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भारत सरकार के सहयोग से पुनर्स्थापित ललितपुर के जेष्ठ वर्ण महाविहार को यूनेस्को का ‘अवार्ड ऑफ मेरिट’, विशेष समारोह में सम्मान हस्तांतरित

 

काठमांडू, 2 जुलाई 2026। नेपाल के ललितपुर स्थित ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर जेष्ठ वर्ण महाविहार को वर्ष 2025 के यूनेस्को एशिया-प्रशांत सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पुरस्कार के अंतर्गत ‘अवार्ड ऑफ मेरिट’ प्रदान किए जाने के उपलक्ष्य में गुरुवार को महाविहार परिसर में एक विशेष सम्मान हस्तांतरण समारोह आयोजित किया गया।

समारोह में नेपाल स्थित यूनेस्को के प्रतिनिधि श्री जाको दु तोइट (Jaco Du Toit) ने ललितपुर महानगरपालिका के मेयर श्री चिरीबाबु महर्जन तथा काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के उप मिशन प्रमुख (Deputy Chief of Mission) डॉ. राकेश पाण्डेय की उपस्थिति में जेष्ठ वर्ण महाविहार उपभोक्ता समिति को पुरस्कार की धातु पट्टिका (Metal Plaque) और आधिकारिक प्रमाणपत्र सौंपा।

इस अवसर पर स्थानीय समुदाय के सदस्य, इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के प्रतिनिधि, विरासत संरक्षण विशेषज्ञ तथा नेपाल सरकार के विभिन्न अधिकारी भी उपस्थित रहे।

भारत सरकार द्वारा भूकंप पुनर्निर्माण सहायता के अंतर्गत लगभग 13 करोड़ 78 लाख नेपाली रुपये की लागत से इस महाविहार के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन का कार्य कराया गया। परियोजना के लिए भारत सरकार ने तकनीकी विशेषज्ञ संस्था INTACH को परियोजना प्रबंधन सलाहकार नियुक्त किया, जिसने नेपाल सरकार की सेंट्रल लेवल प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (CLPIU) तथा स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर कार्य किया।

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इस परियोजना का उद्घाटन 22 मार्च 2024 को नेपाल में भारत के तत्कालीन राजदूत श्री नवीन श्रीवास्तव तथा नेपाल सरकार के तत्कालीन शहरी विकास मंत्री श्री धन बहादुर बुढा ने संयुक्त रूप से किया था।

यूनेस्को ने इस परियोजना को इसलिए सम्मानित किया क्योंकि इसमें समुदाय-केंद्रित संरक्षण मॉडल अपनाया गया तथा पारंपरिक नेवारी काष्ठकला, ऐतिहासिक वास्तुकला और आधुनिक भूकंपरोधी सुरक्षा तकनीकों के बीच उत्कृष्ट संतुलन स्थापित किया गया। संरक्षण कार्य के दौरान यह भी सुनिश्चित किया गया कि नेवार बौद्ध समुदाय की धार्मिक परंपराएँ, दैनिक पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक गतिविधियाँ बिना किसी बाधा के निरंतर चलती रहें।

भारत सरकार ने वर्ष 2015 के गोरखा भूकंप के बाद नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए एक अरब अमेरिकी डॉलर की सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसी सहायता के अंतर्गत अब तक 50,000 निजी आवास, 70 विद्यालय और एक पुस्तकालय, 122 स्वास्थ्य संस्थान तथा 17 सांस्कृतिक विरासत स्थलों का पुनर्निर्माण कर नेपाल सरकार को सौंपा जा चुका है।

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इसके अतिरिक्त, भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में 14 विद्यालय, 11 स्वास्थ्य संस्थान और 13 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाओं का कार्य विभिन्न चरणों में जारी है।

भारत सरकार वर्तमान में नेपाल के काठमांडू, ललितपुर, भक्तपुर, सिन्धुपालचोक, नुवाकोट, रसुवा, धादिङ और गोरखा सहित आठ जिलों में कुल 30 सांस्कृतिक विरासत संरक्षण परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। इनमें ऐतिहासिक भवनों, मंदिरों, मठों, गुम्बाओं और धर्मशालाओं का संरक्षण एवं पुनर्निर्माण शामिल है।

प्रमुख परियोजनाओं में काठमांडू का सेतो मच्छिन्द्रनाथ मंदिर, ललितपुर का कुमारी घर और जेष्ठ वर्ण महाविहार, भक्तपुर का जंगम मठ तथा सिन्धुपालचोक का तार्के घ्याङ गुम्बा शामिल हैं।

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. राकेश पाण्डेय ने जेष्ठ वर्ण महाविहार उपभोक्ता समिति, CLPIU, INTACH तथा सभी संबंधित पक्षों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की सफलता भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंधों का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने दोहराया कि भारत सरकार नेपाल सरकार और नेपाली जनता के साथ साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के लिए भविष्य में भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ सहयोग करती रहेगी

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ललितपुर महानगरपालिका के मेयर श्री चिरीबाबु महर्जन ने कहा कि जेष्ठ वर्ण महाविहार का संरक्षण भारत-नेपाल विकास साझेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने ललितपुर की अन्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए भारत सरकार द्वारा दिए जा रहे आर्थिक सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया तथा इस सम्मान के लिए यूनेस्को का धन्यवाद देते हुए सभी पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी।

वहीं, जेष्ठ वर्ण महाविहार उपभोक्ता समिति के प्रतिनिधियों ने समय पर उपलब्ध कराई गई भारत सरकार की वित्तीय एवं तकनीकी सहायता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुनर्स्थापित जेष्ठ वर्ण महाविहार आज सामुदायिक एकजुटता, सांस्कृतिक संरक्षण और भारत-नेपाल मैत्री का गौरवशाली प्रतीक बन चुका है।

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