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सभासदों के सब्र का बाँध टूटा और संविधान सभा में मची खलबली

 
आभा मिश्र
आभा मिश्र

आभा मिश्रा , काठमाण्डू, २० जनबरी । गोली दिल पर लगे और जख्म न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता । कल मध्य रत्रि में भी कुछ ऐसी ही घटना घटी जिसने पुरे नेपाल को हिला कर रख दिया । संदर्भ कल देर रात या यूं कहें कि मध्य रात्रि में संविधान सभा के अन्दर घटी घटना की है । कल दिन भर हमारे तथाकथित सभ्य नेता एवं मंत्रियो के संविधान सम्बन्धी वक्तव्य एवं विचार विभिन्न संचार माध्यमों द्वारा प्रसारित होता रहा । इसी अफडा तफडी के बीच नेता ओलीजी ने तो बदंर के क्रिया कलापो तक की व्यख्या कर दी और सभासद को बदंर ही कह दिया । शायद वो ये भूल गये कि पुरे देश की नजरे इनपर टिकी हैं और लोग टकटकी लगाये संविधान के आने का इन्तजार कररहें हैं ।

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फलस्वरुप ओली की बोली की गोली,  हमारे सभामुख का मध्य रात्रि में नीदं खुलना और प्रक्रिया मे जाने का निर्णय लेना मधेश के भी हित मे लड रहे नेताओं के सब्र के बाँंध को तोड ही दिया । संविधान सभा के अन्दर खलबली मच गयी तथा कुर्सियां टूटी ।विभिन्न मिडिया द्वारा इसे एक अशोभनीय क्रिया कलाप की सज्ञां दी जा रही है । इस घटना की वास्तविकता की ओर भी नजर डालना आवश्यक है । विगत एक वर्ष से सहमतीय संविधान बनाने का नाटक किया जा रहा था परन्तु अन्दर ही अन्दर एमाले एवं कांग्रेस की सरकार अपने बहुमत के घमण्ड में, पूर्ण बहुमत द्वारा, संविधान बनाने की कोशिश मे जुटी हुई थी । एमाले,कांग्रेस और सभामुख का यह पूर्व नियोजित षडयत्रं ही था कि मध्य रात्रि में प्रक्रिया में जाने की घोषणा की जाय । वो शायद ये भुल गये कि पहले भी नेपाल मे एकबार मध्य रात्रि में ही एक दर्दनाक घटना घटी थी, जिसने नेपाली जनता को विचलित कर दिया और तत्कालीन नेतृत्व को सत्ता से हाथ धोना पडा था ।

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s-2मधेश विगत अनगिनत दशकों से अपने अस्तित्व की लडाई लड रही है तथा अनेक प्रकार की लांछनाओं का शिकार भी होती रही है । कभी बिहार और यूपी में शामिल होने का तो कभी अलगावादी होने का । इन सबों के बीच पुन: ओलीजी द्वारा दिये गये विभिन्न वक्तव्यों ने आग मे घी डालने का काम किया है । कल जो कुछ भी घटना संविधानसभा मे घटी, वह अशोभनीय एवं निदंनीय जरूर है परन्तु धरती हिले और मनुष्य अडिग रहे ये तो असंभव है । इसलिये कल रात्रि मे जो कुछ भी हुआ उसे अशोभनीय कहने से पहले इन सब बातों पर विचार करना आवश्यक है ।s-

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