Sat. May 30th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

भारत-नेपाल के साथ नक्शा का विषय जटिल, बातचीत से सहमति बनाना ही समाधान : रंजीत रे

 

काठमान्डू 11 सितम्बर

रंजीत रॉय, फाईल तस्वीर

नेपाल के लिए भारत के पूर्व राजदूत समय समय पर नेपाल आते रहते हैं । नेपाल उनके कैरियर का अंतिम स्थल रहा है । पिछले दिनों नेपाल आए रंजित रे ने नेपाल की वर्तमान स्थिति, राजनीति और भारत के साथ नेपाल के रिश्ते   पर अपने विचार रखते हुए कहा कि ईपीजी रिपोर्ट तैयार हुए सात साल हो गए हैं।  ईपीजी का मुख्य विषय 1950 संधि समीक्षा है। इस पर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों में सहमति बन गई है. यहां तक ​​कि जब हमारे प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) पहले यहां आये थे, तब भी इस पर चर्चा हुई थी.’ इसलिए, दोनों सरकारें इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। शायद किसी समय विदेश सचिव स्तर पर बातचीत होगी. मैंने सुना है कि ईपीजी रिपोर्ट पेश किया जा चुका है,  मुझे विश्वास है कि यह आपसी हित से जुड़ी होगी।

यह भी पढें   देश को ‘आरोग्य पर्यटन’ के गंतव्य के रूप में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा दिया जाएगा

उन्होने कहा कि भारत-नेपाल के साथ नक्शा का विषय  थाेडा  जटिल है। बातचीत से सहमति बनाना ही समाधान है. यह एक जटिल मुद्दा था, लेकिन नेपाल में संविधान संशोधन होने और नक्शा जारी होने के बाद यह और भी जटिल हो गया है. बातचीत के जरिए किसी समझौते पर पहुंचने के लिए उचित समय पर बातचीत शुरू की जानी चाहिए. संवाद का कोई विकल्प नहीं है.

भारत और नेपाल दोनों स्वतंत्र देश हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा तदनुसार मान्यता दी गई है। इसमें दो राय नहीं होने चाहिए. इन दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक भाईचारा  है. लेकिन अन्य देशों की संवेदनशीलता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। नक्शा विवाद के बारे में मैं किताब में पहले ही लिख चुका हूं. सरकार के बयान के अलावा सरकार के बाहर के नागरिकों के भी बयान हो सकते हैं. उन सभी बातों को तथ्यों और तर्कों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
नेपाल में जलविद्युत असीमित संभावनाओं का क्षेत्र है। अब, ऊर्जा ही वह क्षेत्र है जो भारत और नेपाल के बीच संबंधों को जीत की स्थिति में ले जा सकता है। अगर 10 साल से पहले 10,000 मेगावाट का उत्पादन किया जा सके तो दो अरब डॉलर कमाए जा सकते हैं. इससे नेपाल और भारत के बीच व्यापार घाटा कम होगा. इसका संबंध सिर्फ दो देशों से नहीं है. इसमें बांग्लादेश और अन्य का भी जिक्र है. यह उपलब्धि भारत और नेपाल सहित उप-क्षेत्रीय संबंधों में हासिल की जाएगी।

यह भी पढें   पुराने राजनीतिक दलों को समाप्त करने की साजिश जारी : ओली

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *