बरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा की जाती है
आज बरुथिनी एकादशी और शनिवार का व्रत है. आज वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि, पूर्व भाद्रपद नक्षत्र, इन्द्र योग, बव करण, पूर्व का दिशाशूल और दिन शनिवार है. इस दिन त्रिपुष्कर योग बन रहा है, जबकि पूरे दिन पंचक है. त्रिपुष्कर योग में आप जो भी शुभ कार्य करेंगे, उसका तीन गुना फल आपको प्राप्त होगा. बरुथिनी एकादशी के दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा करते हैं. पूजा में राजा मांधाता की कथा सुनते हैं, जिसमें बताया गया है कि कैसे उनको भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त हुई. बरुथिनी एकादशी का व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होगी और पाप मिटेंगे, विष्णु कृपा से मोक्ष भी मिल जाता है.
बरुथिनी एकादशी के साथ शनिवार व्रत भी है. शनिवार के दिन कर्मफलदाता शनि देव की पूजा करते हैं. जिन पर साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव होता है, उनको शनिवार व्रत और शनि पूजा जरूर करनी चाहिए. शनि देव को काले या नीले वस्त्र, काले तिल, सरसों का तेल, शमी के पत्ते आदि चढ़ाने चाहिए. शनिवार को शमी के पेड़ की पूजा करने, जल चढ़ाने और शाम को दीप जलाने से शनि महाराज प्रसन्न होते हैं. शनि दोष से मुक्ति के लिए आप गरीबों की मदद करें, उनको कंबल, भोजन, वस्त्र, लोहे के बर्तन आदि का दान करें. जल्द ही लाभ होता दिखाई देगा. पंचांग से जानते हैं बरुथिनी एकादशी के दिन का शुभ मुहूर्त, सूर्योदय, चंद्रोदय, सूर्यास्त, चंद्रास्त, राहुकाल, पंचक, दिशाशूल आदि.

