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दो महामंत्रियों द्वारा पार्टी को कब्जा करने की कोशिश : विमलेंद्र निधि

 

काठमांडू, 16 कार्तिक 2082 । नेपाल कांग्रेस में 15वें महाधिवेशन की समयसीमा को लेकर जारी रस्साकशी अब खुलकर सामने आ गई है। वरिष्ठ नेता विमलेन्द्र निधि ने कहा है कि “दो महामंत्रियों ने पार्टी को अनिर्णय का बंधक बना दिया है।”

कांग्रेस की केन्द्रीय समिति बैठक इस सवाल पर फंसी है कि महाधिवेशन चुनाव से पहले हो या बाद में। महामंत्री गगन थापा और विश्वप्रकाश शर्मा चुनाव से पहले महाधिवेशन की मांग कर रहे हैं, जबकि निधि और संस्थापन पक्ष का कहना है कि “पहले प्रतिनिधिसभा चुनाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”

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निधि ने स्पष्ट कहा, “हम नहीं चाहते कि कोई एक पक्ष पूरा पार्टी अपने कब्जे में ले ले। लोकतंत्र में सहमति ज़रूरी है।” उनका कहना है कि अभी पार्टी को संविधान और राजनीतिक प्रक्रिया को “ट्रैक पर लाने” के लिए चुनाव में उतरना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पार्टी महाधिवेशन के झमेले में पड़ी तो चुनावी तैयारी प्रभावित होगी। “घर में रोटी पकाते वक्त ध्यान कहीं और लगाओ तो रोटी जल जाती है, ठीक वैसा ही हाल पार्टी का होगा,” निधि ने उदाहरण देते हुए कहा।

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निधि ने दोनों महामंत्रियों की पहल को “अदूरदर्शी और अपरिपक्व” बताया और कहा कि इससे संगठनात्मक विभाजन गहराने का खतरा है। उन्होंने बताया कि यदि आवश्यक हुआ तो पार्टी विशेष महाधिवेशन भी बुला सकती है, लेकिन नियमित महाधिवेशन अब चुनाव के बाद वैशाख में ही संभव है। श्री निधि ने ये सभी बातें कांतिपुर में एक अन्तर्वार्ता के जरिए कहि है ।

उनका निष्कर्ष था — “कांग्रेस के लिए अभी चुनाव ही सर्वोच्च प्राथमिकता है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सहमति के बिना पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती।”

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