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चीन ने मून मिशन की शुरुआत की

 

चीन ने अपने मून मिशन की शुरुआत शुक्रवार को की. इस मिशन के माध्‍यम से चीन चांद के सबसे दूर और अंधेरे में रहने वाले हिस्‍से पर पहुंचकर वहां से पहली बार मिट्टी के नमूने एकत्र करके उन्हें वैज्ञानिक अध्ययन के लिए पृथ्वी पर लाएगा. चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (CNSA) के चांग’ई-6 मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हो गई है. चीन की स्‍पेस एजेंसी का कहना है कि चंद्रमा के सबसे दूर वाले हिस्से से नमूने एकत्र करने और फिर उन्हें पृथ्वी पर वापस लाने का काम चांद पर खोज करने के इतिहास में अपनी तरह का पहला प्रयास है.

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इस मून मिशन को लॉन्ग मार्च-5 Y8 रॉकेट की मदद से ले जाया जाएगा. चीन के दक्षिणी द्वीप प्रांत हैनान के तट से इसे अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया. सरकारी चाइना डेली की एक रिपोर्ट के अनुसार, चांग’ई 6 में चार घटक शामिल हैं: एक ऑर्बिटर, एक लैंडर, एक एसेंडर और एक री-एंट्री मॉड्यूल. बताया जा रहा है क‍ि चीन का मून मिशन चंद्रमा पर धूल और चट्टानों को इकट्ठा करने के बाद उनके नमूनों को मॉड्यूल में स्थानांतरित करने के लिए चांद की कक्षा में ले जाएगा. जिसकी मदद से उसे वापस पृथ्वी पर पाया जाएगा.

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सीएनएसए ने घोषणा की है कि फ्रांस, इटली और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और स्वीडन के वैज्ञानिक उपकरण चांग’ई-6 मिशन के लैंडर पर हैं. साथ ही ऑर्बिटर पर एक पाकिस्तानी पेलोड भी है. पाकिस्तान ने चीन मिशन के माध्‍यम से अपने छोटे से चंद्र मिशन का नाम आईक्यूब-कमर रखा है. बता दें कि चीन ने अतीत में चंद्रमा पर मानवरहित मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया था, जिसमें एक रोवर को उतारना भी शामिल था. चीन ने भी मंगल ग्रह पर एक रोवर भेजा है. इससे पहले, चीन ने 2030 तक चंद्रमा पर मानवयुक्त लैंडिंग की योजना की घोषणा की थी. भारत पिछले साल चंद्रयान-3 की मदद से चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बन गया था.

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