संसद पुनर्बहाली की मांग राजनीतिक दुर्घटना लाने का प्रयास :सुशीला कार्की ने एमाले को दिए चार संदेश
काठमांडू, 3 मंसिर । प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने बुधवार को एक बैठक में चुनाव आयोग में पंजीकृत 125 दलों को सरकार की प्राथमिकताओं से अवगत कराया। इस बैठक में उन्होंने न केवल सरकार के चुनाव कराने के लक्ष्य को स्पष्ट किया, बल्कि चुनाव नहीं होने का दावा करते हुए संसद पुनर्बहाली की मांग कर रहे एमाले को चार स्पष्ट संदेश भी दिए।
यह बैठक एमाले के प्रतिनिधियों, उप महासचिव प्रदीप ज्ञवाली और भंग प्रतिनिधि सभा सदस्य महेश बर्तौला की उपस्थिति में हुई। प्रधानमंत्री कार्की ने एमाले का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनके सभी बयान संसद पुनर्बहाली की मांग कर रहे दल के लिए ही थे।
एमाले लगातार यह आशंका जता रहा है कि कार्की के नेतृत्व वाली सरकार चुनाव नहीं करा सकती। इसके अलावा, एमाले ने सरकार के गठन को ही असंवैधानिक बताते हुए संसद पुनर्बहाली की मांग को आगे बढ़ाया है और अब अदालत में रिट दायर करने की तैयारी की है।
एमाले प्रतिनिधियों की मौजूदगी वाली बुधवार की बैठक में प्रधानमंत्री कार्की ने उनकी गतिविधियों को किसी भी हालत में उचित नहीं ठहराया। उनके चार संदेश इस प्रकार हैं:
1. संसद पुनर्बहाली की मांग राजनीतिक दुर्घटना लाने का प्रयास
प्रधानमंत्री कार्की ने चेतावनी दी कि जेनेजी आंदोलन के बाद हुए संसद विघटन को पलटने का प्रयास करने से और दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसा कार्य देश को और अधिक अस्थिरता की ओर ले जाएगा।
उन्होंनेकहा, “चुनाव की घोषणा के बाद भी कुछ दलों द्वारा राजनीति के किनारे पर देखी गई उलझन, संसद पुनर्बहाली की मांग और सरकार की वैधानिकता पर सवाल उठाने के कार्य राष्ट्र को फिर से अस्थिरता के चक्र में धकेल सकते हैं। अब संसद पुनर्बहाली का रुख अपनाने से उस कार्य की पुष्टि होगी जो केवल अतीत की राजनीतिक दुर्घटना को दोहराने की कोशिश है।”
उन्होंनेकहा कि राजनीतिक बहसों को संवैधानिक समाधान के रास्ते पर ले जाना चाहिए। एमाले भी संवैधानिक रास्ते पर वापस आने के लिए संसद पुनर्बहाली की बात कर रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री और एमाले की संवैधानिक रास्ते की धारणा परस्पर विरोधी है। प्रधानमंत्री कार्की ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक समाधान का रास्ता चुनाव है।
2. क्या लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले चुनाव से भागेंगे?
प्रधानमंत्री कार्की ने कहा कि लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले दलों के लिए चुनाव से भागने जैसी गतिविधियां उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई दल चुनाव से भागता है तो इसे संवैधानिक दायित्व से पलायन माना जाएगा।
उन्होंनेकहा, “लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली शक्तियों के लिए चुनाव से भागना कोई विकल्प नहीं है। इसलिए, लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले किसी भी दल को जनमत का सम्मान न करके पुनर्बहाली की बात करके संवैधानिक दायित्व से पलायन नहीं करना चाहिए।”
3. क्या अराजकता चाह रहे हैं?
प्रधानमंत्री कार्की के बयान में यह आशंका झलकती है कि कहीं चुनाव बहिष्कार का मुद्दा उठाकर अराजकता लाने की कोशिश तो नहीं की जा रही।
उन्होंनेकहा, “दल पंजीकरण न करना या चुनाव बहिष्कार करने वाला कोई भी दल लोकतंत्र की रक्षा के बजाय अराजकता को चुनना माना जाएगा।”
लोकतंत्र केवाहक राजनीतिक दल ही हैं, यह कहते हुए उन्होंने दल के साथ, सहयोग और भागीदारी के बिना चुनाव की कल्पना भी असंभव बताई।
उन्होंनेमंसिर 10 तक अनिवार्य रूप से चुनाव आयोग में दल पंजीकरण कराने का आग्रह किया और कहा कि यह समयसीमा केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति न्यूनतम राजनीतिक प्रतिबद्धता की कसौटी है।
4. हेट स्पीच बंद करें
प्रधानमंत्री कार्की ने सरकार और चुनाव के खिलाफ द्वेषपूर्ण अभिव्यक्तियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चुनावी वातावरण में राजनीतिक आचार और अभिव्यक्ति पर ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंनेकहा, “कुछ नेताओं द्वारा इस्तेमाल की गई द्वेषपूर्ण शब्दावली ने राजनीतिक और सामाजिक वातावरण को दूषित किया है। ऐसी द्वेषपूर्ण अभिव्यक्तियों और हेट स्पीच के खिलाफ तत्काल और सार्वजनिक कार्रवाई करने के लिए सरकार चुनाव आयोग को पूर्ण सहयोग देगी।”
उन्होंनेशब्दों की मर्यादा बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि राजनीति में संस्कार और अनुशासन भी अनिवार्य है।


