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विश्वविद्यालयों से राजनीतिक छात्र संगठनों की संरचना हटाने का सरकार का निर्णय, सुरक्षा देने की भी घोषणा

 

काठमांडू, 19 अप्रैल । नेपाल सरकार ने विश्वविद्यालयों और क्याम्पसों से राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों की संरचना हटाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय को लागू करने के दौरान यदि किसी प्रकार की सुरक्षा चुनौती आती है, तो सरकार सुरक्षा उपलब्ध कराएगी।

शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्री ने विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों को मंत्रालय में बुलाकर छात्र संगठनों की संरचना हटाने का निर्देश दिया था। चैत 20 गते के अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय सार्वजनिक किया गया। बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों के 13 उपकुलपति उपस्थित थे और उन्होंने इस निर्णय पर हस्ताक्षर भी किए।

बैठक के निर्णय के अनुसार, यदि दलीय छात्र संगठनों को हटाने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की सुरक्षा चुनौती सामने आती है, तो के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। विश्वविद्यालय परिसरों में आवश्यकता पड़ने पर अस्थायी या स्थायी सुरक्षा इकाई स्थापित करने का भी प्रावधान रखा गया है।

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सरकार द्वारा स्वीकृत प्रशासनिक सुधार कार्यसूची के बिंदु संख्या 86 में विश्वविद्यालय परिसरों से दलीय छात्र संगठनों की संरचनाओं को 60 दिनों के भीतर हटाने का उल्लेख किया गया है। साथ ही 90 दिनों के भीतर विद्यार्थी काउंसिल या वॉइस ऑफ स्टूडेंट्स नामक वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है, जो छात्रों के अधिकारों और हितों की आवाज उठाने का मंच बनेगा।

निर्णय के अनुसार विश्वविद्यालय अब छात्र संगठनों को कार्यालय के लिए कमरे, भवन या जमीन उपलब्ध नहीं कराएंगे। परिसरों में लगे बैनर, झंडे, पोस्टर और दीवार लेखन जैसे सभी भौतिक संकेतों को भी तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया है।

यदि किसी विश्वविद्यालय के कानून में दलीय छात्र संगठनों से संबंधित प्रावधान मौजूद है, तो उसे समाप्त करने के लिए कानून संशोधन का प्रस्ताव शिक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगा। विश्वविद्यालयों को अपने नियम, विनियम और कार्यविधि को भी 60 दिनों के भीतर संशोधित करने को कहा गया है।

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इस निर्णय के तहत विश्वविद्यालयों में मौजूद स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन (स्ववियु) के स्थान पर छात्र परिषद या “वॉइस ऑफ स्टूडेंट्स” व्यवस्था लागू करने के लिए कानूनी संशोधन करने की तैयारी भी की जा रही है।

हालांकि, सरकार के इस निर्णय का विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध किया है। विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े 14 छात्र संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर इसे अलोकतांत्रिक बताया है। उनका कहना है कि विचारधारा के आधार पर संगठन बनाने और उसमें शामिल होने का अधिकार नेपाल के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है। ऐसे में छात्र संगठनों को हटाने का निर्णय अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध के समान है।

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छात्र संगठनों ने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि सुधार के नाम पर लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने का कोई भी प्रयास असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक होगा।

बैठक के मुख्य निर्णय:

  • आवश्यकता पड़ने पर विश्वविद्यालयों में अस्थायी या स्थायी सुरक्षा इकाई स्थापित की जाएगी।
  • राजनीतिक छात्र संगठनों को कमरे, भवन या जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।
  • छात्र संगठनों के बैनर, झंडे और दीवार लेखन तुरंत हटाए जाएंगे।
  • आवश्यकता पड़ने पर कानून और नियमों में संशोधन कर छात्र संगठनों को हटाया जाएगा।
  • स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन के स्थान पर छात्र काउंसिल या “वॉइस ऑफ स्टूडेंट्स” व्यवस्था लागू की जाएगी।

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