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सर्वदा साहित्य सङ्गम द्वारा पुरस्कार अपर्ण तथा पुस्तक बिमोचन

 

नेपालगञ्ज /(बाँके) पवन जायसवाल । बाँके जिला के नेपालगञ्ज में रही साहित्यिक संस्था सर्वदा साहित्य सङ्गम द्वारा आयोजन किया गया बार्यक्रम में पुरस्कार अपर्ण, पुस्तक बिमोचन तथा रचना वाचन अषाढ १ गते शनिवार को सम्पन्न हुआ है ।

नेपालगञ्ज उपमहानगरपालिका वार्ड नं.–६ निवासी वयोवृद्ध लेखक तथा साहित्यकार गणेश जिसी के अध्यक्ष में नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के प्राज्ञ सभा सदस्य शशीराम कार्की के प्रमुख आतिथ्य में सम्पन्न वह कार्यक्रम में ईश्वरी प्रसाद रिजाल “उल्कापात” को श्री वागेश्वरी सर्वदा पुरस्कार–२०८१ द्वारा सम्मान किया गया है ।

भीम प्रज्वलद्वारा सञ्चालित कार्यक्रम में खगेन्द्रगिरि कोपिलाद्वारा प्रकासित १४ वीं मुक्तक संग्रह कालध्वनि नामक कृति और साहित्यकार भरत बहादुर रानाभाटद्वारा प्रकासित तीसरी कृति फ्लोरिडाको सेरोफेरो कृति वह कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के प्राज्ञ सभा सदस्य शशीराम कार्की लगायत लोगों ने की बिमोचन किया ।

कार्यक्रमका प्रमुख अतिथि नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के प्राज्ञ सभा सदस्य शशीराम कार्की ने मन्तव्य व्यक्त करते हुये सर्वदा साहित्य सङ्गम नेपालगन्ज की यह पहली पुरस्कार रही जो ईश्वरी प्रसाद रिजाल “उल्कापात” को प्रदान किया गया है ।

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 इसी तरह वह कार्यक्रम में सम्मानित व्यक्तित्व ईश्वरी प्रसाद रिजाल “उल्कापात” के बारे में सर्वदा साहित्य सङ्गम नेपालगन्ज के अध्यक्ष खगेन्द्रगिरि कोपिला प्रकाश डाला था ।

कालध्वनि कृति की समिक्षा साहित्यकार तथा समिक्षक चरित्रा शाह और फ्लोरिडाको सेरोफेरो कृति के उपर समिक्षा सुमित्रा न्यौपाने ने की थी । 

फ्लोरिडाको सेरोफेरो कृतिकार भरत बहादुर राना ने अमेरिका में ३१ महीना बैठे  उस समय के बारे में कृति में उन्हों जो देखी दृश्य की बारे में उल्लेख किया है  अपनी बिचार में व्यक्त किाय था ।

वह अवसर पर सर्वदा साहित्य सङ्गमद्वारा संस्था के संरक्षक की प्रमाण–पत्र  प्रा.डा. जनार्दन आचार्य, बालरोग बिशेषज्ञ डा.बिजय प्रधान, लक्ष्मी बस्याल, भीम बहादुर शाही, गणेश बहादुर जिसी को प्रदान किया गया है । 

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कृतिकार खगेन्द्रगिरि कोपिलाद्वारा प्रकासित कृतिओं में उस्तैउस्तै नदीका उस्तैउस्तै छालहरु(२०५१, व्यग्र चाँदनी–२०६१, डुबे पनि डुब्दैना घाम–२०६२, आफ्नै छाल आफ्नै किनारा–२०६५, राग वसुन्धरा –२०६६, लहरलहर गन्दै–२०७०, मधु प्रदक्षिणा–२०७१, गजल सञ्चेतना सन्निधि–२०७३, अतीत आमन्त्रण–२०७४, असवीकृत रहर –२०७५, ऋतु दर्शन –२०७६, अश्रुअर्घ–२०७८, महामुनिका पदचाप–२०७९, कालध्वनि–२०८० लगायत १४ कृतियाँ प्रकासित हो. चुकी है । इसी तरह साहित्यकार भरत बहादुर रानाभाटद्वारा  प्रकासित कृतियाँ में जिन्दगीको यात्रा (कथासंग्रह) २०७४, नियति (कथासंग्रह) २०७७, फ्लोरिडाको सेरोफेरो (नियात्रा संग्रह) २०८१ प्रकासित हो चुकी है ।

वह कार्यक्रम में पुरस्कृत व्यक्तित्व ईश्वरी प्रसाद रिजाल “उल्कापात” ने बिचार रखते हुये रचना वाचन किया था । भेरी साहित्य समाज केन्द्रीय समिति के सचिव प्रभात सुवेदी, पदमा रिजाल, कमल बडुवाल, राज कुमार थारु, खेम बगर,चन्द्रवती अधिकारी, लक्ष्मी बस्याल, भिम प्रज्वल लोगों ने रचाना वाचन किया था ।

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कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार सनत कुमार रेग्मी, प्रा. डा.गोपाल प्रसाद अधिकारी,  शिक्षाबिद् किरण आचार्य, जीत बहादुर शाह, महेन्द्र पुस्तकालय के अध्यक्ष बलराम यादव, बालकृष्ण शर्मा, इन्द्र बहादुर भण्डारी, प्राज्ञ सभा सदस्य महानन्द ढकाल, भेरी साहित्य समाज केन्द्रीय अध्यक्ष हरि प्रसाद तिमिल्सिना, पुष्पमणि प्रधान, कल्पना पौडेल जिज्ञासु, ज्ञनोदय नमूना माध्यमिक बिद्यालय के प्रधानाध्यापक ऋषिराम सापकोटा, कविन्द्र भट्टराई, कृष्ण मुरारी प्रसाद भट्ट, अवधी साहित्यकार बिष्णुलाल कुमाल, कल्पना खरेल, नेत्र बहादुर बन्जारा, इन्द्रिरा गौतम, स्पर्श अधिकारी, सन्तोषी बिष्ट, दिनेश सापकोटा, वैभव बिक्रम चन्द, चुडामणि बन्जारा, सोमनाथ लुइटेल, बद्री ढकाल, सीता सेवेदी, रेशम कुमार भट्ट, नेपालगन्ज उद्योग वाणिज्य संघ के महासचिव भीम बहादुर रानाभाट, कमान सिंह बोहरा, जनकराम भण्डारी, खडक बहादुर बोहरा लगायत लोगों की सहभागिता रही थी ।

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