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नेपाल वार्ता द्वारा ही अपनी सीमा समस्या का समाधान करना चाहता है –परराष्ट्रमन्त्री

 

 

काठमांडू, वैशाख २४ –परराष्ट्रमन्त्री नारायणकाजी श्रेष्ठ ने कहा है कि नेपाल और भारत के बीच जो सीमा समस्या है उसे हम वार्ता द्वारा सुलझा सकते हैं । उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लिपुलेक, लिम्पयाधुरा तथा कालापानी में नेपाल को अपनी सार्वभौमसत्ता का प्रयोग करने में सक्षम होना चाहिए ।
सोमवार को राष्ट्रीय सभा की संघीयता सबलीकरण तथा राष्ट्रीय सरोकार समिति की बैठक में बोलते हुए उन्होंने यह बातें कही । उन्होंने कहा कि नेपाल को अपने भूभाग में सार्वभौम सत्ता और भौगोलिक अखण्डता का प्रयोग करने में सक्षम होना चाहिए ।
उन्होंने कहा कि नेपाल वार्ता द्वारा ही अपनी सीमा समस्या का समाधान करना चाहता है । हम किसी और तरीके से समया का समाधान नहीं करना चाहते हैं । हम चाहते हैं कि कुटनीतिक माध्यम द्वारा वार्ता से समस्या का समाधान हो जिसके लिए हम पहल कर रहे हैं, ये पहल जारी है ।
गुरुवार के दिन सरकार ने एक सौ रुपए के नोट पर नेपाल का अभी का जो नया नक्शा है उसे रखने का निर्णय किया था । इस निर्णय के प्रति भारतीय विदेशमन्त्री एस जयशंकर ने असन्तुष्टि जताई है । रविवार को भारत के पत्रकारों के साथ बातचीत की । भारतीय विदेशमन्त्री एस जयशंकर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नेपाल ने यह निर्णय एकतर्फी ली है ।
सोमवार को हुई समिति बैठक में नेकपा एकीकृत समाजवादी सांसद राजेन्द्र लक्ष्मी गैरे ने कालापानी, लिम्पियाधुरा, लिपुलेक शामिल वाले नेपाल नक्शे के कार्यान्वयन के विषय में जवाब मांगी ।
कहा जा रहा है कि नेपाल का नया नक्शा अब विवाद में है । इस विवाद को स्पष्ट करें ।
परराष्ट्रमन्त्री श्रेष्ठ ने बारम्बार इस बात पर जोर दिया कि नेपाल और भारत के बीच में रहे सीमा समस्या को लेकर टेबुल टु टेबल वार्ता होनी चाहिए । कई बार वार्ता हुई भी लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ ।
नेपाल और भारत के बीच सीमा समस्या दो जगहों पर है । सुस्ता और कालापानी में सीमा समस्या का समाधान नहीं हुआ है ।

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