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प्रज्ञा प्रतिष्ठान का ६६ वां वार्षिकोत्सव

 

काठमांडू, ९ असार


नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के ६६ वें वार्षिकोत्सव के अवसर में दो दिवसीय कार्यक्रम रखा गया है । जिसमें (८ गते असार) पहले दिन के कार्यक्रम की शुरुआत प्रज्ञा परिसर की सफाई से शुरु हुई साथ ही वृक्षारोपण भी किया गया । प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति भूपाल राई के द्वारा वृक्षारोपण तथा पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया । यह पुस्तक प्रदर्शनी प्रत्येक साल वार्षिकोत्सव के अवसर पर किया जाता है जो १५ दिनों तक चलेगी ।


पुस्तक प्रदर्शनी के बाद कार्यक्रम की विधिवत शुरु की गई । कार्यक्रम की अध्यक्षता नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति श्री भूपाल राई ने की । कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय कविता महोत्सव र समावेशी चिन्तनको थालनी’ विषय को लेकर चर्चा तथा विमर्श का कार्यक्रम रखा गया था । स्वागत मंतव्य देते हुए प्रज्ञा प्रतिष्ठान के सदस्य सचिव डॉ. धनप्रसाद सुवेदी ने स्वागत के साथ ही दो दिवसीय इस कार्यक्रम के बारे में भी बताया । उन्होंने बताया कि कैसे इस कविता महोत्सव की शुरुआत हुई ।

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और अब केवल किसी एक भाषा को प्राथमिकता में नहीं रखकर सभी भाषाओं को इसमें जोड़ा जाएगा । उन्होंने बताया कि दो दिवसीय इस कार्यक्रम (९ गते असार) को कविता महोत्सव के अवसर पर हमने पुरस्स्कार की भी घोषणा की है ।

वैसे हम चाहते थे कि ज्यादा से ज्यादा भाषाओं को समेट सके लेकिन इसबार एक नई शुरुआत है ये तो कुछ ही भाषाओं को समेट सकें हैं लेकिन हम वादा करते हैं कि आने वाले दिनों में हम इस कार्यक्रम को और भी भव्य बनाएंगे और सभी भाषाओं को समटने का प्रयास भी करेंगे । कार्यक्रम में श्री भोगी राज चाम्लिङ ने कार्यपत्र प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने साहित्य और राजनीति के बीच के संबंध को दर्शाया । राजनीति से कविता किस तरह प्रभावित है ? कैसे दोनों एक दूसरे से बंधे हैं इसके बारे में बताया ।

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अपने कार्यपत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि नेपाल भौगोलिक रुप से तो एकीकृत हो गया है लेकिन भावनात्मक रुप में जुड़ना बांकी है । किसी को गाली देकर या मात्र ताली बजाकर भावनात्मक रुप से एकता नहीं आ सकती है । जब तक नेपाल को भावनात्मक रुप से नहीं जोड़ा जाएगा तबतक नेपाली राष्ट्रीयता मजबूत नहीं हो पाएगी ।
कार्यपत्र पर टिप्पणी करने वालों में गुरुङ सुशांत, ज्ञानु अधिकारी तथा अनुभव अजित थे ।
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के प्राज्ञ परिषद सदस्य तथा साहित्य (पद–काव्य)विभाग प्रमुख बाबा बस्नेत ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया ।

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