की डॉ कांता भारद्वाज, प्रो अंजू रानी, डॉ वंदना निमहोरिया, कृष्णकुमार शर्मा, एडवोकेट, सत्यवीर चौधरी, जयदयाल सिंह और सुरेंद्रकुमार शर्मा, भिवानी के राहुल देव, कपिल चोपड़ा, वीर सिंह आदि की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।

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