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नई दिल्ली : ‘बहुभाषी भारत : एक जीवंत परंपरा’ थीम पर आधारित 51वां विश्व पुस्तक मेला

 

नई दिल्ली 6 फरवरी 24

‘बहुभाषी भारत : एक जीवंत परंपरा’ थीम पर आधारित 51वां विश्व पुस्तक मेला एक नहीं, कई मायनों में खास होगा। मेले को हर आयु वर्ग में लोकप्रिय बनाने के लिए कुछ नए प्रयोग भी देखने को मिलेंगे। मेले का उद्घाटन भी इस बार खास बनाने की तैयारी है। इसका अयोजन भी भारत मंडपम में होगा। मेले की एक बड़ी खासियत थीम मंडप में ‘कश्मीर की यात्रा’ रहेगी।

इंडियन काउंसिल फार हिस्टोरिकल रिसर्च (आइसीएचआर) के साथ मिलकर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) एक प्रदर्शनी लगाएगा, जहां कश्मीर की कला संस्कृति, रहन-सहन, धर्म-कर्म एवं साहित्य से रूबरू हुआ जा सकेगा।

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मेले की दूसरी खासियत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की वह झांकी होगी, जो पहले कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनी और फिर लाल किले में भारत पर्व में शामिल की गई। कुछ बदलावों के साथ वह झांकी अब पुस्तक मेले में भी प्रदर्शित की जाएगी।

दिव्यांग बच्चों को मुफ्त किताबें मिलेंगी
‘सभी के लिए किताबें’ परिकल्पना पर भी मेले में एक जोन बनाया जा रहा है। यहां पर दिव्यांग बच्चों को मुफ्त किताबें मिलेंगी, बशर्ते उनका पंजीकरण हो रखा हो।

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मेले में एक इलस्ट्रेशन वाल रहेगी जहां पर देश-विदेश के कलाकार अपनी तूलिका से कलाकृतियां बनाएंगे। बी टू बी जोन देशी-विदेशी प्रकाशकों के लिए एक अलग प्लेटफार्म होगा, जहां वे कारोबार से जुड़ी बैठकें कर सकेंगे।

एक हजार से ज्यादा प्रकाशक शिरकत कर रहे हैं
मेला आयोजक एनबीटी अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष मेले में देश-विदेश के एक हजार से ज्यादा प्रकाशक शिरकत कर रहे हैं। स्टालों की संख्या दो हजार से अधिक होगी। मेले में स्कूली विद्यार्थियों व वरिष्ठ नागरिकों के लिए निशुल्क प्रवेश होगा। टिकट दर 10 रुपये बालक और 20 रुपये वयस्क रहेगी।

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