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कबीर तथा नागार्जुन की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई

 

दरभंगा/मिश्रीलाल मधुकर। कबीर को न आज की वर्तमान सत्ता अपनानी चाहती है न पूर्व की सत्ता, न कुलीनतावादी आलोचक। बल्कि आचार्यों ने उन्हें कवि मानने से ही इंकार कर दिया था लेकिन कबीर तब भी जिंदा हैं।

कबीर एक भक्त के रूप में नहीं, कवि के रूप में नहीं बल्कि एक आंदोलन को लेकर वंचितों के बीच आते हैं।

कबीर ज्ञान की सत्ता स्थापित करना चाहते हैं, ज्ञान की आंधी चाहते हैं। वो ज्ञान के द्वारा वंचितों का कल्याण चाहते हैं। कबीर का विद्रोह मनुष्यता को सार्वभौमिक बनाने का विद्रोह है।

उक्त बातें जन संस्कृति मंच एवं लोहिया चरण सिंह कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में 4जून कोआयोजित कबीर–नागार्जुन जयंती के मौके पर हो रहे राष्ट्रीय सेमिनार में जनइतिहासकार सुभाषचंद्र कुशवाहा ने कही। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान सत्ता जिस तरह से शिक्षा में बदलाव कर रही है, उससे पता चलता है कि वर्तमान सत्ता विज्ञान विरोधी है। कबीर का जो प्रतिकार है, हर दौर के अतातायी सत्ता का प्रतिकार है।

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जन संस्कृति मंच के फासीवाद विरोधी राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत हो रहे इस आयोजन में बोलते हुए सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक अवधेश प्रधान ने कहा कि नागार्जुन हर दौर में अत्याचारी सत्ता के विरुद्ध उठने वाले विद्रोह का आगे बढ़कर स्वागत करते हैं।

व्यंग का वज्र एक लोकतांत्रिक वज्र है, जिसका प्रयोग हम कबीर और नागार्जुन दोनों के यहां देख सकते हैं।

आज के दौर में कबीर की तरह नागार्जुन जलती मशाल हैं क्योंकि वे किसी राजनीतिक छल –छद्म के शिकार नहीं हैं। जनता की चेतना को, प्रतिरोध की चेतना को निखारते हैं। वे एक तरह कबीर की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं तो दूसरी तरफ नए कवियों के सहचर और गुरु हैं।

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जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य डॉ.सुरेंद्र सुमन ने कहा कि जब कभी भी सत्ता के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा होगा, दोनों आगे–आगे मशाल लेकर चलते प्रतीत होंगे।

उन्होंने कहा कि भारत का पहला अघोषित कम्युनिस्ट कबीर को कहा जा सकता है। कबीर के विचारों में मार्क्सवादी विचारों के कई उदाहरण मिल जाएंगे। दोनों ही क्रांति चाहते थे। दोनों ही कवियों का काव्य और जीवन शोषणमुक्त समाज के स्वप्न के लिए समर्पित रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जसम जिलाध्यक्ष डॉ रामबाबू आर्य, वरिष्ठ कवि व साहित्यसेवी हीरालाल सहनी एवं लोहिया चरण सिंह कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. शिवनारायण यादव की अध्यक्ष मंडली ने की।

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कार्यक्रम में कबीर भजन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां जसम दरभंगा की नाट्य–गायन इकाई अनहद के द्वारा की गई। जिसमें अजय कलाकार, भोला जी, अशोक पासवान आदि ने प्रमुख भूमिका अदा की।

सेमिनार में डॉ. संजय कुमार, डॉ विनय शंकर, उमेश शाह, केशव कुमार मिश्र आदि ने भी अपनी बातें रखीं।

कार्यक्रम में शोधार्थी सियाराम मुखिया, रूपक कुमार, मिथिलेश कुमार, प्रिंस राज, बबिता कुमारी, सपना मिश्रा सहित बड़ी तादाद में स्थानीय लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का संचालन मंच के जिला सचिव समीर ने तथा धन्यवाद ज्ञापन रूपक ने किया।

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